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चंपावत जिले में दो नदियों में डूबने से दो किशोरों की मौत
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दीपक राम। (फाइल फोटो)
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत/टनकपुर। चंपावत जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में शुक्रवार को दो किशोरों की डूबकर मौत हो गई। एक किशोर टनकपुर में शारदा में तो दूसरा दूसरा नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश के नीड़ में लोहावती नदी में डूब गया।
तल्लादेश क्षेत्र के नीड़ गांव का दीपक राम (17) पुत्र हयात राम अपने दोस्तों के साथ पास के गांव में एक निमंत्रण में जा रहा था। इसी दौरान दीपक और उसके दोस्त रास्ते में पड़ने वाली लोहावती नदी में नहाने के लिए चले गए। नहाते समय दीपक डूबने लगा। दीपक को डूबता देख दोस्तों में चीखपुकार मच गई। शोर सुन गांव के लोग मौके पर पहुंचे। दीपक को बेहोशी की हालत में नदी से निकाला गया। उसे मंच अस्पताल लाया गया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। दीपक ने इसी साल इंटर पास किया था। सूचना मिलने पर तहसीलदार ज्योति धपवाल, राजस्व उप निरीक्षक कुसुम गोस्वामी, जोहरी दत्त, खीमानंद भट्ट, मोहन पाटनी, रमेश जोशी शुक्रवार रात मंच पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव शनिवार को परिजनों को सौंप दिया गया।
उधर, टनकपुर के वार्ड नंबर चार निवासी जकील अहमद (15) पुत्र शकील अहमद अपने दोस्तों के साथ शुक्रवार को कालाझाला स्थित शारदा नदी में नहाने के लिए गया था। तभी जकील गहरे पानी में चला गया। काफी मशक्कत के बाद किशोर को स्थानीय लोगों की मदद से बाहर तो निकाल लिया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। कोतवाल चंद्रमोहन सिंह ने बताया कि शारदा में स्नान करते समय गहरे पानी में डूबने से किशोर की मौत हुई है।
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एक साल में डूबने से 14 लोगों की मौत
चंपावत। चंपावत जिले में बीते एक साल में 14 लोगों की विभिन्न नदियों में डूबने से मौत हो चुकी है। इसमें पांच लोग पहाड़ में और नौ लोग मैदानी क्षेत्र में डूब कर जान गंवा चुके हैं। मैदानी क्षेत्र टनकपुर में जल पुलिस एक साल में 17 लोगों की जान भी बचा चुकी है।
चंपावत में विभिन्न नदियों में डूबने की घटनाएं लगातार बढ़ रहीं हैं। इसकी बड़ी वजह नदी में सुरक्षा के उपायों की कमी और लोगों की लापरवाही है। जल पुलिस की कमी के अलावा अधिकतर जगह चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगे हैं। पहाड़ में डूबे व्यक्ति की तलाश के लिए भी मुख्यालय से 75 किमी दूर से जल पुलिसकर्मियों को भेजा जाता है।
चंपावत के पहाड़ी क्षेत्र में सरयू, लोहावती, गंडक, लधिया, क्वैराला और मैदानी क्षेत्र टनकपुर में शारदा नदी है। कई जगह पुल नहीं होने से छोटे नदी-नालों को भी पार करने की मजबूरी रहती है। इनमें अधिकतर जगह बचाव के इंतजाम नहीं है। टनकपुर-बनबसा में जल पुलिस के जवान जरूर हैं। मैदानी क्षेत्र को छोड़ कहीं भी नदियों में बचाव के लिए जंजीर तक की व्यवस्था नहीं है। एसपी देवेंद्र पींचा का कहना है कि जिले के पर्वतीय क्षेत्र में जल पुलिस नहीं है। जरूरत होने पर टनकपुर से जल पुलिस और एसडीआरएफ कर्मियों को बुलाया जाता है।
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तल्लादेश क्षेत्र के नीड़ गांव का दीपक राम (17) पुत्र हयात राम अपने दोस्तों के साथ पास के गांव में एक निमंत्रण में जा रहा था। इसी दौरान दीपक और उसके दोस्त रास्ते में पड़ने वाली लोहावती नदी में नहाने के लिए चले गए। नहाते समय दीपक डूबने लगा। दीपक को डूबता देख दोस्तों में चीखपुकार मच गई। शोर सुन गांव के लोग मौके पर पहुंचे। दीपक को बेहोशी की हालत में नदी से निकाला गया। उसे मंच अस्पताल लाया गया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। दीपक ने इसी साल इंटर पास किया था। सूचना मिलने पर तहसीलदार ज्योति धपवाल, राजस्व उप निरीक्षक कुसुम गोस्वामी, जोहरी दत्त, खीमानंद भट्ट, मोहन पाटनी, रमेश जोशी शुक्रवार रात मंच पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव शनिवार को परिजनों को सौंप दिया गया।
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उधर, टनकपुर के वार्ड नंबर चार निवासी जकील अहमद (15) पुत्र शकील अहमद अपने दोस्तों के साथ शुक्रवार को कालाझाला स्थित शारदा नदी में नहाने के लिए गया था। तभी जकील गहरे पानी में चला गया। काफी मशक्कत के बाद किशोर को स्थानीय लोगों की मदद से बाहर तो निकाल लिया गया लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। कोतवाल चंद्रमोहन सिंह ने बताया कि शारदा में स्नान करते समय गहरे पानी में डूबने से किशोर की मौत हुई है।
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एक साल में डूबने से 14 लोगों की मौत
चंपावत। चंपावत जिले में बीते एक साल में 14 लोगों की विभिन्न नदियों में डूबने से मौत हो चुकी है। इसमें पांच लोग पहाड़ में और नौ लोग मैदानी क्षेत्र में डूब कर जान गंवा चुके हैं। मैदानी क्षेत्र टनकपुर में जल पुलिस एक साल में 17 लोगों की जान भी बचा चुकी है।
चंपावत में विभिन्न नदियों में डूबने की घटनाएं लगातार बढ़ रहीं हैं। इसकी बड़ी वजह नदी में सुरक्षा के उपायों की कमी और लोगों की लापरवाही है। जल पुलिस की कमी के अलावा अधिकतर जगह चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगे हैं। पहाड़ में डूबे व्यक्ति की तलाश के लिए भी मुख्यालय से 75 किमी दूर से जल पुलिसकर्मियों को भेजा जाता है।
चंपावत के पहाड़ी क्षेत्र में सरयू, लोहावती, गंडक, लधिया, क्वैराला और मैदानी क्षेत्र टनकपुर में शारदा नदी है। कई जगह पुल नहीं होने से छोटे नदी-नालों को भी पार करने की मजबूरी रहती है। इनमें अधिकतर जगह बचाव के इंतजाम नहीं है। टनकपुर-बनबसा में जल पुलिस के जवान जरूर हैं। मैदानी क्षेत्र को छोड़ कहीं भी नदियों में बचाव के लिए जंजीर तक की व्यवस्था नहीं है। एसपी देवेंद्र पींचा का कहना है कि जिले के पर्वतीय क्षेत्र में जल पुलिस नहीं है। जरूरत होने पर टनकपुर से जल पुलिस और एसडीआरएफ कर्मियों को बुलाया जाता है।