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16 दिसंबर भारतीय सेना का स्वर्णिम इतिहास

Wed, 17 Dec 2014 05:30 AM IST
Champawat
Champawat Updated Wed, 17 Dec 2014 05:30 AM IST
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बनबसा (चंपावत)। देश के इतिहास में 16 दिसंबर का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है। भारतीय फौज ने 16 दिसंबर 1971 को विश्व की सबसे बड़ी घटना को अंजाम दिया था। इसी दिन भारतीय सेना के तत्कालीन जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने पाकिस्तानी फौज के कमांडर ले. जनरल आमिर अब्दुल्ला खान नियाजी समेत 95 हजार सैनिकों को सरेंडर कराया था। इससे पहले इतनी संख्या में किसी सेना ने सरेंडर नहीं किया था।
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1971 में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति याहयाखान की सेना ने तीन दिसंबर 1971 को भारत पर हमला बोल दिया। तत्कालीन प्रधान मंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष एसएचएफजे मानिक शाह के साथ विचार-मंथन कर युद्ध की घोषणा की थी। भारतीय सैनिकों ने जांबाजी के साथ युद्ध लड़ा। तेरह दिनों तक युद्ध चला। आखिर पाकिस्तान फौज के कमांडर ले. जनरल नियाजी ने हार मानकर 95 हजार सैनिकों के साथ कमांडर ले. जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष समर्पण कर दिया था। इस यद्ध में जांबाजी से लड़ते हुए 2473 जांबाज सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे। युद्ध को भारतीय फौज ने पूर्वी पाकिस्तान की मुक्ति वाहिनी के साथ मिलकर लड़ा था। यह जीत सेना के स्वर्णिम इतिहास में दर्ज है। मौजूदा समय में यहां तैनात सेकेंड ग्रेनेडियर के कै. अरुणोदय ने बताया कि युद्ध में सेकेंड ग्रेनेडियर ने भी राजस्थान बार्डर में युद्ध में भूमिका निभाई थी।
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