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पाठ्यक्रम का हिस्सा बने लोककला: राय
Champawat
Updated Wed, 15 Jan 2014 05:52 AM IST
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चंपावत। हिमालय कलाकार कल्याण समिति ने लोक कलाकारों के संरक्षण के लिए प्रदेश स्तर पर समग्र नीति बनाने की मांग की है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष भैरव दत्त राय का कहना है कि उत्तराखंड में लोक कला और कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके लिए लोक कला को शिक्षण पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि लोककला को बचाने के लिए कलाकारों को आर्थिक सुरक्षा दिया जाना जरूरी है। इस समय कलाकारों को एक कार्यक्रम के मात्र 400 रुपए दिए जा रहे हैं। जो महंगाई के दौर में ऊंट के मुंह में जीरा है। राय ने कलाकारों के मानदेय में इजाफा, बीमा लाभ देने, कलाकाराें की काबिलियत के आधार पर 45 वर्ष के बाद गुजारा भत्ता देने, प्रशिक्षित कलाकारों को सरकारी सेवा देने की मांग की। साथ ही, जिला और मंडल स्तर पर नियमित रूप से कार्यशाला की मांग की गई। उन्होंने कहा कि पिछले साल प्रांतीय स्तर पर गठित समिति अब लोककला के प्रसार के लिए लोगों को जागरूक भी करेगी।
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पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि लोककला को बचाने के लिए कलाकारों को आर्थिक सुरक्षा दिया जाना जरूरी है। इस समय कलाकारों को एक कार्यक्रम के मात्र 400 रुपए दिए जा रहे हैं। जो महंगाई के दौर में ऊंट के मुंह में जीरा है। राय ने कलाकारों के मानदेय में इजाफा, बीमा लाभ देने, कलाकाराें की काबिलियत के आधार पर 45 वर्ष के बाद गुजारा भत्ता देने, प्रशिक्षित कलाकारों को सरकारी सेवा देने की मांग की। साथ ही, जिला और मंडल स्तर पर नियमित रूप से कार्यशाला की मांग की गई। उन्होंने कहा कि पिछले साल प्रांतीय स्तर पर गठित समिति अब लोककला के प्रसार के लिए लोगों को जागरूक भी करेगी।
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