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गर्भवती महिला को 14 किमी डोली पर लाए
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत।
Updated Tue, 20 Feb 2018 10:15 PM IST
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चंपावत के बकोड़ा गांव से डोली के जरिए गर्भवती महिला को लाते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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नेपाल सीमा से लगे ग्रामीण इलाके आजादी के सात दशक से अधिक समय बाद भी जरूरी सुविधा को तरस रहे हैं। कई गांवों में न सड़क हैं और नहीं स्वास्थ्य की व्यवस्था। इसका खामियाजा यहां के लोगों को भुगतना पड़ता है।
सीमावर्ती तल्लादेश के बकोड़ा गांव की गर्भवती महिला को तबियत बिगड़ने पर 14 किलोमीटर डोली के सहारे सड़क तक लाया गया। फिर यहां से 35 किलोमीटर दूर चंपावत के जिला अस्पताल पहुंचाया गया और महिला की जान बचाई गई। अब यह महिला खतरे से बाहर है और अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता राहुल महर ने बताया कि तल्लादेश क्षेत्र की बकोड़ा गांव की गर्भवती महिला मधु देवी (30) पत्नी प्रकाश सिंह की अचानक तबियत बिगड़ी। गांव सड़क से करीब 14 किमी दूर था। लिहाजा मधु देवी को धर्म सिंह, महेंद्र सिंह सहित कई ग्रामीण डोली के जरिए सड़क तक लाए। इस पैदल दूरी को तय करने में तीन घंटे से अधिक का समय लगा।
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यहां से 35 किमी जीप के जरिए जिला अस्पताल लाया गया। जिला अस्पताल की डॉक्टर श्वेता खर्कवाल ने बताया कि 6 माह की गर्भवती मधु को जाड़ा लगकर तेज बुखार और कमजोरी थी। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी ने बताया कि गंभीर हालत के मद्देनजर मधु देवी को भर्ती किया गया और हालत में सुधार के बाद अब मधु को छुट्टी दे दी गई।
बता दें कि नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र में मंच और तामली में दो अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) हैं, लेकिन इन अस्पतालों का खास लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। एक अस्पताल में जरूरी सुविधाएं नहीं है, तो दूसरे में डॉक्टर तक नहीं है।
सामाजिक कार्यकर्ता राहुल महर, शेर सिंह आदि का कहना है कि बकोड़ा सहित कई ऐसे गांव हैं, जहां सड़क का अता-पता नहीं है। लिहाजा नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना भी यहां के लोगों के लिए आसान नहीं है। साथ ही सड़क विहीन क्षेत्रों में आपात सेवा 108 या खुशियों की सवारी का भी लाभ नहीं मिल पाता है।
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सीमावर्ती तल्लादेश के बकोड़ा गांव की गर्भवती महिला को तबियत बिगड़ने पर 14 किलोमीटर डोली के सहारे सड़क तक लाया गया। फिर यहां से 35 किलोमीटर दूर चंपावत के जिला अस्पताल पहुंचाया गया और महिला की जान बचाई गई। अब यह महिला खतरे से बाहर है और अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
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क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता राहुल महर ने बताया कि तल्लादेश क्षेत्र की बकोड़ा गांव की गर्भवती महिला मधु देवी (30) पत्नी प्रकाश सिंह की अचानक तबियत बिगड़ी। गांव सड़क से करीब 14 किमी दूर था। लिहाजा मधु देवी को धर्म सिंह, महेंद्र सिंह सहित कई ग्रामीण डोली के जरिए सड़क तक लाए। इस पैदल दूरी को तय करने में तीन घंटे से अधिक का समय लगा।
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यहां से 35 किमी जीप के जरिए जिला अस्पताल लाया गया। जिला अस्पताल की डॉक्टर श्वेता खर्कवाल ने बताया कि 6 माह की गर्भवती मधु को जाड़ा लगकर तेज बुखार और कमजोरी थी। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी ने बताया कि गंभीर हालत के मद्देनजर मधु देवी को भर्ती किया गया और हालत में सुधार के बाद अब मधु को छुट्टी दे दी गई।
बता दें कि नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र में मंच और तामली में दो अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) हैं, लेकिन इन अस्पतालों का खास लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। एक अस्पताल में जरूरी सुविधाएं नहीं है, तो दूसरे में डॉक्टर तक नहीं है।
सामाजिक कार्यकर्ता राहुल महर, शेर सिंह आदि का कहना है कि बकोड़ा सहित कई ऐसे गांव हैं, जहां सड़क का अता-पता नहीं है। लिहाजा नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना भी यहां के लोगों के लिए आसान नहीं है। साथ ही सड़क विहीन क्षेत्रों में आपात सेवा 108 या खुशियों की सवारी का भी लाभ नहीं मिल पाता है।