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सप्तेश्वर में क्षतिग्रस्त गूल और डायवर्जन टैंक की होगी मरम्मत
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चंपावत। जिले में आपदा के कारण सप्तेश्वर जल विद्युत परियोजना की क्षतिग्रस्त गूल और डायवर्जन टैंक की जल्द मरम्मत की जाएगी। इसके लिए शासन ने आपदा मोचन निधि से उत्तराखंड वैकल्पिक ऊर्जा संस्थान (उरेडा) को 40 लाख रुपये अवमुक्त कर दिए हैं।
उरेडा की ओर से 300 किलोवाट बिजली का उत्पादन करने वाली सप्तेश्वर जल विद्युत परियोजना के क्षतिग्रस्त कार्यों की मरम्मत के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अक्तूबर में आई प्राकृतिक आपदा के कारण पावर हाउस को पानी की आपूर्ति करने वाली गूल करीब 200 मीटर तक क्षतिग्रस्त हो गई थी और डायवर्जन टैंक के खराब होने के कारण बिजली का उत्पादन ठप हो गया था। जल विद्युत परियोजना के पावर हाउस की सुरक्षा दीवार भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी। उरेडा के परियोजना अधिकारी मनोज बसेड़ा ने बताया कि सप्तेश्वर पावर हाउस में आपदा के कारण क्षतिग्रस्त 200 मीटर गूल और डायवर्जन टैंक की मरम्मत के साथ ही सुरक्षा दीवार की मरम्मत का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।
ग्रिड को भेजी जाती है सप्तेश्वर में उत्पादित बिजली
चंपावत। उरेडा विभाग की ओर से संचालित सप्तेश्वर जल विद्युत परियोजना से उत्पादित 300 किलोवाट बिजली ऊर्जा निगम के माध्यम से ग्रिड को भेजी जाती है। वहीं, परियोजना में चार स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है। बीते पांच माह से बिजली उत्पादन ठप होने से स्थानीय युवक बेरोजगार हो गए हैं।
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उरेडा की ओर से 300 किलोवाट बिजली का उत्पादन करने वाली सप्तेश्वर जल विद्युत परियोजना के क्षतिग्रस्त कार्यों की मरम्मत के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अक्तूबर में आई प्राकृतिक आपदा के कारण पावर हाउस को पानी की आपूर्ति करने वाली गूल करीब 200 मीटर तक क्षतिग्रस्त हो गई थी और डायवर्जन टैंक के खराब होने के कारण बिजली का उत्पादन ठप हो गया था। जल विद्युत परियोजना के पावर हाउस की सुरक्षा दीवार भी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई थी। उरेडा के परियोजना अधिकारी मनोज बसेड़ा ने बताया कि सप्तेश्वर पावर हाउस में आपदा के कारण क्षतिग्रस्त 200 मीटर गूल और डायवर्जन टैंक की मरम्मत के साथ ही सुरक्षा दीवार की मरम्मत का कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।
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ग्रिड को भेजी जाती है सप्तेश्वर में उत्पादित बिजली
चंपावत। उरेडा विभाग की ओर से संचालित सप्तेश्वर जल विद्युत परियोजना से उत्पादित 300 किलोवाट बिजली ऊर्जा निगम के माध्यम से ग्रिड को भेजी जाती है। वहीं, परियोजना में चार स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है। बीते पांच माह से बिजली उत्पादन ठप होने से स्थानीय युवक बेरोजगार हो गए हैं।
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