{"_id":"5e35b1728ebc3e99eb218246","slug":"budget-champawat-news-hld3718226146","type":"story","status":"publish","title_hn":"बजट से कहीं खुशी, कहीं मायूसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बजट से कहीं खुशी, कहीं मायूसी
विज्ञापन
नीरज उप्रेती
- फोटो : LOHAGHAT
बजट से कहीं खुशी, कहीं मायूसी
अमर उजाला ब्यूरो
चंपावत। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दूसरे बजट को लेकर चंपावत जिले के अलग-अलग वर्गो में मिलीजुली प्रतिक्रिया रही। कई लोग बजट से अर्थव्यवस्था को गति मिलने की बात कह रहे हैं, तो बहुत से लोगों का कहना है कि मंदी से निपटने के लिए बजट में ठोस उपाय किए जाने चाहिए थे।
नौकरी पेशा वर्ग: आयकर राहत से संतुष्ट ज्यादातर कर्मी
चंपावत। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दूसरे बजट से सरकारी नौकरीपेशा वर्ग को रियायतों की उम्मीद थी। आयकर में दी गई रियायत से कुछ राहत भी मिली है लेकिन कई लोग इससे अधिक की चाहत रखते थे। काफी हद तक उन्हें इसमें राहत भी मिली है।
आयकर स्लैब की दरों में हुए बदलाव से नौकरीपेशा वर्ग को राहत मिलेगी। पांच लाख रुपये तक की आमदनी को आयकर मुक्त करने से लाभ मिलेगा। आरएल साहस़हायक आबकारी आयुक्त, चंपावत।
विज्ञापन
सरकार ने स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है। बजट में कौशल विकास के लिए तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने के प्रस्ताव से बेरोजगारों को लाभ होगा। जनार्दन चिलकोटी, निदेशक आरसेटी।
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था नहीं की गई है। इससे पलायन की रफ्तार कम होना मुश्किल होगा। नगेंद्र कुमार जोशी, बाराकोट।
बजट में सरकार ने आयकर में एक हाथ से छूट दी है। वहीं दूसरे हाथ से कई लाभों में कटौती कर रियायत को वापस ले लिया गया है।
किशन ज्याला, एनएचपीसी कर्मी, बनबसा।
पूर्व फौजी: नाकाफी है रक्षा बजट में की गई बढ़ोतरी
चंपावत। छह हजार से अधिक पूर्व फौजियों वाले चंपावत जिले के लोग रक्षा बजट पर खास नजर गढ़ाए थे। देश की सीमा पर हो रही हलचल से लेकर आतंकी वारदातों के मुंहतोड़ जवाब के लिए रक्षा और अर्द्ध सुरक्षा बल के बढ़े बजट को पूर्व फौजी अपर्याप्त मानते हैं।
सीमा पर अस्थिरता और कश्मीर व पूर्वोत्तर के मौजूदा हालात में रक्षा बजट में अधिक धन दिया जाना चाहिए था। संवेदनशील जगहों पर तैनात जवानों को अतिरिक्त सुविधा का प्रावधान किया जाना चाहिए था। पुष्कर दत्त जोशी, मुख्य आरक्षी, सीआरपीएफ।
केंद्र सरकार ने रक्षा बजट बढ़ाया तो है लेकिन 3.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3.37 लाख करोड़ करना वर्तमान परिस्थितियों में नाकाफी है। नवीन चौहान, पूर्व सैनिक, टनकपुर।
सीमा सुरक्षा के लिए रक्षा बजट अपर्याप्त है। देश की रक्षा के लिए मुस्तैद सैनिकों की बेहतरी के लिए रक्षा बजट में बढ़ोतरी करना आवश्यक है। खीम सिंह अधिकारी, हवलदार असम राइफल बाराकोट।
देश की सीमाओं में बढ़ती हलचल के मद्देनजर रक्षा बजट में और अधिक इजाफा किया जाना चाहिए था। इसके अलावा सैनिकों की सुविधाओं में भी वृद्धि की जानी चाहिए थी। कैप्टन भानी चंद, अध्यक्ष, गौरव सेनानी कल्याण समिति, बनबसा।
-
किसान: बजट बढ़ाएगा अन्नदाता की आय
चंपावत। कृषि प्रधान देश में किसान बजट से उम्मीद लगाए थे। खासकर पिछले साल किसान सम्मान निधि योजना शुरू होने के बाद उन्हें खेती को लाभप्रद बनाने और आय को दोगुना करने के 2022 के लक्ष्य को पाने की उम्मीद थी। ज्यादातर किसान बजट से खुश हैं।
