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आगरा से साइकिल चला पहुंचे चंपावत, तीसरे दिन चखा रोटी का स्वाद

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2020 11:27 PM IST
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Cycling in Champawat
लॉकडाउन में आगरा से साइकिल से पहुंचे चंपावत के सुनील जोशी। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। रोजी-रोटी और बेहतर भविष्य की आस में गोवा गए युवक को लाकडाउन के इस दौर में तीन दिन बाद चंपावत आकर रोटी नसीब हुई है। यह रोटी भी आसानी से नसीब नहीं हुई, इसके लिए आगरा से 375 किलोमीटर साइकिल चलाकर अपने गांव चंपावत लौटना पड़ा। दिव्यांग मां के बगल में बैठे युवक को जब उसकी पत्नी ने खाना दिया तो रोटी देखकर उसकी आंखें नम हो गईं। युवक ने बताया कि लाकडाउन में सबसे ज्यादा चिंता दिव्यांग मां और पत्नी की सता रही थी कि ऐसे वक्त में कैसे दिन काट रहे होंगे, यही सोचकर साइकिल से गांव के लिए निकल पड़ा।
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बाजरीकोट के सुनील जोशी (30) गोवा में ड्राइविंग करते थे। कोरोना की वजह से कामबंदी की आहट के बीच 22 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन से एक दिन पहले गोवा से कर्नाटक के बेलगांव के लिए निकल गए। 23 मार्च को बेलगांव से एक ट्रक से 1995 किलोमीटर दूर आगरा पहुंचे। 1995 किलोमीटर के इस सफर के लिए सुनील को तीन हजार रुपया किराया देना पड़ा। 25 मार्च से वे आगरा में अपनी बहन के किराये के घर में रहे। जोशी ने बताया कि वहां बहन के ऊपर बोझ बनकर कब तक रहता, यही सोचकर तीन हजार रुपये में सेकेंड हैंड साइकिल और हवा भरने वाला पंप खरीदा। 13 मई को आगरा से चंपावत तक की दूरी साइकिल से तय की। बदायूं के एक मंदिर में बहन के घर से लाए खाने को खाकर 13 मई की रात काटी। 14 मई को ऊधमसिंह नगर और बीती रात बस्टिया के पास भूखे रहकर बिताई। सुनील कहते हैं कि रास्ते में कहीं से कोई मदद नहीं मिली। पानी और बिस्कुट ही उसका आसरा बने। एक जगह रास्ता भटके तो पीलीभीत के पास साइकिल का टायर फट गया। सात किलोमीटर तक साइकिल घसीटकर चलना पड़ा। एटा में पुलिस ने रोका, लेकिन स्क्रीनिंग और आधार कार्ड देखने के बाद जाने दिया।
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शनिवार को बस्टिया से 16 किमी दूर सूखीढांग पहुंचे, तो सामाजिक कार्यकर्ता एनएस कार्की की मदद से आपदा प्रबंधन विभाग ने एक जीप में बिठाकर चंपावत पहुंचाया। चंपावत पहुंचे सुनील कहते हैं कि अब वे फिर से गांव में ही रहकर रोजी कमाने का प्रयास करेंगे। राजस्व उप निरीक्षक शंकर वर्मा ने बताया कि शनिवार को चंपावत पहुंचने के बाद सुनील को बाजरीकोट के स्कूल में क्वारंटीन कर दिया।
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इस तरह रहा सुनील का सफर:
21 मार्च: गोवा से कर्नाटक के बेलगाम पहुंचे।
24 मार्च: बेलगाम से 1995 किमी दूर आगरा तक ट्रक से पहुंचे।
13 मई: आगरा से साइकिल से चंपावत का सफर शुरू किया।
16 मई: साइकिल से सूखीढांग और फिर सूखीढांग से चंपावत पहुंचे।
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