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सुविधाओं की कमी से विकास की राह पथरीली
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सड़क सुविधा से वंचित लोहाघाट के नेपाल सीमा से लगे कायल गांव में लहलहाती धान की फसल।
- फोटो : LOHAGHAT
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लोहाघाट (नवल जोशी )। सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी ने कायल ग्राम पंचायत के गांवों की विकास की राह को पथरीला कर दिया है। खेती के लिए उपजाऊ जमीन होने के बावजूद सुविधाओं की कमी के चलते बीते दो दशक में पांच गांवों के 205 लोग पलायन कर चुके हैं।
लोहाघाट से 25 किमी दूर कायल ग्राम पंचायत में सड़क और अन्य सुविधाओं की कमी के कारण लोग गांव से दूरी बनाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। ग्राम पंचायत के डनगांव तोक से 35, कायल से 47, भोजनी से 27 और लोजनी गांव के 19 लोग दूसरी जगह बस चुके हैं। टुंटाबिष्ट में तो 77 लोग गांव छोड़ चुके हैं। सड़क से छह किमी दूर इस गांव में पढ़ाई से लेकर कमाई और सड़क से लेकर सेहत तक की कोई सुविधा नहीं है। इलाज के लिए डोली से छह किमी डनगांव या डुंगराबोरा ले जाना लाचारी को दर्शाता है तो पांचवीं के बाद की पढ़ाई के लिए 12 किमी दूरी लांघना यहां के मासूमों की मजबूरी है।
बैंक की शाखा या डाकघर ग्रामीणों के लिए सपना है। इन सबका नतीजा है पलायन। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 16 अगस्त को देवीधुरा दौरे के दौरान डनगांव-भोजनी-कायल गांव के लिए आठ किमी सड़क की घोषणा की लेकिन अभी जीओ नहीं हुआ है।
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टुंटाबिष्ट गांव को मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना में शामिल किया गया है। बुनियादी सुविधाओं के अलावा स्वरोजगार की योजनाओं को प्रस्तावित किया गया है। - एमसी परंगाई, बीडीओ, लोहाघाट।
सड़क की कमी पलायन का सबसे बड़ा कारण है। मुख्यमंत्री ने सवा महीने पहले देवीधुरा में सड़क का एलान किया था लेकिन अभी तक आगे की कार्रवाई नहीं हुई है। - मोहन सिंह, ग्राम प्रधान।
सड़क न होने से सात किमी पैदल चलने की मजबूरी है। इससे दूसरी सुविधाओं की दूरी भी बढ़ रही है। और इन सबका नतीजा गांव से मोहभंग होना है। - सूरज सिंह, अध्यक्ष, युवक मंगल दल।
सड़क नहीं होने की मार जीवन के हर क्षेत्र में पड़ रही है। बीमार होने पर डोली और घंटों की पीड़ा यहां के लोगों की जिंदगी का हिस्सा है। - प्रेम सिंह, ग्रामीण।
सवा दो करोड़ की मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना से राहत का इंतजार
चंपावत। गांवों से पलायन पर लगाम लगाने के लिए पिछले साल मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना बनाई गई लेकिन इससे राहत मिलना अभी बाकी है। योजना के तहत चंपावत जिले के चयनित 39 गांवों के लिए 224.26 लाख रुपये की योजनाएं तैयार की गई हैं। डीएम विनीत तोमर का कहना है कि इस योजना में दूरदराज के बुनियादी सुविधाओं से वंचित गांवों को चयनित किया गया है। योजना के तहत तेजपात पौध पट्टी विकास, मसाला यूनिट, आटा चक्की, दुग्ध सहकारिता, बीज मिनी किट, सिंचाई टैंक, पॉलीहाउस, फल प्रसंस्करण यूनिट, उद्यमिता जागरूकता आदि पर जोर दिया जा रहा है।
पलायन रोकथाम योजना में चयनित गांव
लोहाघाट ब्लॉक : टुंटाबिष्ट, सलना और गुड़मांगल।
पाटी ब्लॉक : चौड़ातोक, भंडारी मछियाड़, चौड़ा, बमौर, ड्यूडी, गागरी, तल्लाबगड़, गागरी बगड़, थूम, कोटा, तल्ला सेरा, चसगर, हुमार, आटा, बनचौड़ा, कलियाधूर, दुगानी, चंद्रकोट, सिधोरी, तिमलपाखा, वोलना।