बजट में किसानों के लिए फसल बीमा योजना पर खास ध्यान देना उचित है। साथ ही खेती को मत्स्यपालन से और प्रतिस्पर्धात्मक बनाने की बात कर किसानों को खेती के लिए प्रेरित किया जा सकेगा। संजू, चंपावत।
किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम से किसानों को जोड़ने के प्रयास से किसान के पास वक्त पर धन की उपलब्धता रहेगी। मनरेगा योजना को नए रूप में विकसित कर किसान को फायदा मिलेगा। महेश सिंह, टनकपुर।
बजट में किसानों की आय को दोगुनी करने और किसानों के लिए सोलर पंप लगाने का प्रावधान करना सराहनीय पहल है। सुरेश तिवारी, किसान, इड़ाकोट।
केंद्र सरकार के बजट में छोटे एवं मझोले किसानों के लिए कोई खास उपाय नहीं किए गए हैं। ऐसे में आय बढ़ना तो दूर, घाटा कम करना भी कठिन होगा। हेमेंद्र सिंह रावत, किसान, बनबसा।
शिक्षक : बजट से बढ़ेंगे शिक्षा के संसाधन
चंपावत। अगली पीढ़ी के भविष्य को तय करने वाली शिक्षा पर बजट का क्या नजरिया होगा, इसे लेकर छात्रों से लेकर शिक्षकों की नजर थी। ज्यादातर शिक्षकों ने शिक्षा पर होने वाले खर्च और की गई नई पहल का स्वागत किया है।
केंद्रीय बजट में सरकार ने शिक्षा में संसाधन बढ़ाने की पहल की है। इसके लिए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश लाने का प्रस्ताव प्रशंसनीय कदम है।
मनोज जोशी, प्रधानाचार्य, चंपावत।
डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए नए संस्थान खोलना सकारात्मक कदम है। डिग्री स्तर के ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम से दूरस्थ क्षेत्र के नौजवानों को लाभ होगा। देवीदत्त जोशी, शिक्षक, टनकपुर।
केंद्रीय बजट से स्कूल-कॉलेजों में भौतिक संसाधन बढ़ेंगे। गुणवत्तायुक्त शिक्षा से छात्रों के लिए रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। नरेश राय, प्रवक्ता, जानकीधार।
केंद्रीय बजट में शिक्षा पर फोकस किया गया है। शिक्षा बजट बढ़ाने के साथ आनलाइन डिग्री देने की योजना से सुदूरवर्ती क्षेत्रों के निर्धन छात्रों को सबसे ज्यादा लाभ होगा। दिशा थपलियाल, प्राचार्या, बीएड कॉलेज, बनबसा।
-
महिलाएं: महंगाई पर अंकुश को ठोस उपाय नहीं
चंपावत। देश की आधी आबादी की राय इस केंद्रीय बजट पर मिली जुली है। महंगाई से लेकर महिला सुरक्षा, बालिका शिक्षा और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को लेकर किए प्रावधानों पर राय बंटी हुई है। महंगाई को लेकर ज्यादातर महिलाएं चिंतित हैं।
बजट में महिला सुरक्षा और बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन के लिए कोई अतिरिक्त पहल नहीं की गई है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के लिए बजट का और अधिक प्रावधान किया जाना चाहिए था। ममता सामंत, गृहणी, चंपावत।
रसोई की महंगाई कम करने के लिए बजट में तात्कालिक रूप से कोई उपाय नजर नहीं आते है। इसकी मार निम्न मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा पड़ेगी। पूजा पंत, गृहणी, टनकपुर।
बजट में रोजमर्रा की वस्तुओं के दामों को कम करने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाए गए हैं। इस वजह से बजट से महिलाओं को मायूसी मिली है। दीपा गड़कोटी, गृहणी, लोहाघाट।
बीते कुछ महीनों से सब्जी, तेल व अन्य खाद्यान्न पदार्थों में हुई महंगाई से निपटने के लिए बजट में प्रयास किया गया है। रेणु अग्रवाल, बनबसा।
व्यापारी: बजट से मायूस हैं कारोबारी
चंपावत। मंदी की मार का सबसे अधिक सामना व्यापारी वर्ग ने झेला। मंदी के बीच व्यापारियों की उत्सुकता बजट के जरिए राहत पाने की थी लेकिन ज्यादातर कारोबारियों का कहना है कि वे बजट से मायूस हैं।
