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सड़क और पानी को लेकर टुंटा बिष्ट के ग्रामीणों का प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूूूूराे लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Mon, 05 Feb 2018 11:29 PM IST
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सड़क और पानी की मांग को लेकर प्रदर्शन करते लोहाघाट के टुंटा बिष्ट के ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
सड़क और पानी की मांग को लेकर लोहाघाट ब्लॉक के टुंटा बिष्ट के ग्रामीण मुखर हो गए हैं। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे।
टुंटा बिष्ट में वन पंचायत सरपंच माधो सिंह रावत की अध्यक्षता और सुरेश चंद्र बिष्ट के संचालन में टुंटा लोजिनी विकास संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीणों का कहना था कि उनके गांव की सरेआम उपेक्षा की गई है। आजादी के बाद भी ग्रामीणों को आजादी का अहसास नहीं हो पा रहा है। सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को बीमार लोगों, वृद्धों, गर्भवतियों को सड़क तक लाने में करीब दो घंटे का पैदल सफर तय करना पड़ता है। जिसके बाद लोहाघाट अस्पताल आने में उन्हें 35 किलोमीटर का सफर वाहनों से करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि 1965 में चीन के साथ हुए युद्ध में टुंटा बिष्ट के लोगों ने अहम योगदान दिया था। उस वक्त लड़ाई के लिए टुंटा बिष्ट के गांव में अलग-अलग मोर्चे तैयार किए गए थे।
लेकिन सरकार ने आज तक उनके गांव के लोगों को सड़क मार्ग से वंचित रखा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 की आपदा में गांव के लिए बनी पेयजल योजना ध्वस्त हो गई थी, पांच सालों बाद भी पेयजल योजना के जीर्णोद्धार के लिए शासन स्तर से कोई भी पहल नहीं हो पाई है। लोग नौलों से पानी लाकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उनके मांगों को पूरा नहीं किया गया तो ग्रामीण उग्र आंदोलन शुरू करने को बाध्य हो जाएंगे। प्रदर्शन करने वालों में संघर्ष समिति के अध्यक्ष विनोद सिंह रावत, जगदीश चंद्र पांडेय, भवान सिंह रावत, हीरा बल्लभ पांडेय, त्रिलोक सिंह बोहरा, आन सिंह बोहरा, अनूप सिंह बोहरा, गंगा दत्त बिष्ट, चन्द्र बल्लभ बिष्ट, पुष्कर सिंह, राजेंद्र सिंह, हुकम सिंह, राधा देवी, पार्वती देवी, कौशल्या देवी आदि थे।
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टुंटा बिष्ट में वन पंचायत सरपंच माधो सिंह रावत की अध्यक्षता और सुरेश चंद्र बिष्ट के संचालन में टुंटा लोजिनी विकास संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीणों का कहना था कि उनके गांव की सरेआम उपेक्षा की गई है। आजादी के बाद भी ग्रामीणों को आजादी का अहसास नहीं हो पा रहा है। सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को बीमार लोगों, वृद्धों, गर्भवतियों को सड़क तक लाने में करीब दो घंटे का पैदल सफर तय करना पड़ता है। जिसके बाद लोहाघाट अस्पताल आने में उन्हें 35 किलोमीटर का सफर वाहनों से करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि 1965 में चीन के साथ हुए युद्ध में टुंटा बिष्ट के लोगों ने अहम योगदान दिया था। उस वक्त लड़ाई के लिए टुंटा बिष्ट के गांव में अलग-अलग मोर्चे तैयार किए गए थे।
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लेकिन सरकार ने आज तक उनके गांव के लोगों को सड़क मार्ग से वंचित रखा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 की आपदा में गांव के लिए बनी पेयजल योजना ध्वस्त हो गई थी, पांच सालों बाद भी पेयजल योजना के जीर्णोद्धार के लिए शासन स्तर से कोई भी पहल नहीं हो पाई है। लोग नौलों से पानी लाकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उनके मांगों को पूरा नहीं किया गया तो ग्रामीण उग्र आंदोलन शुरू करने को बाध्य हो जाएंगे। प्रदर्शन करने वालों में संघर्ष समिति के अध्यक्ष विनोद सिंह रावत, जगदीश चंद्र पांडेय, भवान सिंह रावत, हीरा बल्लभ पांडेय, त्रिलोक सिंह बोहरा, आन सिंह बोहरा, अनूप सिंह बोहरा, गंगा दत्त बिष्ट, चन्द्र बल्लभ बिष्ट, पुष्कर सिंह, राजेंद्र सिंह, हुकम सिंह, राधा देवी, पार्वती देवी, कौशल्या देवी आदि थे।
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