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पहाड़ के लोगों की बीमारी का इलाज करेगा बजट...
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चंपावत। कोरोना काल के बाद धीमे-धीमे बेहतर होते हालात के बीच केंद्रीय बजट से सेहत को लेकर उम्मीद की किरण भी जगी है। उत्तराखंड में चंपावत जिले ने सीमित स्वास्थ्य संसाधनों के बीच कोरोना पर काबू पाने में सबसे शानदार काम किया है। और पहली फरवरी को पेश बजट में स्वास्थ्य मद पर दी गई तवज्जो का लाभ चंपावत सहित कुमाऊं मंडल के सभी पहाड़ी जिलों को हो सकता है। खासकर निजी क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित की गई रियायतों से यह आस बलवती हुई है।
पहाड़ के चार (चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर और अल्मोड़ा) जिलों में छोटे-बड़े 100 से अधिक सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन इनमें से 95 प्रतिशत अस्पताल बीमार लोगों के लिए रेफरल सेंटर से ज्यादा नहीं हैं। पहाड़ में एक भी न्यूरो सर्जन नहीं है। ज्यादातर विशेषज्ञ डॉॅक्टरों के पद खाली होने से पहाड़ के ट्रॉमा सेंटर काम नहीं कर रहे हैं। आईसीयू के निर्माण के बावजूद विशेषज्ञों की कमी से काम नहीं कर पा रहे हैं। रेडियोलॉजिस्ट, गायनाकोलॉजिस्ट, हृदयरोग, ईएनटी सहित अधिकांश विशेषज्ञों की कमी से लोगों की परेशानी बढ़ी है। इन पहाड़ी जिलों में डॉक्टरों के 48 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं।
लेकिन इन मायूस करने वाले हालातों के बीच सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश बजट में स्वास्थ्य मद पर हुई 137 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी से उम्मीद का नया सवेरा हुआ है। 2.23 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम स्वास्थ्य बजट से स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ इलाज तक पहुंच आसान होने की आस बढ़ी है। खास बात छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य आधारभूत ढांचे को बेहतर करने के लिए प्रस्तावित किए गए कदम हैं। पीपीपी मॉडल के जरिये दूरदराज के 112 जिलों में नए अस्पताल बनाने के प्रस्ताव के अलावा 100 शैय्याओं से कम वाले अस्पतालों पर करों में रियायत के प्रावधान निजी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने में मददगार हो सकेगी।
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कोट
केंद्र सरकार ने बजट में स्वास्थ्य सेवा को सुधारने के लिए प्रभावी और असरकारक प्रस्ताव दिए हैं। निजी क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने से स्वास्थ्य सेवा मजबूत होगी और आम लोगों तक सस्ता और सुलभ इलाज मिल सकेगी।
दीपक जोशी,
प्रबंध निदेशक, जीवन अनमोल अस्पताल, चंपावत।
केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र में पीपीपी मॉडल का प्रस्ताव शानदार है। इन प्रावधानों से निजी स्वास्थ्य सेवा में निवेश की संभावना बढ़ेगी और छोटे इलाकों में आधारभूत स्वास्थ्य ढांचा सशक्त होगा।
लक्ष्मण लाल वर्मा, संस्थापक, बीएनके अस्पताल, लोहाघाट।
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पहाड़ के चार (चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर और अल्मोड़ा) जिलों में छोटे-बड़े 100 से अधिक सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन इनमें से 95 प्रतिशत अस्पताल बीमार लोगों के लिए रेफरल सेंटर से ज्यादा नहीं हैं। पहाड़ में एक भी न्यूरो सर्जन नहीं है। ज्यादातर विशेषज्ञ डॉॅक्टरों के पद खाली होने से पहाड़ के ट्रॉमा सेंटर काम नहीं कर रहे हैं। आईसीयू के निर्माण के बावजूद विशेषज्ञों की कमी से काम नहीं कर पा रहे हैं। रेडियोलॉजिस्ट, गायनाकोलॉजिस्ट, हृदयरोग, ईएनटी सहित अधिकांश विशेषज्ञों की कमी से लोगों की परेशानी बढ़ी है। इन पहाड़ी जिलों में डॉक्टरों के 48 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं।
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लेकिन इन मायूस करने वाले हालातों के बीच सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश बजट में स्वास्थ्य मद पर हुई 137 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी से उम्मीद का नया सवेरा हुआ है। 2.23 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम स्वास्थ्य बजट से स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ इलाज तक पहुंच आसान होने की आस बढ़ी है। खास बात छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य आधारभूत ढांचे को बेहतर करने के लिए प्रस्तावित किए गए कदम हैं। पीपीपी मॉडल के जरिये दूरदराज के 112 जिलों में नए अस्पताल बनाने के प्रस्ताव के अलावा 100 शैय्याओं से कम वाले अस्पतालों पर करों में रियायत के प्रावधान निजी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने में मददगार हो सकेगी।
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केंद्र सरकार ने बजट में स्वास्थ्य सेवा को सुधारने के लिए प्रभावी और असरकारक प्रस्ताव दिए हैं। निजी क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने से स्वास्थ्य सेवा मजबूत होगी और आम लोगों तक सस्ता और सुलभ इलाज मिल सकेगी।
दीपक जोशी,
प्रबंध निदेशक, जीवन अनमोल अस्पताल, चंपावत।
केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र में पीपीपी मॉडल का प्रस्ताव शानदार है। इन प्रावधानों से निजी स्वास्थ्य सेवा में निवेश की संभावना बढ़ेगी और छोटे इलाकों में आधारभूत स्वास्थ्य ढांचा सशक्त होगा।
लक्ष्मण लाल वर्मा, संस्थापक, बीएनके अस्पताल, लोहाघाट।