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सिपाही ने 59वीं वार किया रक्तदान
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59 वीं बार रक्तदान करने वाले कांस्टेबल कैलाश कुमार।
- फोटो : CHAMPAWAT
टनकपुर थाने के एक जवान ने मानवता की मिसाल पेश की है। कांस्टेबल कैलाश कुमार ने मंगलवार को 59वीं बार रक्तदान किया है। उनके इस अनोखे काम के लिए पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह उन्हें सम्मानित करेंगे।
अप्रैल 2002 में पुलिस में भर्ती हुए ऊधमसिंह नगर जिले के भगवानपुर निवासी 40 वर्षीय कैलाश कुमार अपनी ड्यूटी तो मुस्तैदी से निभाते हैं, साथ ही रक्तदान के जरिए मानवीय धर्म भी निभाते हैं। आठ दिन की बच्ची से लेकर कई अपरिचितों को रक्तदान कर वे उनकी जिंदगी बचा चुके हैं। कुमार बताते हैं कि 2005 में ब्लड बैंक विहीन अस्पताल में आठ दिन की एक बच्ची को ए पॉजिटिव ग्रुप के खून की जरूरत थी।
नहीं मिलने पर उन्हें जानकारी लगी, तो वे सीधे रुड़की के अस्पताल पहुंच गए और बच्ची की जान बच गई। कुमार ने उसके बाद से रक्तदान को अपना मिशन बना लिया। यह सिलसिला वर्ष 2004 में रुड़की में पहली बार एक गर्भवती महिला को रक्तदान देकर शुरू हुआ था। रक्तदान की प्रेरणा उन्हें भगवानपुर के तत्कालीन विधायक चंद्रशेखर से मिली। कुमार का कहना है कि उनका इरादा कम से कम 100 बार रक्तदान करने का है। एसपी लोकेश्वर सिंह उनके इस नेक काम के लिए जल्द ही पुरस्कृत करेंगे।
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जिंदगी बचाने के लिए पांच दिन बाद ही दोबारा कर दिया था रक्तदान
आम तौर पर तीन माह बाद किए जा सकने वाले रक्तदान में एक बार तो उन्होंने इस न्यूनतम समय का पालन भी नहीं किया। बताते हैं कि दो साल पहले उन्होंने अपने एक मित्र के परिचित को रक्तदान करने के महज पांच दिन बाद ही खून दे दिया।
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अप्रैल 2002 में पुलिस में भर्ती हुए ऊधमसिंह नगर जिले के भगवानपुर निवासी 40 वर्षीय कैलाश कुमार अपनी ड्यूटी तो मुस्तैदी से निभाते हैं, साथ ही रक्तदान के जरिए मानवीय धर्म भी निभाते हैं। आठ दिन की बच्ची से लेकर कई अपरिचितों को रक्तदान कर वे उनकी जिंदगी बचा चुके हैं। कुमार बताते हैं कि 2005 में ब्लड बैंक विहीन अस्पताल में आठ दिन की एक बच्ची को ए पॉजिटिव ग्रुप के खून की जरूरत थी।
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नहीं मिलने पर उन्हें जानकारी लगी, तो वे सीधे रुड़की के अस्पताल पहुंच गए और बच्ची की जान बच गई। कुमार ने उसके बाद से रक्तदान को अपना मिशन बना लिया। यह सिलसिला वर्ष 2004 में रुड़की में पहली बार एक गर्भवती महिला को रक्तदान देकर शुरू हुआ था। रक्तदान की प्रेरणा उन्हें भगवानपुर के तत्कालीन विधायक चंद्रशेखर से मिली। कुमार का कहना है कि उनका इरादा कम से कम 100 बार रक्तदान करने का है। एसपी लोकेश्वर सिंह उनके इस नेक काम के लिए जल्द ही पुरस्कृत करेंगे।
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जिंदगी बचाने के लिए पांच दिन बाद ही दोबारा कर दिया था रक्तदान
आम तौर पर तीन माह बाद किए जा सकने वाले रक्तदान में एक बार तो उन्होंने इस न्यूनतम समय का पालन भी नहीं किया। बताते हैं कि दो साल पहले उन्होंने अपने एक मित्र के परिचित को रक्तदान करने के महज पांच दिन बाद ही खून दे दिया।