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देहरादून के दो चरस तस्करों को सजा
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
Updated Fri, 08 Apr 2016 10:20 PM IST
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चरस तस्करी में देहरादून के दो लोगों को विशेष सत्र न्यायालय (जिला एवं सत्र न्यायालय) ने सजा सुनाई है। एक तस्कर को दस वर्ष और दूसरे को पांच साल की सजा सुनाई है। दोनों पर जुर्माना भी लगाया गया है।
20 नवंबर 2012 को एसओजी प्रभारी प्रभात कुमार के नेतृत्व में गश्त कर रही टीम को पोखरी (पाटी) के पास दो लोगों से चरस बरामद हुई थी। रायपुर देहरादून के प्रदीप शाह से 1.5 किलोग्राम और वहीं के अशोक से 500 ग्राम चरस मिली। दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/18/20 के तहत लोहाघाट थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के वकील डीजीसी एसके खर्कवाल की दलील और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों के खिलाफ आरोप सही पाए गए।
विशेष सत्र न्यायाधीश प्रेम सिंह खिमाल ने सभी पक्षों को सुनने के बाद दोनों को दोषी पाया। 1.5 किलोग्राम चरस के साथ दबोचे गए प्रदीप शाह को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा के साथ एक लाख रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना नहीं देने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। 500 ग्राम चरस के साथ पकड़े गए अशोक को 5 साल के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। आरोपियों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
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फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाने पर छह साल की कैद
फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने सार्की टोला लोहाघाट के अजय गोर्खा को छह साल कैद और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अजय गोर्खा ने 24 अगस्त 2014 को अपने भाई शक्ति गोर्खा का पिछड़ी जाति गोर्खा समुदाय का प्रमाणपत्र बनवाया गया, जिसमें तहसीलदार की मुहर और हस्ताक्षर फर्जी थे। फर्जी प्रमाणपत्र तब पकड़ में आया जब 31 मार्च 2015 को प्रेम गोर्खा अपना पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र बनवाने आया और भाई के प्रमाणपत्र को साक्ष्य के तौर पर पेश किया। तहसीलदार हर सिंह रजवाड़ ने फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप में अजय गोर्खा के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज करवाया।
सीजेएम मनमोहन सिंह ने मामले की सुनवाई के बाद अजय गोर्खा पर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप सही पाए। आईपीसी की धारा 420 के अंतर्गत उसे 3 साल कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास, धारा 467 के अंतर्गत 6 साल कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। आईपीसी की धारा 471 के अंतर्गत 3 साल का कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना न देने पर तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा जेल में बिताई गई अवधि मूल दंडादेश में समायोजित होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से नामिक अधिवक्ता आलोक पांडेय ने पक्ष रखा।
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20 नवंबर 2012 को एसओजी प्रभारी प्रभात कुमार के नेतृत्व में गश्त कर रही टीम को पोखरी (पाटी) के पास दो लोगों से चरस बरामद हुई थी। रायपुर देहरादून के प्रदीप शाह से 1.5 किलोग्राम और वहीं के अशोक से 500 ग्राम चरस मिली। दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/18/20 के तहत लोहाघाट थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के वकील डीजीसी एसके खर्कवाल की दलील और अन्य साक्ष्यों के आधार पर दोनों के खिलाफ आरोप सही पाए गए।
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विशेष सत्र न्यायाधीश प्रेम सिंह खिमाल ने सभी पक्षों को सुनने के बाद दोनों को दोषी पाया। 1.5 किलोग्राम चरस के साथ दबोचे गए प्रदीप शाह को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा के साथ एक लाख रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना नहीं देने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। 500 ग्राम चरस के साथ पकड़े गए अशोक को 5 साल के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। आरोपियों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
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फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाने पर छह साल की कैद
फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने सार्की टोला लोहाघाट के अजय गोर्खा को छह साल कैद और 15 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अजय गोर्खा ने 24 अगस्त 2014 को अपने भाई शक्ति गोर्खा का पिछड़ी जाति गोर्खा समुदाय का प्रमाणपत्र बनवाया गया, जिसमें तहसीलदार की मुहर और हस्ताक्षर फर्जी थे। फर्जी प्रमाणपत्र तब पकड़ में आया जब 31 मार्च 2015 को प्रेम गोर्खा अपना पिछड़ी जाति का प्रमाणपत्र बनवाने आया और भाई के प्रमाणपत्र को साक्ष्य के तौर पर पेश किया। तहसीलदार हर सिंह रजवाड़ ने फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप में अजय गोर्खा के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत मुकदमा दर्ज करवाया।
सीजेएम मनमोहन सिंह ने मामले की सुनवाई के बाद अजय गोर्खा पर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप सही पाए। आईपीसी की धारा 420 के अंतर्गत उसे 3 साल कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माना, जुर्माना न देने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास, धारा 467 के अंतर्गत 6 साल कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। आईपीसी की धारा 471 के अंतर्गत 3 साल का कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना न देने पर तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी तथा जेल में बिताई गई अवधि मूल दंडादेश में समायोजित होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से नामिक अधिवक्ता आलोक पांडेय ने पक्ष रखा।