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चंपावत पुनर्गठन पंपिंग पेयजल योजना को रिलीज हुए तीन करोड़

Sun, 21 Jan 2018 09:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत Updated Sun, 21 Jan 2018 09:53 PM IST
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Champawat restructuring pumping drinking water scheme released 30 million
क्वैराला पंपिंग योजना के तहत सर्किट हाउस के समीप बना पेयजल टैंक - फोटो : अमर उजाला
 जिला मुख्यालय की तीन दशक तक प्यास बुझाने के लिए बन रही चंपावत पुनर्गठन पंपिंग पेयजल योजना के लिए शासन ने तीन करोड़ रुपये अवमुक्त किए हैं। इस राशि को मिलाकर शासन से अब तक इस योजना 7.18 करोड़ रुपये शासन से मिल चुके हैं। जबकि अगस्त 2016 से बन रही इस योजना की कुल लागत 30.88 करोड़ रुपये है।
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उत्तराखंड शासन ने इस साल 18 जनवरी को पेयजल निगम को तीन करोड़ रुपये की राशि जारी की है। पेयजल निगम को इस धनराशि का उपयोग चंपावत पंपिंग योजना में इस साल 31 मार्च तक करने के साथ ही प्रमाणपत्र देना होगा। इससे पूर्व शासन योजना के लिए 4.18 करोड़ रुपये दे चुका था। 30.88 करोड़ रुपये की लागत से चंपावत पुनर्गठन पेयजल योजना का निर्माण कार्य अगस्त 2016 से शुरू हुआ।
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क्वैराला नदी से बन रही लिफ्ट पेयजल योजना चंपावत के लोगों की प्यास बुझाएगी। योजना से शहर और आसपास के क्षेत्र के 29 हजार लोगों को 30 वर्षों तक पानी मिल सकेगा। गधेरे से 17.5 किमी तक पांच पंपिंग स्टेशन, साफ पानी के लिए स्रोत पर ही फिल्टरेशन के अलावा बिजली की व्यवस्था के लिए अलग से फीडर प्रस्तावित किया गया है।
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पूरे हो चुके हैं पांचों टैंक
करीब दस किमी लंबी पेयजल लाइन में से 8 किलोमीटर का निर्माण किया जा चुका है। जल निगम के कनिष्ठ अभियंता अनिल कुमार का कहना है कि क्वैराला पंपिंग योजना के तहत सभी पांच टैंक (हिंग्लादेवी मंदिर के पास 1100 किलोलीटर क्षमता का मुख्य टैंक, सर्किट हाउस के पास 400 केएल, खर्ककार्की के समीप 80 केएल, कोतवाली चबूतरे के पास सात केएल और भैरवां के पास 650 केएल क्षमता का टैंक) बनाए जा चुके हैं। पांच संप (टैंक) में से दो ही बन सके हैं। इसके अलावा ट्रीटमेंट प्लांट और स्रोत का सिविल कार्य भी अभी होना बाकी है। विभाग का कहना है कि वक्त पर रकम मिलने पर काम अगस्त 2018 के निर्धारित वक्त तक पूरा किया जा सकेगा।


फिलहाल है शहर को मिल रहा 60 प्रतिशत पानी
चंपावत क्षेत्र की 13 हजार की आबादी को रोजाना 16 लाख लीटर पेयजल की जरूरत है। मगर पानी की उपलब्धता नाकाफी है। जल संस्थान के चंपावत के कनिष्ठ अभियंता किशोर पंत का कहना है कि इस वक्त करीब 10 लाख लीटर पानी मिल रहा है। जबकि मार्च बाद पानी की आपूर्ति सात लाख लीटर से भी नीचे आ जाती है।
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