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एक आदर्श, दूसरे का नहीं देखा दर्द
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
Updated Tue, 09 Feb 2016 10:31 PM IST
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शिक्षा व्यवस्था का हाल भी पहाड़ पर अजीबो-गरीब है। एक परिसर में दो सरकारी स्कूल हैं, जिसमें प्राइमरी स्कूल को तो आदर्श विद्यालय में शामिल कर दिया गया है, सोमवार को ही इसका बाकायदा औपचारिक आगाज हुआ है, जबकि उसी परिसर में स्थित राजकीय हाईस्कूल की तरफ देखा भी नहीं गया है, यह स्कूल है तो हाईस्कूल तक, लेकिन यहां पढ़ाई हो रही है आठवीं तक ही, जबकि यहां एलटी के शिक्षकों की तैनाती भी की गई है।
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मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर नरसिंहडांडा जूनियर हाईस्कूल को 2011 में उच्चीकृत कर हाईस्कूल का दर्जा दिया गया था, लेकिन एलटी शिक्षकों की तैनाती नहीं हुई। नौंवी और दसवीं कक्षा में पढ़ाने वाले नहीं होने का असर स्कूल पर भी पड़ा। शिक्षा सत्र 2015-16 में नौंवी से दसवीं कक्षा में गए सभी 18 छात्रों ने स्कूल से ही नाम कटवा लिया। ये छात्र-छात्राएं खेतीखान और दियारतोली जीआईसी में पढ़ रहे हैं। वहीं आठवीं से पास हुए छात्र-छात्राओं ने भी इस स्कूल में नौंवी में नाम नहीं लिखवाया।
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शिक्षिका तनुजा वर्मा का कहना है कि इस वक्त यहां हाईस्कूल में एक भी छात्र-छात्रा नहीं है। अलबत्ता कुछ माह पूर्व एलटी के दो शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। उम्मीद है कि अगले शिक्षा सत्र में हाईस्कूल की कक्षाएं चल सकेगी। फिलहाल छठीं से आठवीं तक की तीन कक्षाओं में 64 छात्र-छात्राएं हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए जूनियर हाईस्कूल के दो शिक्षक हैं, जबकि यहां तैनात तीसरे शिक्षक को समन्वयक बनाया गया है।
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भवन नया पर चल रहा पुराने में
नरसिंहडांडा राजकीय हाईस्कूल का नया भवन एक साल पहले ही बन चुका है, मगर पढ़ाई पुराने भवन में ही चल रही है। इसकी वजह नए स्कूल भवन की सुरक्षा के लिए बनाई चहारदीवारी पिछले साल बरसात में टूट गई। दीवार टूटने और मलबा गिरने से नए भवन को खतरा है। शिक्षकों का कहना है कि इस खतरे को दूर करने के बाद ही शिफ्टिंग मुमकिन है।
नरसिंहडांडा में हाईस्कूल की कक्षाएं नहीं चलना वाकई गंभीर है। एलटी शिक्षक नहीं होने से जून-जुलाई में हाईस्कूल की कक्षाओं को पढ़ाने वाला कोई नहीं था। अलबत्ता अब दो एलटी शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। इस शिक्षा सत्र में हर हाल में हाईस्कूल की कक्षाएं चलाई जाएगी। वहीं नए स्कूल की क्षतिग्रस्त दीवार को ठीक करने के लिए जिला योजना में बजट प्रस्तावित किया जाएगा। -नवीन चंद्र पाठक, मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।