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सात समंदर पार महक बिखेर रही चंपावत की जैविक चाय
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यूएसए भेजी जाने वाली चाय के पैकेट दिखाते चंपावत के चाय बिक्री केंद्र प्रभारी राजेंद्र सिंह। संव?
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। बहुत सर्दी है न आजकल! चाय की चुस्की लेने का शायद ही कोई मौका छोड़ते होंगे। आपके चंपावत की चाय देश ही नहीं देश के बाहर भी अपनी महक बिखेर रही है। यूएसए की यंग माउंटेन टी संस्था यहां की चाय (ग्रीन लीफ) का मुरीद हो गई है। इन दिनों यहां इस संस्था के लिए चाय भेजने की तैयारी की जा रही है।
चाय बोर्ड चंपावत के प्रभारी डेसमंड बर्कबेक ने बताया कि यूएसए की यंग माउंटेन टी संस्था ने इस साल करीब 1855 किलो चाय का ऑर्डर दिया है। इसके लिए संस्था 11 लाख रुपये का भुगतान करेगी। वर्ष 2020 में संस्था ने 1834 किलो चाय खरीदी थी।
संस्था के भारतीय मूल के प्रतिनिधि अधिराज बावले को छह साल पहले चंपावत की जैविक चाय की खूबियां पता चलीं। उन्होंने इलाके के कई चाय बागानों का दौरा करने के बाद यहां से चाय खरीदने का निर्णय लिया। वर्ष 2016 में 33 किलो चाय खरीदने का ये सफर अब रिकॉर्ड ऊंचाई छू रहा है।
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51 हजार किलो हुआ चाय का उत्पादन
चंपावत। चंपावत में चाय बागानों का तेजी से विस्तार हुआ है। राज्य बनने के बाद से दो दशक में चाय के रकबे को बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया है। इस वक्त सिलिंगटाक, छीड़ापानी, मंच, दुबड़ जैनल, नरसिंहडांडा, चौकी, सिमल्टा, फुलारागांव, लमाई आदि स्थानों पर 247.50 हेक्टेयर में चाय के बागान है। इसमें इस साल 51 हजार किलो चाय का उत्पादन हुआ। इन बागानों के जरिये 357 महिलाओं को भी काम मिल रहा है। इससे करीब 1995 किलो चाय तैयार हुई।
सीएम के एलान के बाद भी लटकी चाय फैक्टरी
चंपावत। चाय के लिए मशहूर चंपावत में चाय फैक्टरी किराये के भवन मेें चल रही है। इस वक्त ये फैक्टरी कुमाऊं मंडल विकास निगम की जमीन पर संचालित है। चाय फैक्टरी के लिए तीन साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एलान किया था लेकिन इस ओर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सका। अब 2.34 करोड़ रुपये की लागत वाली इस फैक्टरी के लिए बजट का स्थानीय स्तर पर प्रावधान किया जाना है।
चंपावत की चाय नीलामी के जरिये 2014 से विदेश भी जाती थी लेकिन यहां की चाय की खूबियों के कारण यूएसए की यंग माउंटेन टी संस्था के साथ ही कई विदेशी अब सीधे भी चाय मंगा रहे हैं। - डेसमंड बर्कबेक, प्रभारी, चाय विकास बोर्ड, चंपावत।
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चंपावत। बहुत सर्दी है न आजकल! चाय की चुस्की लेने का शायद ही कोई मौका छोड़ते होंगे। आपके चंपावत की चाय देश ही नहीं देश के बाहर भी अपनी महक बिखेर रही है। यूएसए की यंग माउंटेन टी संस्था यहां की चाय (ग्रीन लीफ) का मुरीद हो गई है। इन दिनों यहां इस संस्था के लिए चाय भेजने की तैयारी की जा रही है।
चाय बोर्ड चंपावत के प्रभारी डेसमंड बर्कबेक ने बताया कि यूएसए की यंग माउंटेन टी संस्था ने इस साल करीब 1855 किलो चाय का ऑर्डर दिया है। इसके लिए संस्था 11 लाख रुपये का भुगतान करेगी। वर्ष 2020 में संस्था ने 1834 किलो चाय खरीदी थी।
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संस्था के भारतीय मूल के प्रतिनिधि अधिराज बावले को छह साल पहले चंपावत की जैविक चाय की खूबियां पता चलीं। उन्होंने इलाके के कई चाय बागानों का दौरा करने के बाद यहां से चाय खरीदने का निर्णय लिया। वर्ष 2016 में 33 किलो चाय खरीदने का ये सफर अब रिकॉर्ड ऊंचाई छू रहा है।
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51 हजार किलो हुआ चाय का उत्पादन
चंपावत। चंपावत में चाय बागानों का तेजी से विस्तार हुआ है। राज्य बनने के बाद से दो दशक में चाय के रकबे को बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया है। इस वक्त सिलिंगटाक, छीड़ापानी, मंच, दुबड़ जैनल, नरसिंहडांडा, चौकी, सिमल्टा, फुलारागांव, लमाई आदि स्थानों पर 247.50 हेक्टेयर में चाय के बागान है। इसमें इस साल 51 हजार किलो चाय का उत्पादन हुआ। इन बागानों के जरिये 357 महिलाओं को भी काम मिल रहा है। इससे करीब 1995 किलो चाय तैयार हुई।
सीएम के एलान के बाद भी लटकी चाय फैक्टरी
चंपावत। चाय के लिए मशहूर चंपावत में चाय फैक्टरी किराये के भवन मेें चल रही है। इस वक्त ये फैक्टरी कुमाऊं मंडल विकास निगम की जमीन पर संचालित है। चाय फैक्टरी के लिए तीन साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एलान किया था लेकिन इस ओर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सका। अब 2.34 करोड़ रुपये की लागत वाली इस फैक्टरी के लिए बजट का स्थानीय स्तर पर प्रावधान किया जाना है।
चंपावत की चाय नीलामी के जरिये 2014 से विदेश भी जाती थी लेकिन यहां की चाय की खूबियों के कारण यूएसए की यंग माउंटेन टी संस्था के साथ ही कई विदेशी अब सीधे भी चाय मंगा रहे हैं। - डेसमंड बर्कबेक, प्रभारी, चाय विकास बोर्ड, चंपावत।