जीएसटी अभी भी छोटे व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब है। बजट में जीएसटी की जटिलता को दूर कर छोटे कारोबारियों की मुश्किलें कम करने की आस थी लेकिन मायूसी मिली। गोविंद जोशी, व्यापार, चंपावत।
बजट में मंदी से उबारने और अर्थव्यवस्था को गति देने की पहल की गई है। इससे हर स्तर के कारोबारियों का व्यापार बढ़ेगा। आनंद महर, टनकपुर।
एकाएक सब्जियों के दामों में भारी उछाल आने पर कोई कारगर प्रबंधन होना चाहिए था जो इस बजट में नहीं दिखता। इसकी मार दुकानदार और ग्राहक दोनों पर पड़ेगी। अखलाक भाई, सब्जी व्यापारी, लोहाघाट।
लघु एवं मझोले उद्योगों के लिए बजट में खास जगह नहीं है। ऐसे में मंदी के दौर में पेश किया गया यह बजट छोटे कारोबारियों को कतई राहत नहीं देता है। बहादुर पाटनी
युवा: बजट से उत्साहित ज्यादातर नौजवान
चंपावत। 2020 के केंद्रीय बजट से देश की नौजवान पीढ़ी में उत्साह है। उन्हें उम्मीद है कि बजट के कई प्रावधान उनके सपनों को पूरा करने में मददगार बनेंगे। छिटपुट युवा बजट से इससे भी अधिक की चाहत रखते थे।
उम्मीद थी कि हुनरमंद नौजवानों के लिए बजट में कुछ खास होगा लेकिन यह बजट मायूस करता है। इसमें स्वरोजगार को प्रेरित करने की झलक नहीं दिखती है। डीके ओली, चंपावत।
केंद्रीय बजट में रोजगार को लेकर पहली बार गंभीरता दिखी। राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी की स्थापना इस दिशा में उम्दा कदम है। इससे लाभ मिलेगा।
प्रिया, टनकपुर।
शिक्षक, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ की जरूरत को देखते हुए युवाओं को विशेष कोर्स कराने का प्रावधान सराहनीय है। प्रशिक्षण से रोजगार के मौके बढ़ेंगे। नीरज उप्रेती, ईड़ाकोट।
केंद्रीय बजट में युवाओं के खेल पर कम ध्यान दिया गया है। खासकर छोटे इलाकों के लिए। खेल का बजट भी महज 50 करोड़ बढ़ाना बेहद कम है। पवन कापड़ी, बनबसा।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
चंपावत। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दूसरे बजट को लेकर चंपावत जिले के अलग-अलग वर्गो में मिलीजुली प्रतिक्रिया रही। कई लोग बजट से अर्थव्यवस्था को गति मिलने की बात कह रहे हैं, तो बहुत से लोगों का कहना है कि मंदी से निपटने के लिए बजट में ठोस उपाय किए जाने चाहिए थे।
नौकरी पेशा वर्ग: आयकर राहत से संतुष्ट ज्यादातर कर्मी
चंपावत। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दूसरे बजट से सरकारी नौकरीपेशा वर्ग को रियायतों की उम्मीद थी। आयकर में दी गई रियायत से कुछ राहत भी मिली है लेकिन कई लोग इससे अधिक की चाहत रखते थे। काफी हद तक उन्हें इसमें राहत भी मिली है।
विज्ञापन
आयकर स्लैब की दरों में हुए बदलाव से नौकरीपेशा वर्ग को राहत मिलेगी। पांच लाख रुपये तक की आमदनी को आयकर मुक्त करने से लाभ मिलेगा। आरएल साहस़हायक आबकारी आयुक्त, चंपावत।
विज्ञापन
सरकार ने स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है। बजट में कौशल विकास के लिए तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने के प्रस्ताव से बेरोजगारों को लाभ होगा। जनार्दन चिलकोटी, निदेशक आरसेटी।
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था नहीं की गई है। इससे पलायन की रफ्तार कम होना मुश्किल होगा। नगेंद्र कुमार जोशी, बाराकोट।
बजट में सरकार ने आयकर में एक हाथ से छूट दी है। वहीं दूसरे हाथ से कई लाभों में कटौती कर रियायत को वापस ले लिया गया है।
किशन ज्याला, एनएचपीसी कर्मी, बनबसा।
पूर्व फौजी: नाकाफी है रक्षा बजट में की गई बढ़ोतरी
