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आखिरी वक्त पर टला जिलाध्यक्ष का एलान
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 01 Nov 2015 10:10 PM IST
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जिलाध्यक्ष की कुुर्सी को लेकर भाजपा में ऐसा घमासान पहले कभी नहीं हुआ। चंपावत जिले में इस पद के लिए तीन प्रमुख दावेदारों के बीच जंग इतनी तीखी हो गई है कि शनिवार को आखिरी वक्त पर जिलाध्यक्ष के नाम के एलान को रोकना पड़ा।
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भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की मुहर लगने के बाद एक पूर्व जिला महामंत्री के नाम को फाइनल कर दिया गया था। देहरादून में आठ जिलाध्यक्षों के साथ यहां का नाम भी घोषित होना था। तभी भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस नाम पर जबर्दस्त ऐतराज जता दिया। बताते हैं कि विवाद और बवाल से बचने के लिए ऐन मौके पर जिलाध्यक्ष की घोषणा को टालना पड़ा। जिलाध्यक्ष की कुर्सी के लिए यहां 15 दावेदारों ने ताल ठोकी थी। इसमें से तीन नामों पर गंभीरता से मंत्रणा हुई। माना जा रहा है कि एलान टलने के बाद टकराव से बचने के लिए कोई नया नाम भी इस कुर्सी पर काबिज हो सकता है।
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साथ ही यहां के समीकरण पिथौरागढ़ और डीडीहाट जिले के अध्यक्ष पदों के नाम पर भी निर्भर करेंगे। कहा जा रहा है कि पार्टी जातीय संतुलन को भी नजर में रखकर आगे बढ़ेगी। बहरहाल अध्यक्ष की कुर्सी चाहे जिसको मिले, संगठन को हर कदम बहुत फूंक-फूंक कर बढ़ाने की नसीहत तो मिल ही गई है। अगर असंतोष और टकराव के मौजूदा हालात पर ब्रेक नहीं लगा, तो यहां के जिलाध्यक्ष की कुर्सी प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने के बाद मनोनयन के जरिए भी भरी जा सकती है।
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