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बिना कारण 2005 में नौकरी से निकाला
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Sat, 21 Jan 2017 09:34 PM IST
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मोहन चंद्र जोशी
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का पूर्व सैनिक मोहन चंद्र जोशी न्याय के लिए दर-दर की ठोकर खा रहे हैं। पिछले दिनों सोशल मीडिया में देश के कई हिस्सों में आए उत्पीड़न के मामलों के बाद इस जवान ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर मदद की गुहार लगाई है।
पत्र में कहा गया है कि उसने 4 अप्रैल 1985 को सीआईएसएफ में सेवा शुरू की। कई वर्षों तक निष्ठा के साथ काम करने के बाद 2002 में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में की गई। आरोप लगाया कि इसके बाद कुछ अधिकारियों ने उन्हें बेवजह परेशान करना शुरू कर दिया। 13 मई 2005 में बिना कारण बताए वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया।
अधिकारियों ने गुमराह कर सादे कागज पर हस्ताक्षर करावा लिए। जवान ने बताया कि बल से बाहर निकलने के बाद उन्हें सरकार द्वारा कोई भी सुविधाएं उपलब्ध न हो पाई। इसके बाद उनकी आर्थिक स्थित बदहाल होती गई। कहा कि उसकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। मेहनत-मजदूरी कर वह परिवार का भरण-पोषण करने को मजबूर हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से मदद की गुहार लगाते हुए न्याय की मांग की है।
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पत्र में कहा गया है कि उसने 4 अप्रैल 1985 को सीआईएसएफ में सेवा शुरू की। कई वर्षों तक निष्ठा के साथ काम करने के बाद 2002 में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में की गई। आरोप लगाया कि इसके बाद कुछ अधिकारियों ने उन्हें बेवजह परेशान करना शुरू कर दिया। 13 मई 2005 में बिना कारण बताए वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया।
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अधिकारियों ने गुमराह कर सादे कागज पर हस्ताक्षर करावा लिए। जवान ने बताया कि बल से बाहर निकलने के बाद उन्हें सरकार द्वारा कोई भी सुविधाएं उपलब्ध न हो पाई। इसके बाद उनकी आर्थिक स्थित बदहाल होती गई। कहा कि उसकी पारिवारिक आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। मेहनत-मजदूरी कर वह परिवार का भरण-पोषण करने को मजबूर हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से मदद की गुहार लगाते हुए न्याय की मांग की है।
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