चंपावत। छह हजार से अधिक पूर्व फौजियों वाले चंपावत जिले के लोग रक्षा बजट पर खास नजर गढ़ाए थे। देश की सीमा पर हो रही हलचल से लेकर आतंकी वारदातों के मुंहतोड़ जवाब के लिए रक्षा और अर्द्ध सुरक्षा बल के बढ़े बजट को पूर्व फौजी अपर्याप्त मानते हैं।
सीमा पर अस्थिरता और कश्मीर व पूर्वोत्तर के मौजूदा हालात में रक्षा बजट में अधिक धन दिया जाना चाहिए था। संवेदनशील जगहों पर तैनात जवानों को अतिरिक्त सुविधा का प्रावधान किया जाना चाहिए था। पुष्कर दत्त जोशी, मुख्य आरक्षी, सीआरपीएफ।
केंद्र सरकार ने रक्षा बजट बढ़ाया तो है लेकिन 3.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3.37 लाख करोड़ करना वर्तमान परिस्थितियों में नाकाफी है। नवीन चौहान, पूर्व सैनिक, टनकपुर।
सीमा सुरक्षा के लिए रक्षा बजट अपर्याप्त है। देश की रक्षा के लिए मुस्तैद सैनिकों की बेहतरी के लिए रक्षा बजट में बढ़ोतरी करना आवश्यक है। खीम सिंह अधिकारी, हवलदार असम राइफल बाराकोट।
देश की सीमाओं में बढ़ती हलचल के मद्देनजर रक्षा बजट में और अधिक इजाफा किया जाना चाहिए था। इसके अलावा सैनिकों की सुविधाओं में भी वृद्धि की जानी चाहिए थी। कैप्टन भानी चंद, अध्यक्ष, गौरव सेनानी कल्याण समिति, बनबसा।
-
किसान: बजट बढ़ाएगा अन्नदाता की आय
चंपावत। कृषि प्रधान देश में किसान बजट से उम्मीद लगाए थे। खासकर पिछले साल किसान सम्मान निधि योजना शुरू होने के बाद उन्हें खेती को लाभप्रद बनाने और आय को दोगुना करने के 2022 के लक्ष्य को पाने की उम्मीद थी। ज्यादातर किसान बजट से खुश हैं।
बजट में किसानों के लिए फसल बीमा योजना पर खास ध्यान देना उचित है। साथ ही खेती को मत्स्यपालन से और प्रतिस्पर्धात्मक बनाने की बात कर किसानों को खेती के लिए प्रेरित किया जा सकेगा। संजू, चंपावत।
किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम से किसानों को जोड़ने के प्रयास से किसान के पास वक्त पर धन की उपलब्धता रहेगी। मनरेगा योजना को नए रूप में विकसित कर किसान को फायदा मिलेगा। महेश सिंह, टनकपुर।
बजट में किसानों की आय को दोगुनी करने और किसानों के लिए सोलर पंप लगाने का प्रावधान करना सराहनीय पहल है। सुरेश तिवारी, किसान, इड़ाकोट।
केंद्र सरकार के बजट में छोटे एवं मझोले किसानों के लिए कोई खास उपाय नहीं किए गए हैं। ऐसे में आय बढ़ना तो दूर, घाटा कम करना भी कठिन होगा। हेमेंद्र सिंह रावत, किसान, बनबसा।
शिक्षक : बजट से बढ़ेंगे शिक्षा के संसाधन
चंपावत। अगली पीढ़ी के भविष्य को तय करने वाली शिक्षा पर बजट का क्या नजरिया होगा, इसे लेकर छात्रों से लेकर शिक्षकों की नजर थी। ज्यादातर शिक्षकों ने शिक्षा पर होने वाले खर्च और की गई नई पहल का स्वागत किया है।
केंद्रीय बजट में सरकार ने शिक्षा में संसाधन बढ़ाने की पहल की है। इसके लिए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश लाने का प्रस्ताव प्रशंसनीय कदम है।
मनोज जोशी, प्रधानाचार्य, चंपावत।
डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए नए संस्थान खोलना सकारात्मक कदम है। डिग्री स्तर के ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम से दूरस्थ क्षेत्र के नौजवानों को लाभ होगा। देवीदत्त जोशी, शिक्षक, टनकपुर।
केंद्रीय बजट से स्कूल-कॉलेजों में भौतिक संसाधन बढ़ेंगे। गुणवत्तायुक्त शिक्षा से छात्रों के लिए रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। नरेश राय, प्रवक्ता, जानकीधार।
केंद्रीय बजट में शिक्षा पर फोकस किया गया है। शिक्षा बजट बढ़ाने के साथ आनलाइन डिग्री देने की योजना से सुदूरवर्ती क्षेत्रों के निर्धन छात्रों को सबसे ज्यादा लाभ होगा। दिशा थपलियाल, प्राचार्या, बीएड कॉलेज, बनबसा।
