फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Block Education Office

बीईओ दफ्तर में न लैंडलाइन फोन, न फोटो स्टेट मशीन

Wed, 13 Jan 2016 10:25 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत Updated Wed, 13 Jan 2016 10:25 PM IST
विज्ञापन
Block Education Office

न वाहन, न लैंडलाइन फोन, न फोटो स्टेट मशीन, न कंप्यूटर। ये तस्वीर उस खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय (बीईओ) की है, जिसका काम माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को संचालित करना है। पहाड़ और मैदान से मिले चंपावत ब्लॉक का दायरा भी 150 किमी से अधिक का है। लचर बुनियादी संसाधनों के बीच यह दफ्तर बेहद विपरीत हालातों में अपने काम कर रहा है।

विज्ञापन


चंपावत विकासखंड के तहत 21 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, 21 इंटरमीडिएट के अलावा 12 सहायता और मान्यता प्राप्त  स्कूल हैं। इन स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय की है, लेकिन इस कार्यालय के पास ठीक से निगरानी रखने के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। ब्लॉक के इस सबसे बड़े प्रशासनिक दफ्तर के पास अपना भवन तक नहीं है। इस वक्त यह कार्यालय ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) के दो कमरों में चल रहा है। विभाग का कहना है कि प्रधानाचार्यों की बैठक के लिए सभागार नहीं होने से जगह की कमी है।
विज्ञापन


ऑफिस की फाइलों को रखने के लिए भी अलमारी नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी का पद रिक्त होने से काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। एकमात्र कनिष्ठ सहायक के हवाले पूरा दफ्तर है। लिपिक दीवान सिंह बिष्ट का कहना है कि स्कूलों से आवश्यक पत्राचार करने में भी देरी और परेशानी हो रही है। साथ ही कंप्यूटर ही नहीं, कंप्यूटर सहायक का पद भी खाली है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कर्ज से खरीद रहे स्टेशनरी
बीईओ कार्यालय में जरूरी मदों में बजट का भी अभाव है। यहां तक कि स्टेशनरी पर होने वाले खर्च की रकम तक नहीं मिल सकी है। विभाग का कहना है कि कार्यालय स्टेशनरी खरीदने के लिए बाजार से करीब 30 हजार रुपये का कर्ज हो चुका है।


जिले के सबसे बड़े बीईओ कार्यालय में बुनियादी ढांचे से लेकर स्टाफ तक की जबर्दस्त कमी है, जिस वजह से विद्यालयों पर निगरानी, निरीक्षण और सूचनाओं के आदान-प्रदान में बेहद परेशानी हो रही है। जीप नहीं होने से स्कूलों का मुआयना चुनौती बन रही है। यात्रा भत्ते की रकम भी भ्रमण के सापेक्ष कम मिल रही है। विभागीय सूचनाओं के आदान-प्रदान करने में असुविधा हो रही है। उच्चाधिकारियों को समय पर रिपोर्टिंग करना भी कठिन होता है। -हयात सिंह मियान, खंड शिक्षाधिकारी, चंपावत।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed