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मीना ने दिखाई नई राह
Champawat
Updated Thu, 20 Mar 2014 05:33 AM IST
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चंपावत। कृषि प्रधान देश में अमूमन खेत-खलिहानों से मुनाफा तो दूर पेट भरना भी दुश्वार हो रहा है। ऐसे चुनौती भरे दौर में एक महिला काश्तकार ने खेती में नई ऊंचाई हासिल की है। उन्होंने न केवल इसे आमदनी का जरिया बनाया, बल्कि दूसरों को भी प्रेरित किया है।
मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर छीड़ापानी तक पहुंचने को कायदे का रास्ता नहीं है, लेकिन ऐसी जगह में मीना बर्कबेक ने करीब 150 नाली में फैले खेतों को हराभरा किया। आलू, प्याज, गोभी, लहसुन, सरसो, मसूर, मक्का से लेकर चारे के लिए चरी तक से जमीन को लहलहाया। जैविक तरीके से उगाई सब्जी से वे सालभर में करीब एक लाख की आय अर्जित कर रही हैं। साथ ही, सात गाय और आठ बछियों से रोजाना औसतन 30 लीटर दूध पैदा किया। इससे सालभर में करीब तीन लाख रुपए की आय वे कर रही हैं। मीना बताती हैं कि मां जूलियट और पिता पीटर बर्कबेक की सीख के अलावा भाई डेसमंड के प्रोत्साहन से उन्हें यह सफलता मिली है।
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मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर छीड़ापानी तक पहुंचने को कायदे का रास्ता नहीं है, लेकिन ऐसी जगह में मीना बर्कबेक ने करीब 150 नाली में फैले खेतों को हराभरा किया। आलू, प्याज, गोभी, लहसुन, सरसो, मसूर, मक्का से लेकर चारे के लिए चरी तक से जमीन को लहलहाया। जैविक तरीके से उगाई सब्जी से वे सालभर में करीब एक लाख की आय अर्जित कर रही हैं। साथ ही, सात गाय और आठ बछियों से रोजाना औसतन 30 लीटर दूध पैदा किया। इससे सालभर में करीब तीन लाख रुपए की आय वे कर रही हैं। मीना बताती हैं कि मां जूलियट और पिता पीटर बर्कबेक की सीख के अलावा भाई डेसमंड के प्रोत्साहन से उन्हें यह सफलता मिली है।
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