{"_id":"62cf143be1e7ae0663194672","slug":"bagwal-mela-in-devidhura-champawat-news-hld468996381","type":"story","status":"publish","title_hn":"देवीधार बगवाल का राजकीय मेले का खत्म नहीं हुआ इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देवीधार बगवाल का राजकीय मेले का खत्म नहीं हुआ इंतजार
विज्ञापन
देवीधुरा की बगवाल। (फाइल फोटो)
- फोटो : CHAMPAWAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत। कौतूहल बने देवीधुरा के बगवाल मेले को वर्षों से राजकीय मेला बनाने की मांग की जा रही है लेकिन शासन ने इसका आदेश जारी नहीं किया है। पिछले साल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के बाद भी मामला आगे नहीं बढ़ सका। हालांकि बगवाल के मेले को विभागीय मेले की सूची में शामिल किया गया है।
बगवाल मेला मान्यता और विरासत के अलावा कौतूहल के लिए प्रसिद्ध है लेकिन पिछले 13 साल से बिना किसी सरकारी मदद के हो रहा है। धन की कमी मेले के आयोजन की भव्यता पर असर डालती रही है। मेले में संख्या बढ़ने के बावजूद आर्थिक सहायता के बगैर इसका आयोजन कराना जिला पंचायत के लिए चुनौती बन रहा है। करीब दो सप्ताह तक चलने वाले बगवाल मेले के आयोजन में लाखों रुपये खर्च होते हैं लेकिन वर्ष 2009 से एक भी रुपये का अनुदान नहीं मिला है। यहां किसी कर से आय हुई है। वर्ष 2015 से मेले में जिला पंचायत ने किसी तरह का कर भी नहीं लगाया है जबकि बिजली व्यवस्था, सफाई, अस्थायी निर्माण से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रम तक में मोटी रकम खर्च होती है। आयोजक संस्था को विकास की मद में कटौती कर काफी धन मेले में खर्च करना पड़ता है।
इन्हीं कारणों से बगवाल को राजकीय मेले में बदलने की मांग कर जिला पंचायत पांच साल से प्रस्ताव भेजते रहा है लेकिन अभी आगे की कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी है। जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय का कहना है कि बगवाल मेले को राजकीय मेला घोषित करने से मेले के स्वरूप में निखार और भव्यता आएगी। राजकीय मेला घोषित होने पर इसमें होने वाला खर्च सरकार उठाएगी।
विज्ञापन
पिछले साल 16 अगस्त को देवीधुरा दौरे पर आए सीएम धामी ने देवीधुरा के राजकीय मेले का एलान किया लेकिन फिर भी मेले को राजकीय दर्जा देने का शासनादेश अभी जारी नहीं हो सका है। हालांकि पिछले साल सितंबर में इसे विभागीय मेलों की सूची में शामिल किया गया है। वैसे 11 जुलाई को मंदिर समिति के संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया के नेतृत्व में सीएम पुष्कर सिंह धामी से मिले प्रतिनिधिमंडल को राजकीय मेले का दर्जा देने का आश्वासन मिला है। संवाद
देवीधुरा के मेले को विभागीय मेला बनाया गया है। मेले की व्यवस्थाओं की जरूरतों के लिए शासन से एक करोड़ रुपये की बजट की मांग की गई है। मेले को भव्य रूप दिया जाएगा। - नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।
वर्ष मेलावधि आयोजन पर हुआ खर्च (लाख रुपये)
2015 14 दिन 13.39
2016 12 दिन 6.22
2017 13 दिन 2.70
2018 14 दिन 5.75
2019 15 दिन 5.85
2020 कोरोना की वजह से सांकेतिक कार्यक्रम हुआ।
2021 कोरोना की वजह से सांकेतिक कार्यक्रम हुआ।
