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रिवर्स पलायन पर न लग जाए ग्रहण!

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2020 01:26 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत। कोरोना महामारी के चलते दूसरे राज्यों में काम करने वाले 25 हजार से अधिक प्रवासी अपने घर लौट आए। इस घर वापसी को रिवर्स पलायन के रूप में देखा गया और कोरोना काल की आपदा को अवसर में बदलने की संभावना के तहत कई स्वरोजगार परक योजना शुरू की गईं, लेकिन अभी तक ये योजना खास कामयाब नजर नहीं आ रही है। अब गांव छोड़ फिर महानगरों की ओर लोगों का रूख होने लगए हैं। इससे रिवर्स पलायन की संभावनाओं पर सवाल उठाने लगे हैं। 22 मार्च से शुरू कोरोना काल मेें चंपावत जिले में 25 हजार से अधिक प्रवासी विभिन्न राज्यों से अपने गांव लौटे। कुछ लोगों ने खेती में हाथ आजमाए, तो काफी लोगों ने मनरेगा के जरिए आजीविका कमाने का प्रयास किया। डीडीओ एसके पंत ने बताया कि कोरोना काल में अब तक 6697 लोगों ने मनरेगा के तहत काम के लिए पंजीकरण कराया। इनमें से 2816 लोगों को जॉब कार्ड दिया गया और 2733 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना भी प्रवासियों को नहीं लुभा रही है। इस योजना के तहत सिर्फ 105 प्रवासियों ने आवेदन किया है। कोरोना काल खत्म होने से पहले ही जिले से लोग फिर से काम के लिए लौटने लगे हैं। अब तक 300 से अधिक लोग वापस चले गए हैं। 
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-::- "चंपावत जिले से प्रवासी लौटने शुरू हो गए हैं। अलबत्ता अभी ये संख्या खासी कम है। प्रवासियों को चंपावत जिले में ही उनके गांवों के पास स्वरोजगार या उद्यमिता देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के साक्षात्कार भी ब्लाक स्तर पर कराने के अलावा जिले से दूसरी जगह चले गए लोगों के ऑनलाइन साक्षात्कार की भी व्यवस्था की जा रही है।, 
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-सुरेंद्र नारायण पांडेय, डीएम, चंपावत।  --:: बोले प्रवासी--: गांव मेें काम नहीं, कैसे करें गुजारा  चंपावत। प्रवासियों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बावजूद जमीन पर इसका खास असर नहीं दिख रहा है। पाटी ब्लाक के 20 साल के दीपक लडवाल, कमल लडवाल, जीवन सिंह सहित ढेरों लोग गांव छोड़ वापस जा चुके हैं। इन युवकों का कहना है कि करीब साढ़े तीन महीने गांव में रहे, लेकिन रोजगार या स्व रोजगार नहीं मिलने से परिजनों के लिए गुजर करना मुश्किल हो रहा है। जो आमदनी कोरोना काल से पहले हो रही थी, वह तो बंद हुई ही, नया रोजगार मिला नहीं। थकहार कर उन्होंने वापस जाने का मन बनाया। कहते हैं कि बेकरी फैक्ट्री के मालिक से बात कर फिर दिल्ली, गुरुग्राम और एनसीआर को जाने को मजबूर हुए। 
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