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धृतराष्ट और गांधारी बने, सत्ता में बैठे लोग...
Champawat
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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चंपावत। छतार में काव्य संग्रह अंर्तद्वंद्व का विमोचन किया गया। इस अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। बृहस्पतिवार को पशुपालन विभाग में पशुधन प्रसार अधिकारी के पद पर तैनात हिमांशु जोशी के प्रथम काव्य संग्रह अंर्तद्वंद्व का विमोचन करते हुए साहित्यकार डा.तिलकराज जोशी ने रचनाकार के प्रयासों की सराहना की। अक्षरधाम प्रकाशन की ओर से प्रकाशित किए गए काव्य संग्रह में अलग-अलग विषयों पर 44 कविताओं का संग्रह किया गया है।
इस मौके पर कूर्मांचल ऐंग्लो संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य गिरीश चंद्र पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए हिमांशु जोशी ने अपने काव्य संग्रह से समयाभाव शीर्षक से कविता पाठ करते हुए कहा-
यह सब आधुनिक परिवेश के परिवर्तन का प्रभाव है, कुछ भी करना पड़ता नहीं, तथापि जीवन में एक वृहद समयाभाव है।
जीआईसी देवीधूरा के प्रधानाचार्य एवं साहित्यकार डा.विष्णु दत्त शास्त्री सरल ने सर्वधर्म समभाव के परिप्रेक्ष्य में काव्य पाठ करते हुए कहा- चमके मंदिर-मस्जिद, गिरजाघर-गुरुद्वारा, साथ-साथ ही कदम बढ़ाए यह जग सारा।
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साहित्यकार सुभाष जोशी ने वर्तमान परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए कहा- धृतराष्ट गांधारी बने, सत्ता में बैठे लोग, देख नहीं हैं पा रहे, जनता का आक्रोश।
साहित्यकार डा.टीआर जोशी ने दीप पर्व पर अपने कविता कुछ यूं गुनगुनाई- आओ दीप जलाएं मिलकर, नेह दीया उर में नित भरकर।
काव्य गोष्ठी का संचालन करते हुए राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्वांला के प्रधानाचार्य डा.बीसी जोशी ने कहा- रोशन करू मैं दीपक कहीं का, अंतस का मेरे दीपक जला दो।
इस मौके पर गार्गी जोशी एवं प्रगति पांडेय ने भी काव्य पाठ किया। काव्य गोष्ठी एवं विमोचन कार्यक्रम में एलपी जोशी, चंद्रा जोशी, जया जोशी, भूपेश जोशी, साकेत जोशी, दिनेश चंद्र पांडेय, नवीन चंद्र पांडेय, डीएन उप्रेती, लोकमणी पंत एवं आलोक जोशी सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थेे।
इस मौके पर कूर्मांचल ऐंग्लो संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य गिरीश चंद्र पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए हिमांशु जोशी ने अपने काव्य संग्रह से समयाभाव शीर्षक से कविता पाठ करते हुए कहा-
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यह सब आधुनिक परिवेश के परिवर्तन का प्रभाव है, कुछ भी करना पड़ता नहीं, तथापि जीवन में एक वृहद समयाभाव है।
जीआईसी देवीधूरा के प्रधानाचार्य एवं साहित्यकार डा.विष्णु दत्त शास्त्री सरल ने सर्वधर्म समभाव के परिप्रेक्ष्य में काव्य पाठ करते हुए कहा- चमके मंदिर-मस्जिद, गिरजाघर-गुरुद्वारा, साथ-साथ ही कदम बढ़ाए यह जग सारा।
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साहित्यकार सुभाष जोशी ने वर्तमान परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए कहा- धृतराष्ट गांधारी बने, सत्ता में बैठे लोग, देख नहीं हैं पा रहे, जनता का आक्रोश।
साहित्यकार डा.टीआर जोशी ने दीप पर्व पर अपने कविता कुछ यूं गुनगुनाई- आओ दीप जलाएं मिलकर, नेह दीया उर में नित भरकर।
काव्य गोष्ठी का संचालन करते हुए राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय स्वांला के प्रधानाचार्य डा.बीसी जोशी ने कहा- रोशन करू मैं दीपक कहीं का, अंतस का मेरे दीपक जला दो।
इस मौके पर गार्गी जोशी एवं प्रगति पांडेय ने भी काव्य पाठ किया। काव्य गोष्ठी एवं विमोचन कार्यक्रम में एलपी जोशी, चंद्रा जोशी, जया जोशी, भूपेश जोशी, साकेत जोशी, दिनेश चंद्र पांडेय, नवीन चंद्र पांडेय, डीएन उप्रेती, लोकमणी पंत एवं आलोक जोशी सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थेे।