चंपावत ब्लॉक : बड़ोली, रीठा, काम्ताजामरी, नौलापानी, तलियाबांज, बोयल, भड़ियास, नैकाना, दमतोला, भीजर, लधौनटुकरा, गायल, पाटली, बाजा, भजनपुर।
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लोहाघाट से 25 किमी दूर कायल ग्राम पंचायत में सड़क और अन्य सुविधाओं की कमी के कारण लोग गांव से दूरी बनाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। ग्राम पंचायत के डनगांव तोक से 35, कायल से 47, भोजनी से 27 और लोजनी गांव के 19 लोग दूसरी जगह बस चुके हैं। टुंटाबिष्ट में तो 77 लोग गांव छोड़ चुके हैं। सड़क से छह किमी दूर इस गांव में पढ़ाई से लेकर कमाई और सड़क से लेकर सेहत तक की कोई सुविधा नहीं है। इलाज के लिए डोली से छह किमी डनगांव या डुंगराबोरा ले जाना लाचारी को दर्शाता है तो पांचवीं के बाद की पढ़ाई के लिए 12 किमी दूरी लांघना यहां के मासूमों की मजबूरी है।
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बैंक की शाखा या डाकघर ग्रामीणों के लिए सपना है। इन सबका नतीजा है पलायन। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 16 अगस्त को देवीधुरा दौरे के दौरान डनगांव-भोजनी-कायल गांव के लिए आठ किमी सड़क की घोषणा की लेकिन अभी जीओ नहीं हुआ है।
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टुंटाबिष्ट गांव को मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना में शामिल किया गया है। बुनियादी सुविधाओं के अलावा स्वरोजगार की योजनाओं को प्रस्तावित किया गया है। - एमसी परंगाई, बीडीओ, लोहाघाट।
सड़क की कमी पलायन का सबसे बड़ा कारण है। मुख्यमंत्री ने सवा महीने पहले देवीधुरा में सड़क का एलान किया था लेकिन अभी तक आगे की कार्रवाई नहीं हुई है। - मोहन सिंह, ग्राम प्रधान।
सड़क न होने से सात किमी पैदल चलने की मजबूरी है। इससे दूसरी सुविधाओं की दूरी भी बढ़ रही है। और इन सबका नतीजा गांव से मोहभंग होना है। - सूरज सिंह, अध्यक्ष, युवक मंगल दल।
सड़क नहीं होने की मार जीवन के हर क्षेत्र में पड़ रही है। बीमार होने पर डोली और घंटों की पीड़ा यहां के लोगों की जिंदगी का हिस्सा है। - प्रेम सिंह, ग्रामीण।
सवा दो करोड़ की मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना से राहत का इंतजार
चंपावत। गांवों से पलायन पर लगाम लगाने के लिए पिछले साल मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना बनाई गई लेकिन इससे राहत मिलना अभी बाकी है। योजना के तहत चंपावत जिले के चयनित 39 गांवों के लिए 224.26 लाख रुपये की योजनाएं तैयार की गई हैं। डीएम विनीत तोमर का कहना है कि इस योजना में दूरदराज के बुनियादी सुविधाओं से वंचित गांवों को चयनित किया गया है। योजना के तहत तेजपात पौध पट्टी विकास, मसाला यूनिट, आटा चक्की, दुग्ध सहकारिता, बीज मिनी किट, सिंचाई टैंक, पॉलीहाउस, फल प्रसंस्करण यूनिट, उद्यमिता जागरूकता आदि पर जोर दिया जा रहा है।
पलायन रोकथाम योजना में चयनित गांव
लोहाघाट ब्लॉक : टुंटाबिष्ट, सलना और गुड़मांगल।
पाटी ब्लॉक : चौड़ातोक, भंडारी मछियाड़, चौड़ा, बमौर, ड्यूडी, गागरी, तल्लाबगड़, गागरी बगड़, थूम, कोटा, तल्ला सेरा, चसगर, हुमार, आटा, बनचौड़ा, कलियाधूर, दुगानी, चंद्रकोट, सिधोरी, तिमलपाखा, वोलना।
चंपावत ब्लॉक : बड़ोली, रीठा, काम्ताजामरी, नौलापानी, तलियाबांज, बोयल, भड़ियास, नैकाना, दमतोला, भीजर, लधौनटुकरा, गायल, पाटली, बाजा, भजनपुर।