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जिले में दो माह से नहीं मिला सस्ते गल्ले का राशन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Thu, 23 Feb 2017 10:34 PM IST
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राशन
- फोटो : अमर उजाला
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इस साल जिले के लोगों को सरकारी सस्ता गल्ले का राशन नहीं मिल पाया है। अंत्योदय और बीपीएल परिवार भी सस्ते राशन के लिए मोहताज हैं। दरअसल पूर्ति विभाग और सस्ता गल्ला विक्रेताओं की यूनियन के बीच तनातनी के कारण यह हालात हुए हैं। पूर्ति विभाग आधार लिंक होने वाली यूनिट के आधार पर राशन आवंटित कर रहा है, मगर गल्ला विक्रेता पूरा राशन देने की मांग पर अड़े हैं। इस विवाद की मार जिले के 2.73 लाख लोगों को भुगतनी पड़ रही है। जिन्हें जनवरी से अब तक राशन नहीं मिल सका है।
जिले में 57783 राशनकार्ड धारकों की कुल 273538 यूनिट हैं। 57783 राशनकार्डों में से 55694 कार्ड आधार से लिंक हो चुके हैं। लेकिन 273538 यूनिटों में से 164125 यूनिट ही आधार से लिंक हो सकी है। पूर्ति विभाग का कहना है कि आधार लिंक के हिसाब से ही राशन दिए जाने के निर्देश हैं। राशनकार्ड के हिसाब से राशन नहीं मिलने से गल्ला विक्रेता खाद्यान्न नहीं उठा रहे हैं। इसकी मार गरीब वर्ग के कार्ड धारकों को सबसे ज्यादा हो रही है।
जिले में 14518 बीपीएल और 5841 अंत्योदय कार्डधारक हैं। जिन्हें अब खुले बाजार से महंगा अनाज खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। चूड़ामणि, चेतराम, जोत सिंह सहित तमाम बीपीएल वर्ग के कार्ड धारकों का कहना है कि सरकारी गल्ले का राशन नहीं मिलने से उनकी जेब ढीली हो रही है। अंत्योदय वर्ग के इन ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें 47 किलो गेहूं और चावल बाजार से 979 रुपए देकर खरीदना पड़ रहा है। ये राशन सस्ता गल्ले से मात्र 127 रुपए में मिलता है। हमें 852 रुपए अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि राशनकार्ड की सभी यूनिटों को आधार लिंक करने के लिए अभियान चलाया गया है।
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अंत्योदय कार्डधारक को मिलता है 47 किलो अनाज
अंत्योदय कार्डधारक को हर माह 13.300 किलो गेहूं व 33.700 किलो चावल मिलता है। वहीं राज्य खाद्य योजना के अंतर्गत प्रति कार्ड दो किलो गेहूं व तीन किलो चावल मिलता है। गेहूं दो रुपए किलो व चावल तीन रुपए किलो के हिसाब से मिलता है। वहीं एपीएल वर्ग को महज दस किलो चावल दिया जाता है। लेकिन दिसंबर 2016 के बाद किसी भी कार्डधारक को एक दाना भी अनाज नहीं मिला।
पूर्ति विभाग सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं को 50 प्रतिशत खाद्यान्न उठाने को कह रहा है। आधार लिंक होने की प्रत्याशा में सभी यूनिटों के हिसाब से राशन दिया जाए। ऐसा न होने तक गल्ला विक्रेता खाद्यान्न नहीं उठाएंगे।
-हीराबल्लभ जोशी, अध्यक्ष, आदर्श राशनिंग वेलफेयर सोसायटी, चंपावत।
शासन के निर्देशों के तहत आधार लिंक होने वाली यूनिटों के आधार पर ही राशन दिया जा रहा है। जिले में कुल 273538 यूनिटों में से 60 प्रतिशत का ही आधार लिंक हो सका है। इस कारण सस्ता गल्ला विक्रेताओं को उतना ही राशन उठाने को कहा गया है, लेकिन राशन विक्रेता शत-प्रतिशत राशन देने की मांग करते हुए इसे नहीं उठा रहे हैं।
-श्याम लाल, जिला पूर्ति अधिकारी, चंपावत।
जिले में 57783 राशनकार्ड धारकों की कुल 273538 यूनिट हैं। 57783 राशनकार्डों में से 55694 कार्ड आधार से लिंक हो चुके हैं। लेकिन 273538 यूनिटों में से 164125 यूनिट ही आधार से लिंक हो सकी है। पूर्ति विभाग का कहना है कि आधार लिंक के हिसाब से ही राशन दिए जाने के निर्देश हैं। राशनकार्ड के हिसाब से राशन नहीं मिलने से गल्ला विक्रेता खाद्यान्न नहीं उठा रहे हैं। इसकी मार गरीब वर्ग के कार्ड धारकों को सबसे ज्यादा हो रही है।
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जिले में 14518 बीपीएल और 5841 अंत्योदय कार्डधारक हैं। जिन्हें अब खुले बाजार से महंगा अनाज खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। चूड़ामणि, चेतराम, जोत सिंह सहित तमाम बीपीएल वर्ग के कार्ड धारकों का कहना है कि सरकारी गल्ले का राशन नहीं मिलने से उनकी जेब ढीली हो रही है। अंत्योदय वर्ग के इन ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें 47 किलो गेहूं और चावल बाजार से 979 रुपए देकर खरीदना पड़ रहा है। ये राशन सस्ता गल्ले से मात्र 127 रुपए में मिलता है। हमें 852 रुपए अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं प्रशासन का कहना है कि राशनकार्ड की सभी यूनिटों को आधार लिंक करने के लिए अभियान चलाया गया है।
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अंत्योदय कार्डधारक को मिलता है 47 किलो अनाज
अंत्योदय कार्डधारक को हर माह 13.300 किलो गेहूं व 33.700 किलो चावल मिलता है। वहीं राज्य खाद्य योजना के अंतर्गत प्रति कार्ड दो किलो गेहूं व तीन किलो चावल मिलता है। गेहूं दो रुपए किलो व चावल तीन रुपए किलो के हिसाब से मिलता है। वहीं एपीएल वर्ग को महज दस किलो चावल दिया जाता है। लेकिन दिसंबर 2016 के बाद किसी भी कार्डधारक को एक दाना भी अनाज नहीं मिला।
पूर्ति विभाग सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं को 50 प्रतिशत खाद्यान्न उठाने को कह रहा है। आधार लिंक होने की प्रत्याशा में सभी यूनिटों के हिसाब से राशन दिया जाए। ऐसा न होने तक गल्ला विक्रेता खाद्यान्न नहीं उठाएंगे।
-हीराबल्लभ जोशी, अध्यक्ष, आदर्श राशनिंग वेलफेयर सोसायटी, चंपावत।
शासन के निर्देशों के तहत आधार लिंक होने वाली यूनिटों के आधार पर ही राशन दिया जा रहा है। जिले में कुल 273538 यूनिटों में से 60 प्रतिशत का ही आधार लिंक हो सका है। इस कारण सस्ता गल्ला विक्रेताओं को उतना ही राशन उठाने को कहा गया है, लेकिन राशन विक्रेता शत-प्रतिशत राशन देने की मांग करते हुए इसे नहीं उठा रहे हैं।
-श्याम लाल, जिला पूर्ति अधिकारी, चंपावत।