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चौबे होली बंद है गे हो महाराज
योगेश जोशी।/अमर उजाला, चंपावत
Updated Fri, 10 Mar 2017 10:19 PM IST
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चौबे होली
- फोटो : अमर उजाला
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चौबे होली बंद है गे हो महाराज। कभ्भे चौबे होली देखन हन दूर दूर बठे लोग बाग उच्छया। आब उ बात ना रेगे हो। चौबे होली की परंपरा आब त बिल्कुले बंद हैगे।
चंद राज परिवार क सम्मान में हुन्य वाली यो रस्म खतम है गे।चंपावत चाराले की होली की आपन जमान में खास जाग छी।
चंद राज परिवार के सम्मान में चौबे होली हुच्छी। राज दरबारे क सम्मान में चार थोकदार तड़ागीज्यू, बोरज्यू, कार्कीज्यू और चौधरज्यू होली गाच्छया। चौबे होली मंदिरों और राज दरबार में हुन्य भे। चौबे होली सन् 1980 तक लगातार चल छी। उक बाद फिर चौबे होली कभ्भे हुच्छी, कभ्भे ना। आब त होली दोसर्या शुरू करन हन कोई लगे पहल तक ना करनय।
सन 2000 में कुमाऊं सांस्कृतिक संघ विरासत क अध्यक्ष प्रसिद्ध रंगकर्मी देवसिंह तड़ागीज्यू ले चौबे होली हन दोसरया शुरू कर छी। दोसरया शुरू करया यो परंपरा लगे चारे साल तक चल सकछी। ये क बाद 2014 में तबाक एसडीएम नरेश दुर्गापालज्यू ले एक बार फिर दोसरया चौबे होली शुरू कर छी।
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ये बार लग चौबे होली एक्के साल भे। फिर त चौबे होली पट्टे बंद है गे। रंगकर्मी राजेंद्र प्रसाद गोतोड़ज्यू कुनान कि पहाड़ में शराबी क कारण होली क स्वरूपे बदल ग। संस्कृति विभाग लगे के ना करनयो। न तो सांस्कृतिक दलों हन मदद करनयो, और न होली को संरक्षणे करनयो। यो लग एक कारण छ कि चौबे होली में बाजन्य ढोलों की आवाज लग ना सुनिनय।
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चंद राज परिवार क सम्मान में हुन्य वाली यो रस्म खतम है गे।चंपावत चाराले की होली की आपन जमान में खास जाग छी।
चंद राज परिवार के सम्मान में चौबे होली हुच्छी। राज दरबारे क सम्मान में चार थोकदार तड़ागीज्यू, बोरज्यू, कार्कीज्यू और चौधरज्यू होली गाच्छया। चौबे होली मंदिरों और राज दरबार में हुन्य भे। चौबे होली सन् 1980 तक लगातार चल छी। उक बाद फिर चौबे होली कभ्भे हुच्छी, कभ्भे ना। आब त होली दोसर्या शुरू करन हन कोई लगे पहल तक ना करनय।
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सन 2000 में कुमाऊं सांस्कृतिक संघ विरासत क अध्यक्ष प्रसिद्ध रंगकर्मी देवसिंह तड़ागीज्यू ले चौबे होली हन दोसरया शुरू कर छी। दोसरया शुरू करया यो परंपरा लगे चारे साल तक चल सकछी। ये क बाद 2014 में तबाक एसडीएम नरेश दुर्गापालज्यू ले एक बार फिर दोसरया चौबे होली शुरू कर छी।
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ये बार लग चौबे होली एक्के साल भे। फिर त चौबे होली पट्टे बंद है गे। रंगकर्मी राजेंद्र प्रसाद गोतोड़ज्यू कुनान कि पहाड़ में शराबी क कारण होली क स्वरूपे बदल ग। संस्कृति विभाग लगे के ना करनयो। न तो सांस्कृतिक दलों हन मदद करनयो, और न होली को संरक्षणे करनयो। यो लग एक कारण छ कि चौबे होली में बाजन्य ढोलों की आवाज लग ना सुनिनय।