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फसल बीमा योजना को उत्साहित नहीं काश्तकार

अमर उजाला ब्यूरो चंपावत Updated Sun, 21 May 2017 11:10 PM IST
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अपने खेत में कार्य करते कास्कार
अपने खेत में कार्य करते कास्कार - फोटो : अमर उजाला

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 बागवानी के नुकसान की भरपाई करने के लिए मौसम आधारित फसल बीमा योजना काश्तकारों के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन इस योजना की जानकारी दूरदराज तो दूर, शहर के आसपास के किसानों को भी बेहद कम है। जानकारी न होने से योजना से किसान दूर है। सात हजार से अधिक काश्तकारों में से अधिकांश लोगों ने योजना की तरफ पीठ की है। योजना के प्रपत्र जमा करने की अंतिम तिथि में अब बस दस दिन बचे हैं, लेकिन अब तक बमुश्किल 130 काश्तकारों ने ही बीमा प्रपत्र जमा कराए हैं। 
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मौसम आधारित फसल बीमा योजना में आलू, अदरक, टमाटर, फ्रेंचबीन और मिर्च को शामिल किया गया है। यहां ये पांच फसलें बहुतायत में होती है। जिले के पर्वतीय हिस्से में करीब 2574 हेक्टेयर एरिया में इसकी खेती होती है। और ये फसलें किसानों की अर्थव्यवस्था में भी बड़ी भूमिका अदा करती हैं। लेकिन मौसम के उतार-चढ़ाव से बीते कुछ वर्षों से इसका समुचित फायदा नहीं मिल पा रहा है। काश्तकारों को अच्छे मौसम और अन्य अनुकूल हालात पर निर्भर रहना पड़ता है। 


ऐसे में बीमा धन की महज पांच प्रतिशत प्रीमियम पर फसल की सुरक्षा की गारंटी देने वाली बीमा योजना नुकसान की भरपाई का अहम जरिया है। आलू व टमाटर में प्रति नाली 75 रुपये प्रीमियम दे नुकसान होने पर 1500 रुपये की बीमा की रकम हासिल की जा सकती है। इसी तरह 60 रुपये प्रीमियम देकर मिर्च व फ्रेंचबीन में 1200 रुपये तथा 100 रुपये की प्रीमियम देकर अदरक में 2000 रुपये की बीमा रकम मिल सकती है। लेकिन काश्तकारों को योजना नहीं लुभा रही है। मोहन सिंह, महेश चंद्र, भुवन चंद्र, शेर सिंह, महा सिंह, दयाल सहित तमाम किसानों का कहना है कि विभाग या प्रशासनिक अमले द्वारा बीमा योजना की कायदे से जानकारी नहीं दी गई है। इधर जिला उद्यान अधिकारी एचसी तिवारी का कहना है कि 12 मोबाइल दलों के जरिए काश्तकारों को योजना की जानकारी दी जा रही है।


 जिले के पर्वतीय हिस्से में फसल बीमा में शामिल
 फसलों का उत्पादित क्षेत्रफल और उत्पादन 

फसल     उत्पादित क्षेत्र (हेक्टेयर)    पैदावार (मीट्रिक टन)
आलू          1100                          11670
अदरक          308                           2382
टमाटर           599                           6230
फ्रेंचबीन         447                           1032
मिर्च             120                            352
कुल योग       2574                          21666

कोट.... 
मौसम आधारित फसल बीमा योजना के अंतर्गत पहली मई से 31 अगस्त तक पांच फसलों को नुकसान होने पर बीमा के जरिए भरपाई की व्यवस्था है। प्रीमियम जमा करने के अलावा कंपनी के दून कार्यालय में 15 जून तक  प्रपत्र पहुंचना जरूरी होगा। अधिक तापमान, कम या ज्यादा बारिश और लगातार शुष्कता से फसल को होने वाले नुकसान में किसान को मुआवजा दिया जाएगा।
डॉ.एस प्रकाश, क्षेत्रीय प्रबंधक, कृषि बीमा कंपनी, देहरादून

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