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शहीद की अंतिम यात्रा में दिखा पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश
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पुलवामा में शहीद हुए राहुल रैंसवाल के शोक में बंद चंपावत का बाजार।
- फोटो : CHAMPAWAT
शहीद राहुल रैंसवाल की अंतिम यात्रा में शामिल लोगों में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश दिखा। युवाओं ने शहीद के कनलगांव स्थित आवास से लेकर डिप्टेश्वर स्थित श्मशानघाट तक पाक विरोधी नारे लगाए।
आक्रोशित युवाओं ने कहा पाकिस्तान की नापाक हरकतों के कारण देश के सैनिकों को शहादत देनी पड़ रही है। यदि पाकिस्तान को अब सबक नहीं सिखाया गया तो युवा खुद सबक सिखाने निकल पड़ेंगे। इस दौरान लोगों ने भारतीय सेना के जवानों के जज्बे को सलाम किया।
सुबह करीब साढ़े नौ बजे जैसे ही बरेली से शहीद का पार्थिव शरीर लेकर सेना का हेलीकाप्टर एसएसबी की बाजरीकोट स्थित पंचम वाहिनी के मैदान में उतरा, वैसे ही गगनचुंबी देशभक्ति के नारे गूंजने लगे। लोगों का हुजूम बस एक बार देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले जांबाज शहीद के दर्शन करना चाहता था। कई लोगों ने उपवास रखकर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
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जिले भर में बाजारों में पसरा रहा सन्नाटा
चंपावत। शहीद राहुल रैंसवाल की शहादत के सम्मान में व्यापारियों ने पूरे दिन अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। जिले के अन्य बाजारों में भी बृहस्पतिवार को सन्नाटा पसरा रहा। अब तक होने वाले विभिन्न आंदोलनों के अलावा यह पहली बार हुआ कि लोग चाय, पानी, बीड़ी, सिगरेट के लिए भी भटकते दिखे।
पहली बार वर्जनाएं तोड़ कर श्मशान घाट पहुंचीं महिलाएं
चंपावत। शहीद राहुल की अंतिम यात्रा में पहली बार वर्जनाएं तोड़ कर अधिकतर महिलाएं श्मशान घाट पहुंचीं। शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोग उमड़े। सभी लोग अपने जिले के लाल को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ पड़े।
आम तौर पर शवयात्रा के साथ महिलाओं का जाना अपवाद स्वरूप माना जाता है लेकिन शहीद राहुल की अंतिम यात्रा में कई अपवाद को तोड़कर महिलाओं ने भी पहली बार शहीद को श्मशान घाट पहुंच कर श्रद्धांजलि अर्पित की। तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त रीता गहतोड़ी, भाजपा की पूर्व जिलाध्यक्षा हेमा जोशी, बबीता गोस्वामी सहित मादली, छतार, पुनेठी, कुलेठी, डड़ा, ढकना, चक्कू, चौकी, सिमल्टा आदि समेत बड़ी संख्या में महिलाओं ने डिप्टेश्वर श्मशान घाट पहुंच कर शहीद को श्रद्धांजलि दी। संवाद
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आक्रोशित युवाओं ने कहा पाकिस्तान की नापाक हरकतों के कारण देश के सैनिकों को शहादत देनी पड़ रही है। यदि पाकिस्तान को अब सबक नहीं सिखाया गया तो युवा खुद सबक सिखाने निकल पड़ेंगे। इस दौरान लोगों ने भारतीय सेना के जवानों के जज्बे को सलाम किया।
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सुबह करीब साढ़े नौ बजे जैसे ही बरेली से शहीद का पार्थिव शरीर लेकर सेना का हेलीकाप्टर एसएसबी की बाजरीकोट स्थित पंचम वाहिनी के मैदान में उतरा, वैसे ही गगनचुंबी देशभक्ति के नारे गूंजने लगे। लोगों का हुजूम बस एक बार देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले जांबाज शहीद के दर्शन करना चाहता था। कई लोगों ने उपवास रखकर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
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जिले भर में बाजारों में पसरा रहा सन्नाटा
चंपावत। शहीद राहुल रैंसवाल की शहादत के सम्मान में व्यापारियों ने पूरे दिन अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। जिले के अन्य बाजारों में भी बृहस्पतिवार को सन्नाटा पसरा रहा। अब तक होने वाले विभिन्न आंदोलनों के अलावा यह पहली बार हुआ कि लोग चाय, पानी, बीड़ी, सिगरेट के लिए भी भटकते दिखे।
पहली बार वर्जनाएं तोड़ कर श्मशान घाट पहुंचीं महिलाएं
चंपावत। शहीद राहुल की अंतिम यात्रा में पहली बार वर्जनाएं तोड़ कर अधिकतर महिलाएं श्मशान घाट पहुंचीं। शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोग उमड़े। सभी लोग अपने जिले के लाल को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़ पड़े।
आम तौर पर शवयात्रा के साथ महिलाओं का जाना अपवाद स्वरूप माना जाता है लेकिन शहीद राहुल की अंतिम यात्रा में कई अपवाद को तोड़कर महिलाओं ने भी पहली बार शहीद को श्मशान घाट पहुंच कर श्रद्धांजलि अर्पित की। तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त रीता गहतोड़ी, भाजपा की पूर्व जिलाध्यक्षा हेमा जोशी, बबीता गोस्वामी सहित मादली, छतार, पुनेठी, कुलेठी, डड़ा, ढकना, चक्कू, चौकी, सिमल्टा आदि समेत बड़ी संख्या में महिलाओं ने डिप्टेश्वर श्मशान घाट पहुंच कर शहीद को श्रद्धांजलि दी। संवाद