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सीएम साहब सात माह में तो नहीं बदला जिला अस्पताल
ब्यूरो/अमर उजाला/चंपावत
Updated Sun, 03 May 2015 10:43 PM IST
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मुख्यमंत्री ने 19 सितंबर 2014 को देहरादून में चंपावत विधानसभा क्षेत्र की समीक्षा बैठक में जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। लेकिन सात माह से अधिक बीत गए मरीजों का जिला अस्पताल में कायदे के इलाज का इंतजार पूरा नहीं हो सका है। जिले के इस सबसे बड़े अस्पताल में फिलहाल मरहम लगने से ज्यादा मरीजों के साथ मजाक हो रहा है। अल्ट्रासाउंड, ईसीजी जैसे सामान्य परीक्षण तक की सुविधा नहीं जुट सकी है।
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6.06 करोड़ की लागत से बना जिला अस्पताल अक्तूबर 2012 में अस्तित्व में आया, तो लगा कि जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में तेजी से सुधार होगा। लेकिन ये उम्मीद जल्दी ही हवा हवाई हो गई। करीब 15 महीनों तक अस्पताल में इमरजेंसी इलाज की सुविधा नहीं थी। और ये सुविधा शुरू हुई तो 60 बेड के अस्पताल में अभी 16 ही काम कर रहे हैं।
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सबसे ज्यादा दिक्कत अल्ट्रासाउंड मशीन होने के बावजूद अल्ट्रासाउंड के परीक्षण नहीं होने की है। जबकि अस्पताल में रेडियोलोजिस्ट भी तैनात हैं। अल्ट्रासाउंड परीक्षण की जरूरत मुख्य रूप से पेट संबंधी रोगों के अलावा गर्भवती महिलाओं को पड़ती है। ईसीजी मशीन का उपयोग भी 14 महीनों से नहीं हो सका है। इन उपकरणाें के नहीं होने से मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में जेब ढीली करने को मजबूर होना पड़ रहा है। ब्लड बैंक भवन बने दो साल से अधिक हो गया है लेकिन गजट नहीं होने से इसका उपयोग भी खटाई में पड़ा है।
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वार्ड ब्वाय भी नहीं
चंपावत। जिला अस्पताल में डॉक्टराें के 26 पदों के सापेक्ष 13 की तैनाती है। लेकिन वार्ड ब्वाय एक भी नहीं है। काम चलाने के लिए दो वार्ड ब्वाय संबद्ध किए गए हैं। वार्ड ब्वाय सहित 20 चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को आउटर्सोस से रखा जाना है। लेकिन इसके लिए शासन ने अभी तक धन की व्यवस्था नहीं की है।