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देवी रथ यात्रा के साक्षी बने हजारों श्रद्धालु
Champawat
Updated Fri, 10 Oct 2014 05:34 AM IST
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लोहाघाट (चंपावत)। बाराकोट में लड़ीधुरा महोत्सव के अंतिम दिन काकड़ और बाराकोट से देवी रथ यात्राएं निकली। हजारों लोग देवी रथ यात्रा के साक्षी बने। काकड़ से शुरू देवी रथ यात्रा में रात भर देव डांगर अवतरित हुए। काकड़ के रथ में भगवती के रूप में प्रकाश अधिकारी और कालिका के रूप में कल्याण सिंह अधिकारी विराजमान हुए।
काकड़ का रथ पम्दा गांव से होते हुए लड़ीधुरा की पहाड़ी पारकर मंदिर में सबसे पहले पहुंचा। रथ के पीछे हजारों लोग मां का जयकारा करते हुए चल रहे थे। महिलाएं मांगलिक गीत गा रही थीं। उत्तर दिशा से बाराकोट का रथ आया। इसमें भगवती के रूप में रंजीत सिंह, कालिका के रूप में लक्ष्मी फर्त्याल और नवीन सिंह विराजमान थे। रथ यात्रा के मंदिर में प्रवेश करने पर महिलाओं ने अक्षत और फूल बरसाए। दोनों रथाें के मंदिर में पहुंचने के बाद यहां पैर रखने तक की जगह नहीं थी। इसी के साथ मंदिर में व्यापारिक गतिविधियां भी शुरू हो गईं। मेले में विभिन्न स्थानों से सैंकड़ों व्यापारी पहुंचे। सुरक्षा की भी पुख्ता व्यवस्था थी। आयोजन समिति की ओर से तीन स्थानों में पानी की व्यवस्था की गई थी। समिति अध्यक्ष नगेंद्र जोशी, राजू अधिकारी, जेएस अधिकारी, दुर्गेश जोशी, नवीन जोशी, रमेश जोशी, लोकमान अधिकारी, कृष्णा अधिकारी, देवकी अधिकारी, हेमा जोशी, कल्पना जोशी, मंजू अधिकारी व्यवस्था में जुटे थे।
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काकड़ का रथ पम्दा गांव से होते हुए लड़ीधुरा की पहाड़ी पारकर मंदिर में सबसे पहले पहुंचा। रथ के पीछे हजारों लोग मां का जयकारा करते हुए चल रहे थे। महिलाएं मांगलिक गीत गा रही थीं। उत्तर दिशा से बाराकोट का रथ आया। इसमें भगवती के रूप में रंजीत सिंह, कालिका के रूप में लक्ष्मी फर्त्याल और नवीन सिंह विराजमान थे। रथ यात्रा के मंदिर में प्रवेश करने पर महिलाओं ने अक्षत और फूल बरसाए। दोनों रथाें के मंदिर में पहुंचने के बाद यहां पैर रखने तक की जगह नहीं थी। इसी के साथ मंदिर में व्यापारिक गतिविधियां भी शुरू हो गईं। मेले में विभिन्न स्थानों से सैंकड़ों व्यापारी पहुंचे। सुरक्षा की भी पुख्ता व्यवस्था थी। आयोजन समिति की ओर से तीन स्थानों में पानी की व्यवस्था की गई थी। समिति अध्यक्ष नगेंद्र जोशी, राजू अधिकारी, जेएस अधिकारी, दुर्गेश जोशी, नवीन जोशी, रमेश जोशी, लोकमान अधिकारी, कृष्णा अधिकारी, देवकी अधिकारी, हेमा जोशी, कल्पना जोशी, मंजू अधिकारी व्यवस्था में जुटे थे।
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