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Uttarakhand Forest Fire: कैसे बुझे जंगलों की आग...जब सरकारी महकमे के आंकड़े अलग-अलग, लाचार नजर आ रहा विभाग

Wed, 08 May 2024 01:15 PM IST
हीरा मेहरा पंकज पाठक, संवाद
पंकज पाठक, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Wed, 08 May 2024 01:15 PM IST
सार

चंपावत जिले में वन विभाग में 57 वनाग्नि की घटनाएं हैं, लेकिन अग्निशमन विभाग के पास वनाग्नि के 109 मामले हैं। वनाग्नि की घटनाओं के चलते सबसे अधिक नुकसान कीट, पतंगे, पक्षियों, जंगली जानवरों को पहुंचा है।

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Fire in Uttarakhand Forest: Different figures from two departments regarding forest fires in uttarakhand
fire - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंपावत जिले में वन विभाग में 57 वनाग्नि की घटनाएं हैं, लेकिन अग्निशमन विभाग के पास वनाग्नि के 109 मामले हैं। इसमें लोहाघाट अग्नि शमन के पास 62 वनाग्नि की सूचनाएं आई हैं। जबकि टनकपुर अग्निशमन के पास 47 वनाग्नि की सूचनाएं आई है। टनकपुर में सभी जगह अग्निशमन ने समय से पहुंचकर आग पर काबू पाया। जबकि लोहाघाट अग्निशमन को 62 स्थानों में आग पर काबू पाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। वनाग्नि की घटनाओं के चलते सबसे अधिक नुकसान कीट, पतंगे, पक्षियों, जंगली जानवरों को काफी नुकसान पहुंचा है। इनके नुकसान का आंकलन विभाग के लिए करना संभव नहीं है।

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डीएफओ आरसी कांडपाल ने बताया कि आग अपने आप नहीं लगती है। इसे क्षेत्र के अराजक तत्वों ही अंजाम दे रहे हैं। अभी 12 नामजद सहित कुल 42 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए गए हैं। वर्तमान तक आग बुझाने में 12 से अधिक कर्मचारी घायल भी हुए हैं। इधर डीएफओ ने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों में संचार सुविधा नहीं होने के कारण वनाग्नि की घटनाएं मिलना आसान नहीं हो रहा है।
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वनकर्मियों की जंगलों बीच गुजर रही रात, वहीं खा रहे खाना
चंपावत के भिंगराड़ा क्षेत्र समेत अन्य स्थानों पर वन विभाग के कर्मियों की रातें जंगलों के बीच कट रही है। कर्मियों को खाने का ध्यान नहीं है। दिन के समय थोड़ा खाना नसीब तो रहा है, लेकिन रात में जहां गश्त कर रहे हैं, कर्मी वहीं पर बैठकर खाना ख रहे हैं। कई बार तो रात का खाना भी नसीब नहीं हो रहा है। पहला निवाला मुंह में जाते ही जैसे ही वनाग्नि की सूचना मिलती है तो बस कर्मी तुरंत क्षेत्र में वनाग्नि की रोकथाम के लिए दौड़ लगा देते हैं। कर्मी रात गश्त के दौरान भी जंगल क्षेत्रों में घुम रहे लोगों को जागरूक कर रहे हैं। वनाग्नि की रोकथाम के लिए होमगार्ड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहें हैं। भिंगराड़ा रेंज के रेंजर हिमालय सिंह टोलिया ने बताया कि वन विभाग के कर्मी 24 घंटे सेवा दे रहें हैं। रात का भोजन भी जंगल में हो रहा है।

गांव में आग बुझाने वाले नहीं
वनाग्नि की आग बुझाने वाले गांव में कोई नहीं है। वर्तमान में जंगलों आग को सिर्फ गांव में देखने वाले रह गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सुख सुविधाओं के आभाव में लोगों ने गांव से पलायन कर लिया है। अब गांवों ज्यादातर बुजुर्ग ही बचे हैं। उनके लिए जंगलों की आग बुझाना संभव नहीं है। जहां लोग हैं तो वह सिर्फ आग को दूर से देख रहे हैं कि आग कहां तक पहुंची गई। कई तो आग लगने की जानकारी भी नहीं दे रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि उनके लिए यह सामान्य सी बात है। बुजुर्ग भीम राम का कहना है कि पहल जहां जंगलों में आग लगती थी तो ग्रामीण उसके बुझने तक नजर रखते थे। अब तो जंगलों से बस धुंआ निकलता हुआ दिखता है तो भी कोई मौके पर जाकर नहीं देखता है। खेतीबाड़ी भी लोगों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली जानवरों के कारण कम कर दी है। ऐसे में जंगलों की आग को बुझाने कोई नहीं आता है।

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