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मानदेय के लिए आशाओं का प्रदर्शन
ब्यूरो् /अमर उजाला,लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Wed, 03 Oct 2018 09:58 PM IST
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अपनी मांगों को लेकर लोहाघाट में प्रदर्शन करतीं आशा वर्कर।
- फोटो : अमर उजाला
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आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की जिला इकाई का जिला स्तरीय सम्मेलन हुआ। इस मौके पर आशाओं ने मानदेय सहित अनय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार की ओर से आशाओं को गांव में रहकर अपनी सेवा देने के फरमान को वापस लेने की मांग की।
बुधवार को सीएचसी परिसर में यूनियन की जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा की अध्यक्षता और प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप के संचालन में हुई जिला सम्मेलन में वक्ताओं का कहना था कि आशा वर्कर्स की ओर से लंबे समय से मासिक मानदेय देने की मांग उठाई जा रही है, लेकिन उनकी मांगों की सरासर अनदेखी की जा रही है। यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने कहा कि सरकार ने आशाओं को गांव में रहकर अपनी सेवाएं देने का तुगलकी फरमान जारी किया है। उनका कहना है कि जब तक सरकार आशाओं को स्वास्थ्य विभाग का स्थायी कर्मचारी नहीं मानती तब तक उसे आशाओं का आदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप ने कहा कि जब तक आशाओं को मासिक मानदेय नहीं दिया जाता तब तक आशाएं जननी, सुरक्षा, टीकाकरण, एचबीएनसी, वीएचएसएनसी, वीएचएनडी पर ही कार्य करेंगी। इसके अतिरिक्त अन्य कार्य उनसे लिए जाते हैं तो उन्हें दैनिक भत्ता दिया जाए।
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बुधवार को सीएचसी परिसर में यूनियन की जिलाध्यक्ष सरस्वती पुनेठा की अध्यक्षता और प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप के संचालन में हुई जिला सम्मेलन में वक्ताओं का कहना था कि आशा वर्कर्स की ओर से लंबे समय से मासिक मानदेय देने की मांग उठाई जा रही है, लेकिन उनकी मांगों की सरासर अनदेखी की जा रही है। यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल ने कहा कि सरकार ने आशाओं को गांव में रहकर अपनी सेवाएं देने का तुगलकी फरमान जारी किया है। उनका कहना है कि जब तक सरकार आशाओं को स्वास्थ्य विभाग का स्थायी कर्मचारी नहीं मानती तब तक उसे आशाओं का आदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
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प्रदेश उपाध्यक्ष रीता कश्यप ने कहा कि जब तक आशाओं को मासिक मानदेय नहीं दिया जाता तब तक आशाएं जननी, सुरक्षा, टीकाकरण, एचबीएनसी, वीएचएसएनसी, वीएचएनडी पर ही कार्य करेंगी। इसके अतिरिक्त अन्य कार्य उनसे लिए जाते हैं तो उन्हें दैनिक भत्ता दिया जाए।
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