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अल्ट्रासाउंड मशीन के गैरकानूनी उपयोग पर डॉक्टर को जेल भेजा

Tue, 09 Jan 2018 10:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, टनकपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, टनकपुर Updated Tue, 09 Jan 2018 10:39 PM IST
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Doctor sent to jail on illegal use of ultrasound machine
डॉक्टर को जेल भेजा - फोटो : अमर उजाला

निजी अस्पताल खोलकर अवैध तरीके से अल्ट्रासाउंड मशीन संचालित करने के आरोपी आयुर्वेदिक चिकित्सक की जमानत याचिका खारिज कर कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया। आरोपी चिकित्सक राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय चल्थी में तैनात है।

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न्यायिक सूत्रों के अनुसार आरोपी डॉक्टर सुरेश कश्यप ने टनकपुर स्थित अपने ओम अस्पताल में किसी डॉक्टर के नाम से लाइसेंस लेकर अल्ट्रासाउंड मशीन लगाई थी। लाइसेंस की अवधि वर्ष 2012 तक थी, लेकिन 16 मई 2011 को एसडीएम के नेतृत्व में किए गए निरीक्षण में अल्ट्रासाउंड मशीन का अवैध तरीके से संचालन होता मिला, जो पीसीपीएनडीटी (गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीकी) नियमावली 1996 के नियमों का उल्लंघन था। इस पर एसडीएम ने अल्ट्रासाउंड मशीन को सीज कर दिया था। मुख्य चिकित्साधिकारी ने 2 जनवरी 2012 को अल्ट्रासाउंड मशीन का लाइसेंस ही निरस्त कर दिया।
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लाइसेंस निरस्त होने के बाद आरोपी डॉक्टर ने मशीन को घर पर रखने की अनुमति के लिए आवेदन किया तो मशीन को नियमानुसार बेचने की अनुमति दी गई, लेकिन आरोपी मशीन का अवैध तरीके से उपयोग करता रहा। शिकायत पर गत वर्ष 13 मार्च को एसडीएम अनिल चन्याल, उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि पंत, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एचएस ह्यांकी ने ओम अस्पताल में छापा मारा तो मशीन खराब होने की बात कहते हुए मशीन को ठीक कराने के लिए बरेली भेजे जाने की बात कही गई। मशीन ठीक करने किस मैकेनिक या दुकान में भेजी गई है, यह नहीं बता पाया।
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इस पर मुख्य चिकित्साधिकारी ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ अवैध तरीके से अल्ट्रासाउंड मशीन का उपयोग कर गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) नियमावली 1996 की धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद कोर्ट की ओर से समन भेजकर आरोपी डॉक्टर को 13 अक्तूबर को उपस्थित होने को कहा गया था, लेकिन वह उपस्थिति नहीं हुआ। इस पर कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया।


मंगलवार को आरोपी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम वर्ग राजेंद्र कुमार की अदालत में आत्मसमर्पण कर जमानत याचिका दाखिल की। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आरोपी डॉक्टर की जमानत याचिका को खारिज कर उसे जेल भेज दिया। मामले में सरकार की और से शासकीय अधिवक्ता अंबा दत्त गढ़कोटी ने पैरवी की।

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