राजकीय मेले और विभागीय मेले में ये होता है अंतर
1. राजकीय मेले को राजपत्र में प्रकाशित करना होता है। इसके लिए मेले की व्यवस्था के लिए शासन से नियमित रूप से धन की व्यवस्था की जाती है जबकि विभागीय मेले में बजट की शासन से मांग की जाती है।
2. राजकीय मेले के आयोजन की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है जबकि विभागीय मेले की व्यवस्था संबंधित विभाग करेगा।
विज्ञापन
बगवाल मेला मान्यता और विरासत के अलावा कौतूहल के लिए प्रसिद्ध है लेकिन पिछले 13 साल से बिना किसी सरकारी मदद के हो रहा है। धन की कमी मेले के आयोजन की भव्यता पर असर डालती रही है। मेले में संख्या बढ़ने के बावजूद आर्थिक सहायता के बगैर इसका आयोजन कराना जिला पंचायत के लिए चुनौती बन रहा है। करीब दो सप्ताह तक चलने वाले बगवाल मेले के आयोजन में लाखों रुपये खर्च होते हैं लेकिन वर्ष 2009 से एक भी रुपये का अनुदान नहीं मिला है। यहां किसी कर से आय हुई है। वर्ष 2015 से मेले में जिला पंचायत ने किसी तरह का कर भी नहीं लगाया है जबकि बिजली व्यवस्था, सफाई, अस्थायी निर्माण से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रम तक में मोटी रकम खर्च होती है। आयोजक संस्था को विकास की मद में कटौती कर काफी धन मेले में खर्च करना पड़ता है।
विज्ञापन
इन्हीं कारणों से बगवाल को राजकीय मेले में बदलने की मांग कर जिला पंचायत पांच साल से प्रस्ताव भेजते रहा है लेकिन अभी आगे की कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी है। जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय का कहना है कि बगवाल मेले को राजकीय मेला घोषित करने से मेले के स्वरूप में निखार और भव्यता आएगी। राजकीय मेला घोषित होने पर इसमें होने वाला खर्च सरकार उठाएगी।
विज्ञापन
पिछले साल 16 अगस्त को देवीधुरा दौरे पर आए सीएम धामी ने देवीधुरा के राजकीय मेले का एलान किया लेकिन फिर भी मेले को राजकीय दर्जा देने का शासनादेश अभी जारी नहीं हो सका है। हालांकि पिछले साल सितंबर में इसे विभागीय मेलों की सूची में शामिल किया गया है। वैसे 11 जुलाई को मंदिर समिति के संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया के नेतृत्व में सीएम पुष्कर सिंह धामी से मिले प्रतिनिधिमंडल को राजकीय मेले का दर्जा देने का आश्वासन मिला है। संवाद
देवीधुरा के मेले को विभागीय मेला बनाया गया है। मेले की व्यवस्थाओं की जरूरतों के लिए शासन से एक करोड़ रुपये की बजट की मांग की गई है। मेले को भव्य रूप दिया जाएगा। - नरेंद्र सिंह भंडारी, डीएम, चंपावत।
वर्ष मेलावधि आयोजन पर हुआ खर्च (लाख रुपये)
2015 14 दिन 13.39
2016 12 दिन 6.22
2017 13 दिन 2.70
2018 14 दिन 5.75
2019 15 दिन 5.85
2020 कोरोना की वजह से सांकेतिक कार्यक्रम हुआ।
2021 कोरोना की वजह से सांकेतिक कार्यक्रम हुआ।
राजकीय मेले और विभागीय मेले में ये होता है अंतर
1. राजकीय मेले को राजपत्र में प्रकाशित करना होता है। इसके लिए मेले की व्यवस्था के लिए शासन से नियमित रूप से धन की व्यवस्था की जाती है जबकि विभागीय मेले में बजट की शासन से मांग की जाती है।
2. राजकीय मेले के आयोजन की जिम्मेदारी प्रशासन की होती है जबकि विभागीय मेले की व्यवस्था संबंधित विभाग करेगा।