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बाल दिवस पर विशेष: लापता बच्चों की मुस्कान लौटाने में अव्वल है चंपावत पुलिस
Updated Mon, 13 Nov 2017 10:51 PM IST
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चंपावत। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा। बच्चों के कल्याण, सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न कानूनी बनने के बाद भी कई स्थानों में बाल श्रम के मामले प्रकाश में आते रहते हैं। तीन साल में चंपावत पुलिस ऑपरेशन स्माइल के तहत 37 गुमशुदा बच्चों की सकुशल घर वापसी करा चुकी है। इन लापता बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लौटाने में चंपावत पुलिस अव्वल रही है। इसके लिए पिछले वर्ष चंपावत पुलिस को सम्मानित भी किया जा चुका है।
एसपी आरसी राजगुरु ने बताया कि जिले में वर्ष 2015 में 16 बच्चे, वर्ष 2016 में आठ बच्चे गायब थे, जिन्हें खोजने के साथ ही इस वर्ष 2017 में 14 गुमशुदा बच्चों में से 13 को सुरक्षित परिजनों को सौंप दिया गया है। दूसरी ओर बाल श्रम से संबंधित मामलों में भी जिले का रिकॉर्ड ठीक है। वर्ष 2015, 2016 में बाल श्रम से संबंधित तीन मामलों का खुलासा कर तीनों बच्चों को परिजनों को सौंपा गया है। इस वर्ष बाल श्रम से संबंधित कोई मामला नहीं मिला है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मीनाक्षी कांडपाल के अनुसार बाल श्रम रोकने के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब बाल श्रम करते पकड़े जाने पर संबंधित मालिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। उन्होंने बताया कि बाल श्रम को दो श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें ऑटोमोबाइल, होटल, फैक्ट्री, वेल्डिंग, इलेक्ट्रीशियन आदि व्यवसाय को खतरनाक और आइसक्रीम पार्लर, बर्तन, परचून की दुकान में काम करने को गैर खतरनाक श्रेणी में शामिल किया गया है।
तीन साल में 37 बच्चों की सकुशल घर वापसी कराई
ऑपरेशन स्माइल चलाने के लिए चंपावत पुलिस सम्मानित हो चुकी है
बाल श्रम के तीन मामलों में तीन बच्चे परिजनों को सौंपे गए
डीएम की अध्यक्षता में गठित की गई है समिति
चंपावत। जिले में बाल श्रम पर निगाह रखने के लिए डीएम की अध्यक्षता में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना समिति का गठन किया गया है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मीनाक्षी कांडपाल के अनुसार जिले में स्वयंसेवी संस्था रीड्स के माध्यम से परियोजना समिति का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
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प्रभावी है जिला बाल कल्याण समिति
चंपावत। जिला समाज कल्याण अधिकारी बंशीधर पंत बताते हैं कि जिले में समेकित बाल संरक्षण समिति के साथ ही जिला बाल कल्याण समिति प्रभावी है। किशोर न्याय बोर्ड के माध्यम से भी बच्चों और किशोरों के हितों का ध्यान रखा जा रहा है।
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एसपी आरसी राजगुरु ने बताया कि जिले में वर्ष 2015 में 16 बच्चे, वर्ष 2016 में आठ बच्चे गायब थे, जिन्हें खोजने के साथ ही इस वर्ष 2017 में 14 गुमशुदा बच्चों में से 13 को सुरक्षित परिजनों को सौंप दिया गया है। दूसरी ओर बाल श्रम से संबंधित मामलों में भी जिले का रिकॉर्ड ठीक है। वर्ष 2015, 2016 में बाल श्रम से संबंधित तीन मामलों का खुलासा कर तीनों बच्चों को परिजनों को सौंपा गया है। इस वर्ष बाल श्रम से संबंधित कोई मामला नहीं मिला है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मीनाक्षी कांडपाल के अनुसार बाल श्रम रोकने के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब बाल श्रम करते पकड़े जाने पर संबंधित मालिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। उन्होंने बताया कि बाल श्रम को दो श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें ऑटोमोबाइल, होटल, फैक्ट्री, वेल्डिंग, इलेक्ट्रीशियन आदि व्यवसाय को खतरनाक और आइसक्रीम पार्लर, बर्तन, परचून की दुकान में काम करने को गैर खतरनाक श्रेणी में शामिल किया गया है।
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तीन साल में 37 बच्चों की सकुशल घर वापसी कराई
ऑपरेशन स्माइल चलाने के लिए चंपावत पुलिस सम्मानित हो चुकी है
बाल श्रम के तीन मामलों में तीन बच्चे परिजनों को सौंपे गए
डीएम की अध्यक्षता में गठित की गई है समिति
चंपावत। जिले में बाल श्रम पर निगाह रखने के लिए डीएम की अध्यक्षता में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना समिति का गठन किया गया है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी मीनाक्षी कांडपाल के अनुसार जिले में स्वयंसेवी संस्था रीड्स के माध्यम से परियोजना समिति का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
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प्रभावी है जिला बाल कल्याण समिति
चंपावत। जिला समाज कल्याण अधिकारी बंशीधर पंत बताते हैं कि जिले में समेकित बाल संरक्षण समिति के साथ ही जिला बाल कल्याण समिति प्रभावी है। किशोर न्याय बोर्ड के माध्यम से भी बच्चों और किशोरों के हितों का ध्यान रखा जा रहा है।