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बंद आईटीआई खोलने की मांग को लेकर दिगालीचौड़ में किया प्रदर्शन
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दिगालीचौड़ में बंद आईटीआई को खोलने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते क्षेत्रीय लोग।
- फोटो : LOHAGHAT
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लोहाघाट (चंपावत)। राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीटी) की मान्यता न होने के कारण नेपाल सीमा से लगे दिगालीचौड़ का आईटीआई बंद है। आईटीआई को चालू न करने पर ग्रामीणों ने गहरी नाराजगी जताई। वहां कक्षाओं के संचालन के लिए ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का कहना था कि वर्ष 2011 में खुले आईटीआई में इलेक्ट्रिशियन, फिटर ट्रेड का व्यावसायिक प्रशिक्षण लेकर कई युवा कंपनियों में नौकरी कर अपना और परिवार का भरण पोषण कर रहे थे लेकिन अब कई आईटीआई को बंद कर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है।
आईटीआई बंद होने से सीमावर्ती क्षेत्र के युवा घर में तकनीकी शिक्षा से वंचित हो गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दिगालीचौड़ में करोड़ों रुपये की लागत के आईटीआई भवन का निर्माण कार्य भी रुका है। किराए पर चल रहे आईटीआई के सामान को वहां से अन्यत्र पहुंचा दिया गया है।
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करीब तीन सालों से आईटीआई को बंद कर यहां के स्टाफ को अन्यत्र संबद्ध कर दिया गया है। लिए कई युवा अच्छी कंपनियों में रोजगार कर रहे हैं। इनसे प्रेरणा लेकर अन्य युवा आईटीआई करना चाहते हैं, लेकिन आईटीआई बंद होने से युवाओं के सपने पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
आक्रोशित ग्रामीणों ने सरकार से आईटीआई दोबारा शुरू करने की मांग की है। प्रदर्शन करने वालों में बिंडा तिवारी के प्रधान देवेंद्र बिष्ट, नाकोट के प्रधान पवन कुमार, मानाढुंगा के प्रधान योगेश रैंसवाल, देवकी देवी, कमला देवी, लक्ष्मण भंडारी, ममता बोहरा, नवीन तिवारी, दीपक उप्रेती आदि रहे।
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ग्रामीणों का कहना था कि वर्ष 2011 में खुले आईटीआई में इलेक्ट्रिशियन, फिटर ट्रेड का व्यावसायिक प्रशिक्षण लेकर कई युवा कंपनियों में नौकरी कर अपना और परिवार का भरण पोषण कर रहे थे लेकिन अब कई आईटीआई को बंद कर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है।
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आईटीआई बंद होने से सीमावर्ती क्षेत्र के युवा घर में तकनीकी शिक्षा से वंचित हो गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दिगालीचौड़ में करोड़ों रुपये की लागत के आईटीआई भवन का निर्माण कार्य भी रुका है। किराए पर चल रहे आईटीआई के सामान को वहां से अन्यत्र पहुंचा दिया गया है।
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करीब तीन सालों से आईटीआई को बंद कर यहां के स्टाफ को अन्यत्र संबद्ध कर दिया गया है। लिए कई युवा अच्छी कंपनियों में रोजगार कर रहे हैं। इनसे प्रेरणा लेकर अन्य युवा आईटीआई करना चाहते हैं, लेकिन आईटीआई बंद होने से युवाओं के सपने पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
आक्रोशित ग्रामीणों ने सरकार से आईटीआई दोबारा शुरू करने की मांग की है। प्रदर्शन करने वालों में बिंडा तिवारी के प्रधान देवेंद्र बिष्ट, नाकोट के प्रधान पवन कुमार, मानाढुंगा के प्रधान योगेश रैंसवाल, देवकी देवी, कमला देवी, लक्ष्मण भंडारी, ममता बोहरा, नवीन तिवारी, दीपक उप्रेती आदि रहे।