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विज्ञान दिवस के लिए:आम छात्रों के खास मॉडल बजा रहे विदेश में डंका
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नीरज कुमार का ऑटोमैटिक कटर का मॉडल।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। चंपावत जिले में विज्ञान प्रतिभाओं को निखारने के लिए माहौल तो दूर, प्रयोगशालाओं में जरूरी उपकरण तक नहीं है। बावजूद इसके जिले में दो वैज्ञानिकों ने खूब नाम कमाया है। एक छात्रा अपने शानदार मॉडल के चलते जापान तक डंका बजा चुकी है, तो एक अन्य छात्र को इस साल जापान से बुलावा है।
भिंगराड़ा जीआईसी की इंटर की छात्रा प्रीति भट्ट को अपने मॉडल बल्ब रिमूवर एंड कनेक्टर मॉडल (होल्डर में हाथ लगाए बगैर बल्ब लगाने का मॉडल) की बदौलत पिछले साल अप्रैल में जापान के लिए चयनित किया गया। जापान की साइंड एंड टेक्नोलॉजी संस्था ने उन्हें प्रमाणपत्र दिया। जापान - एशिया यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम (सकोरा साइंस प्लान) के तहत 2019 में जापान गई प्रदेश की अकेली छात्रा थी।
वहीं चंपावत जीआईसी के नौंवी के छात्र नीरज कुमार को इस साल जून में जापान के लिए चयनित किया गया है। मार्गदर्शक शिक्षक मनोज जोशी बताते हैं कि उन्हें यह मौका उनके दो मॉडल (ऑटोमैटिक वॉटर टैंक व ऑटोमीटिक कटर) के लिए मिला है। ऑटोमैटिक वॉटर टैंक (हाथ विहीन लोगों के लिए पांव से प्रेशर पैड का उपयोग कर पानी निकालने की सुविधा) प्रोजेक्ट के बाद ऑटोमैटिक कटर प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय नवोन्मेषी फाउंडेशन ने चयनित किया था।
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नीरज मार्च 2019 में ऑटोमैटिक वॉटर टैंक (हाथविहीन लोगों के लिए पांव से प्रेशर पैड का उपयोग कर पानी निकालने की सुविधा) प्रोजेक्ट के लिए गांधीनगर में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने फेस्टिवल ऑफ इनोवेशन तथा एंटरप्रिनोरशिप कार्यक्रम में सम्मानित कर चुके हैं। और अब वे इन मॉडलों के साथ जून 2020 में जापान जाएंगे।
बाक्स
होल्डर में हाथ लगाए बगैर लगाया जा सकेगा बल्ब
हाथ से बल्ब लगाने और निकालने में नेत्रहीनों को करंट का खतरा है, लेकिन प्रीति भट्ट के मॉडल के जरिए इस झटके से निजात मिल सकेगी। प्रीति ने एक ऐसा नवाचारी मॉडल बनाया है, जिसके उपयोग से बल्ब लगाने-निकालने में हाथ नहीं लगाना पड़ेगा।
बाक्स
हाथ कटने व संक्रमण से बचने के लिए बनाया ऑटोमैटिक कटर
शादी-ब्याह या दूसरे कार्यक्रमों में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक मात्रा में सब्जियों को चाकू से काटा जाता है। जिससे हाथ कटने, खून बहने से संक्रमण होता है। इसे देखते हुए नीरज कुमार ने ऑटोमैटिक कटर के आइडिया को मूर्त रूप दिया। सिलाई की मशीन के आकर के कटर को लकड़ी में तैयार कर दाहिनी तरफ लगे हैंडल को घूमाने से बाई ओर लगे चाकू से किसी भी तरह की सब्जी को काटा जा सकेगा।
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भिंगराड़ा जीआईसी की इंटर की छात्रा प्रीति भट्ट को अपने मॉडल बल्ब रिमूवर एंड कनेक्टर मॉडल (होल्डर में हाथ लगाए बगैर बल्ब लगाने का मॉडल) की बदौलत पिछले साल अप्रैल में जापान के लिए चयनित किया गया। जापान की साइंड एंड टेक्नोलॉजी संस्था ने उन्हें प्रमाणपत्र दिया। जापान - एशिया यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम (सकोरा साइंस प्लान) के तहत 2019 में जापान गई प्रदेश की अकेली छात्रा थी।
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वहीं चंपावत जीआईसी के नौंवी के छात्र नीरज कुमार को इस साल जून में जापान के लिए चयनित किया गया है। मार्गदर्शक शिक्षक मनोज जोशी बताते हैं कि उन्हें यह मौका उनके दो मॉडल (ऑटोमैटिक वॉटर टैंक व ऑटोमीटिक कटर) के लिए मिला है। ऑटोमैटिक वॉटर टैंक (हाथ विहीन लोगों के लिए पांव से प्रेशर पैड का उपयोग कर पानी निकालने की सुविधा) प्रोजेक्ट के बाद ऑटोमैटिक कटर प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय नवोन्मेषी फाउंडेशन ने चयनित किया था।
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नीरज मार्च 2019 में ऑटोमैटिक वॉटर टैंक (हाथविहीन लोगों के लिए पांव से प्रेशर पैड का उपयोग कर पानी निकालने की सुविधा) प्रोजेक्ट के लिए गांधीनगर में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने फेस्टिवल ऑफ इनोवेशन तथा एंटरप्रिनोरशिप कार्यक्रम में सम्मानित कर चुके हैं। और अब वे इन मॉडलों के साथ जून 2020 में जापान जाएंगे।
बाक्स
होल्डर में हाथ लगाए बगैर लगाया जा सकेगा बल्ब
हाथ से बल्ब लगाने और निकालने में नेत्रहीनों को करंट का खतरा है, लेकिन प्रीति भट्ट के मॉडल के जरिए इस झटके से निजात मिल सकेगी। प्रीति ने एक ऐसा नवाचारी मॉडल बनाया है, जिसके उपयोग से बल्ब लगाने-निकालने में हाथ नहीं लगाना पड़ेगा।
बाक्स
हाथ कटने व संक्रमण से बचने के लिए बनाया ऑटोमैटिक कटर
शादी-ब्याह या दूसरे कार्यक्रमों में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक मात्रा में सब्जियों को चाकू से काटा जाता है। जिससे हाथ कटने, खून बहने से संक्रमण होता है। इसे देखते हुए नीरज कुमार ने ऑटोमैटिक कटर के आइडिया को मूर्त रूप दिया। सिलाई की मशीन के आकर के कटर को लकड़ी में तैयार कर दाहिनी तरफ लगे हैंडल को घूमाने से बाई ओर लगे चाकू से किसी भी तरह की सब्जी को काटा जा सकेगा।

छात्र नीरज कुमार।- फोटो : CHAMPAWAT

भिंगराड़ा जीआईसी की छात्रा प्रीति भट्ट।- फोटो : CHAMPAWAT