-
महिलाएं: महंगाई पर अंकुश को ठोस उपाय नहीं
चंपावत। देश की आधी आबादी की राय इस केंद्रीय बजट पर मिली जुली है। महंगाई से लेकर महिला सुरक्षा, बालिका शिक्षा और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को लेकर किए प्रावधानों पर राय बंटी हुई है। महंगाई को लेकर ज्यादातर महिलाएं चिंतित हैं।
बजट में महिला सुरक्षा और बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन के लिए कोई अतिरिक्त पहल नहीं की गई है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के लिए बजट का और अधिक प्रावधान किया जाना चाहिए था। ममता सामंत, गृहणी, चंपावत।
रसोई की महंगाई कम करने के लिए बजट में तात्कालिक रूप से कोई उपाय नजर नहीं आते है। इसकी मार निम्न मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा पड़ेगी। पूजा पंत, गृहणी, टनकपुर।
बजट में रोजमर्रा की वस्तुओं के दामों को कम करने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाए गए हैं। इस वजह से बजट से महिलाओं को मायूसी मिली है। दीपा गड़कोटी, गृहणी, लोहाघाट।
बीते कुछ महीनों से सब्जी, तेल व अन्य खाद्यान्न पदार्थों में हुई महंगाई से निपटने के लिए बजट में प्रयास किया गया है। रेणु अग्रवाल, बनबसा।
व्यापारी: बजट से मायूस हैं कारोबारी
चंपावत। मंदी की मार का सबसे अधिक सामना व्यापारी वर्ग ने झेला। मंदी के बीच व्यापारियों की उत्सुकता बजट के जरिए राहत पाने की थी लेकिन ज्यादातर कारोबारियों का कहना है कि वे बजट से मायूस हैं।
जीएसटी अभी भी छोटे व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब है। बजट में जीएसटी की जटिलता को दूर कर छोटे कारोबारियों की मुश्किलें कम करने की आस थी लेकिन मायूसी मिली। गोविंद जोशी, व्यापार, चंपावत।
बजट में मंदी से उबारने और अर्थव्यवस्था को गति देने की पहल की गई है। इससे हर स्तर के कारोबारियों का व्यापार बढ़ेगा। आनंद महर, टनकपुर।
एकाएक सब्जियों के दामों में भारी उछाल आने पर कोई कारगर प्रबंधन होना चाहिए था जो इस बजट में नहीं दिखता। इसकी मार दुकानदार और ग्राहक दोनों पर पड़ेगी। अखलाक भाई, सब्जी व्यापारी, लोहाघाट।
लघु एवं मझोले उद्योगों के लिए बजट में खास जगह नहीं है। ऐसे में मंदी के दौर में पेश किया गया यह बजट छोटे कारोबारियों को कतई राहत नहीं देता है। बहादुर पाटनी
युवा: बजट से उत्साहित ज्यादातर नौजवान
चंपावत। 2020 के केंद्रीय बजट से देश की नौजवान पीढ़ी में उत्साह है। उन्हें उम्मीद है कि बजट के कई प्रावधान उनके सपनों को पूरा करने में मददगार बनेंगे। छिटपुट युवा बजट से इससे भी अधिक की चाहत रखते थे।
उम्मीद थी कि हुनरमंद नौजवानों के लिए बजट में कुछ खास होगा लेकिन यह बजट मायूस करता है। इसमें स्वरोजगार को प्रेरित करने की झलक नहीं दिखती है। डीके ओली, चंपावत।
केंद्रीय बजट में रोजगार को लेकर पहली बार गंभीरता दिखी। राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी की स्थापना इस दिशा में उम्दा कदम है। इससे लाभ मिलेगा।
प्रिया, टनकपुर।
शिक्षक, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ की जरूरत को देखते हुए युवाओं को विशेष कोर्स कराने का प्रावधान सराहनीय है। प्रशिक्षण से रोजगार के मौके बढ़ेंगे। नीरज उप्रेती, ईड़ाकोट।
केंद्रीय बजट में युवाओं के खेल पर कम ध्यान दिया गया है। खासकर छोटे इलाकों के लिए। खेल का बजट भी महज 50 करोड़ बढ़ाना बेहद कम है। पवन कापड़ी, बनबसा।

आरएल साह।- फोटो : CHAMPAWAT

जनार्दन चिलकोटी।- फोटो : CHAMPAWAT

दीपा गड़कोटी- फोटो : LOHAGHAT