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एटीएम से नहीं मिल रहे 100 रुपए के नोट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 04 Dec 2016 09:07 PM IST
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एटीएम से नहीं मिल रहे 100 रुपए के नोट
- फोटो : अमर उजाला
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रविवार को बैंकों में अवकाश रहा, मगर खुले ज्यादातर एटीएम में भी नगदी नहीं थी। जिन पांच एटीएम में रुपए थे, तो वहां भी 100 रुपए का नोट गायब था। एकमात्र 2000 रुपए के नोट निकलने से लोगों को 2500 के बजाय 2000 रुपए ही एक दिन में मिल पा रहे हैं। यूको बैंक, कलक्ट्रेट के पास के एटीएम सहित दस एटीएम में रुपए नहीं थे। वहीं, सोमवार से शुरू सप्ताह में नगदी का संकट मुंह बाएं खड़े होने का खतरा है।
एसबीआई के मुख्य प्रबंधक हीरा सिंह पांगती का कहना है कि एटीएम से लोगों द्वारा 1900 रुपए निकाले जाने से 100 के ज्यादातर नोट खत्म हो गए। दूसरी तरफ बैंकों का भी कहना है कि अब बमुश्किल तीन दिन की नगदी बची है। अगर जल्द धन न मिला, तो फिर से कैश का संकट हो सकता है।
पर्यटकों की कमी से प्रभावित हो रहा छोटे दुकानदारों का काम
नोटबंदी से लेकर छोटे नोटों की किल्लत की मार पर्यटन व्यवसाय पर भी पड़ी है। मायावती आश्रम, श्यामलाताल, एबटमाउंट जैसे पर्यटक स्थलों पर सैलानियों की आमद कम हो गई है। विभाग का कहना है कि तकरीब पांच प्रतिशत सैलानी कम हुए हैं, लेकिन पर्यटकों की कम आमद का असर रोड के किनारे छोटा काम करने वाले दुकानदारों को हो रहा है। इन दिनों चंपावत में संतरे की खूब पैदावार हो रही है, लेकिन छोटे नोटों की कमी से संतरे के कारोबारी प्रभावित हो रहे हैं।
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संतरा बेचने वाले दुकानदार अमरनाथ का कहना है कि छोटे नोटों की कमी से करीब 35 प्रतिशत बिक्री में कमी आ गई है। सूखीढांग के होटल व्यवसायी पंडित शंकर दत्त पांडेय का कहना है कि सैलानियों की कमी से 55 प्रतिशत तक भोजन व्यवसाय में कमी आ गई है। वहीं बरेली से गजब बेचने चंपावत आए सोनू साहू का कहना है कि सर्दियों की पसंदीदा गजक की बिक्री में लगभग आधे की कमी आ गई है। पिछले साल इस वक्त 2500 रुपए रोजाना की बिक्री होती थी, जो अब कम होकर 1200 से नीचे आ गई है।
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एसबीआई के मुख्य प्रबंधक हीरा सिंह पांगती का कहना है कि एटीएम से लोगों द्वारा 1900 रुपए निकाले जाने से 100 के ज्यादातर नोट खत्म हो गए। दूसरी तरफ बैंकों का भी कहना है कि अब बमुश्किल तीन दिन की नगदी बची है। अगर जल्द धन न मिला, तो फिर से कैश का संकट हो सकता है।
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पर्यटकों की कमी से प्रभावित हो रहा छोटे दुकानदारों का काम
नोटबंदी से लेकर छोटे नोटों की किल्लत की मार पर्यटन व्यवसाय पर भी पड़ी है। मायावती आश्रम, श्यामलाताल, एबटमाउंट जैसे पर्यटक स्थलों पर सैलानियों की आमद कम हो गई है। विभाग का कहना है कि तकरीब पांच प्रतिशत सैलानी कम हुए हैं, लेकिन पर्यटकों की कम आमद का असर रोड के किनारे छोटा काम करने वाले दुकानदारों को हो रहा है। इन दिनों चंपावत में संतरे की खूब पैदावार हो रही है, लेकिन छोटे नोटों की कमी से संतरे के कारोबारी प्रभावित हो रहे हैं।
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संतरा बेचने वाले दुकानदार अमरनाथ का कहना है कि छोटे नोटों की कमी से करीब 35 प्रतिशत बिक्री में कमी आ गई है। सूखीढांग के होटल व्यवसायी पंडित शंकर दत्त पांडेय का कहना है कि सैलानियों की कमी से 55 प्रतिशत तक भोजन व्यवसाय में कमी आ गई है। वहीं बरेली से गजब बेचने चंपावत आए सोनू साहू का कहना है कि सर्दियों की पसंदीदा गजक की बिक्री में लगभग आधे की कमी आ गई है। पिछले साल इस वक्त 2500 रुपए रोजाना की बिक्री होती थी, जो अब कम होकर 1200 से नीचे आ गई है।