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सच्चे मन से मां के दर्शन की प्रेरणा देता है झूठा मंदिर
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मां पूर्णागिरि धाम में टुन्यास में स्थापित झूठे का मंदिर। संवाद
- फोटो : TANAKPUR
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बनबसा (चंपावत)। नाम है झूठा मंदिर लेकिन संदेश देता है सच्चाई का। मां पूर्णागिरि धाम में मां के मुख्य मंदिर के अलावा यों तो कई अन्य मंदिर हैं लेकिन एक मंदिर झूठे के मंदिर नाम से विख्यात है। इसके दर्शन से श्रद्धालुओं को देवी के चमत्कारिक शक्ति एवं सच्चे मन से दर्शनों का संदेश भी मिलता है।
टुन्यास के पास झूठे का मंदिर स्थापित है। प्रचलित कथा के अनुसार संतान विहीन एक सेठ पुत्र प्राप्ति की इच्छा लेकर देवी मां के दर्शनों के लिए पूर्णागिरि धाम पहुंचा। मां के दरबार में पूजा अर्चना के बाद उसने पुत्र प्राप्ति पर देवी को स्वर्ण रत्न जड़ित मंदिर चढ़ाने का वचन दिया। कुछ समय बाद सेठ को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई लेकिन अपने कहे वचनों के अनुसार उसने लालच में स्वर्ण जड़ित मंदिर न बना तांबे के मंदिर में स्वर्ण पालिश वाला मंदिर बनवाया।
उस मंदिर को लेकर सेठ मां के दरबार चला। मंदिर ले जा रहे उसके मजदूर टुन्यास के समीप विश्राम करने के लिए रुके। उन्होंने मंदिर को जमीन पर रख दिया। विश्राम के बाद जब मजदूर मंदिर को उठाने लगे तो उनसे मंदिर नहीं उठाया गया। मंदिर इतना भारी हो गया कि वह टस से मस तक नहीं हुआ। थक -हार कर सेठ को मंदिर वहीं छोड़ना पड़ा। टुन्यास में आज भी झूठे का मंदिर स्थित है जो तीर्थ यात्रियों व श्रद्धालुओं को सच्चे मन से देवी मां के दर्शनों एवं अपने वचनों का पालन करने की प्रेरणा देता है।
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टुन्यास के पास झूठे का मंदिर स्थापित है। प्रचलित कथा के अनुसार संतान विहीन एक सेठ पुत्र प्राप्ति की इच्छा लेकर देवी मां के दर्शनों के लिए पूर्णागिरि धाम पहुंचा। मां के दरबार में पूजा अर्चना के बाद उसने पुत्र प्राप्ति पर देवी को स्वर्ण रत्न जड़ित मंदिर चढ़ाने का वचन दिया। कुछ समय बाद सेठ को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई लेकिन अपने कहे वचनों के अनुसार उसने लालच में स्वर्ण जड़ित मंदिर न बना तांबे के मंदिर में स्वर्ण पालिश वाला मंदिर बनवाया।
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उस मंदिर को लेकर सेठ मां के दरबार चला। मंदिर ले जा रहे उसके मजदूर टुन्यास के समीप विश्राम करने के लिए रुके। उन्होंने मंदिर को जमीन पर रख दिया। विश्राम के बाद जब मजदूर मंदिर को उठाने लगे तो उनसे मंदिर नहीं उठाया गया। मंदिर इतना भारी हो गया कि वह टस से मस तक नहीं हुआ। थक -हार कर सेठ को मंदिर वहीं छोड़ना पड़ा। टुन्यास में आज भी झूठे का मंदिर स्थित है जो तीर्थ यात्रियों व श्रद्धालुओं को सच्चे मन से देवी मां के दर्शनों एवं अपने वचनों का पालन करने की प्रेरणा देता है।
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