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डीएलएड प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण से पहले देना होगा शपथ पत्र
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
Updated Wed, 10 Jan 2018 10:39 PM IST
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लोहाघाट स्थित डायट का भवन।
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। डिप्लोमा इन एलिमेंटरी एजुकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षु अध्यापकों के लिए लोहाघाट के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में प्रशिक्षण करना खतरे से खाली नहीं है। इसकी वजह यहां के डायट को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षण परिषद (एनसीटीई) से मान्यता का नहीं होना है।
उत्तराखंड अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण के निदेशक सीमा जौनसारी ने नौ जनवरी को डायट के प्राचार्य को इस संबंध में पत्र भेजा है। जिसमें लोहाघाट डायट में द्विवार्षिक डीएलएड प्रशिक्षण होने पर किसी तरह के प्रतिकूल प्रभाव होने पर प्रशिक्षु के खुद जिम्मेदार होने की बात कही गई है। साथ ही प्रशिक्षण लेने से पूर्व प्रशिक्षु को इस आशय का शपथ पत्र भी विभाग को देना होगा।
डीडीहाट डायट के प्राचार्य द्वारा चंपावत के प्रशिक्षुओं को लोहाघाट में प्रशिक्षण की अनुमति देने का निदेशक को प्रस्ताव भेजा गया था। इसके जवाब में निदेशक ने ताजा पत्र जारी किया है। लोहाघाट में करीब 13 साल पूर्व खुले डायट में इस समय एक भी डीएलएड प्रशिक्षु नहीं है। फिलहाल यहां के डीएलएड प्रशिक्षुओं को लोहाघाट के बजाय 125 किमी दूर डीडीहाट में प्रशिक्षण दिया जाता है।
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जिस कारण उन्हें दो साल तक धन खर्च करना पड़ता है। वैसे लोहाघाट डायट में 2008-09 में विशिष्ट बीटीसी व 2010-12 में बीटीसी का दो वर्ष का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा यहां बीएड, टीईटी व सेवारत शिक्षकों का प्रशिक्षण होता है। अगले दो माह बाद यहां भी डीएलएड प्रशिक्षण शुरू होना है। तब यहां से प्रशिक्षण लेने वाले प्रशिक्षु को शपथ पत्र देना होगा। इस वक्त यहां 17 प्रवक्ताओं के सापेक्ष 13 कार्यरत हैं।
तीन वजहों से नहीं मिली मान्यता
प्राचार्य केसी साक्य का कहना है कि लोहाघाट डायट की मान्यता खारिज होने की तीन वजहें थीं। प्रयोगशाला में पर्याप्त उपकरण न होना, पुस्तकालय में पुस्तकों की कमी और बहुउद्देश्यीय हॉल के नहीं होने से मान्यता नहीं मिल सकी। प्रयोगशाला व पुस्तकालय की अड़चनों को दूर कर लिया गया है तथा 69.60 लाख रुपये की लागत से बहुउद्देश्यीय हॉल का निर्माण भी चल रहा है। भवन का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। विभाग अब 2018-19 शिक्षा सत्र में मान्यता के लिए फिर से क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन करेगा।
कोट
लोहाघाट डायट को फिलहाल एनसीटीई की मान्यता नहीं है। मान्यता के लिए 2016 में क्षेत्रीय कार्यालय जयपुर में आवेदन किया गया था। लेकिन यहां से मान्यता पत्रावली खारिज कर दी गई। दुबारा किए गए प्रतिवेदन को भी स्वीकार नहीं किया गया। बाद में एनसीटीई के मुख्यालय दिल्ली में मान्यता के लिए आवेदन किया, परंतु यहां भी कमियों के चलते इसे निरस्त कर दिया गया।
केसी साक्य, प्राचार्य, डायट, लोहाघाट।
उत्तराखंड अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण के निदेशक सीमा जौनसारी ने नौ जनवरी को डायट के प्राचार्य को इस संबंध में पत्र भेजा है। जिसमें लोहाघाट डायट में द्विवार्षिक डीएलएड प्रशिक्षण होने पर किसी तरह के प्रतिकूल प्रभाव होने पर प्रशिक्षु के खुद जिम्मेदार होने की बात कही गई है। साथ ही प्रशिक्षण लेने से पूर्व प्रशिक्षु को इस आशय का शपथ पत्र भी विभाग को देना होगा।
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डीडीहाट डायट के प्राचार्य द्वारा चंपावत के प्रशिक्षुओं को लोहाघाट में प्रशिक्षण की अनुमति देने का निदेशक को प्रस्ताव भेजा गया था। इसके जवाब में निदेशक ने ताजा पत्र जारी किया है। लोहाघाट में करीब 13 साल पूर्व खुले डायट में इस समय एक भी डीएलएड प्रशिक्षु नहीं है। फिलहाल यहां के डीएलएड प्रशिक्षुओं को लोहाघाट के बजाय 125 किमी दूर डीडीहाट में प्रशिक्षण दिया जाता है।
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जिस कारण उन्हें दो साल तक धन खर्च करना पड़ता है। वैसे लोहाघाट डायट में 2008-09 में विशिष्ट बीटीसी व 2010-12 में बीटीसी का दो वर्ष का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा यहां बीएड, टीईटी व सेवारत शिक्षकों का प्रशिक्षण होता है। अगले दो माह बाद यहां भी डीएलएड प्रशिक्षण शुरू होना है। तब यहां से प्रशिक्षण लेने वाले प्रशिक्षु को शपथ पत्र देना होगा। इस वक्त यहां 17 प्रवक्ताओं के सापेक्ष 13 कार्यरत हैं।
तीन वजहों से नहीं मिली मान्यता
प्राचार्य केसी साक्य का कहना है कि लोहाघाट डायट की मान्यता खारिज होने की तीन वजहें थीं। प्रयोगशाला में पर्याप्त उपकरण न होना, पुस्तकालय में पुस्तकों की कमी और बहुउद्देश्यीय हॉल के नहीं होने से मान्यता नहीं मिल सकी। प्रयोगशाला व पुस्तकालय की अड़चनों को दूर कर लिया गया है तथा 69.60 लाख रुपये की लागत से बहुउद्देश्यीय हॉल का निर्माण भी चल रहा है। भवन का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। विभाग अब 2018-19 शिक्षा सत्र में मान्यता के लिए फिर से क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन करेगा।
कोट
लोहाघाट डायट को फिलहाल एनसीटीई की मान्यता नहीं है। मान्यता के लिए 2016 में क्षेत्रीय कार्यालय जयपुर में आवेदन किया गया था। लेकिन यहां से मान्यता पत्रावली खारिज कर दी गई। दुबारा किए गए प्रतिवेदन को भी स्वीकार नहीं किया गया। बाद में एनसीटीई के मुख्यालय दिल्ली में मान्यता के लिए आवेदन किया, परंतु यहां भी कमियों के चलते इसे निरस्त कर दिया गया।
केसी साक्य, प्राचार्य, डायट, लोहाघाट।