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डंपरों को आसमान खा या धरती निगल गई!
Updated Sat, 19 May 2018 11:32 PM IST
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टनकपुर (चंपावत)।
विचई हादसे के बाद मौत बनकर दौड़ने वाले डंपर शनिवार को सड़क से पूरी तरह गायब रहे। डंपरों का आसमान खा गया या धरती निगल गई। डंपरों के क्षेत्र की सड़कों से अचानक गायब होने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। चर्चा यह है कि ऊपर तक पहुंच ही अब तक इन्हें ओवरलोड खनिज लादकर रातभर दौड़ने की छूट देती रही है। डंपर मालिकों की सेंटिंग पुलिस एवं वन विभाग तक ही नहीं, बल्कि एआरटीओ तक है।
बताया जा रहा है कि हादसे से पहले तक सितारगंज, खटीमा तक के डंपर शाम ढलते ही दर्जनों की संख्या में बेखौफ होकर टनकपुर से रातभर ओवरलोड उप खनिज का ढुलान करते रहे हैं। इस दौरान उनकी तेज रफ्तार एवं ओवरलोडिंग पर किसी की नजर नहीं थी। अगर रात को पुलिस प्रशासन इनकी रफ्तार पर नजर रखता तो शायद हादसा बच सकता था। घटना के समय सितारगंज से बनबसा तक कई पुलिस एवं वन विभाग के बैरियर दो डंपरों ने पार किए। बताया जा रहा है कि इन दोनों डंपरों में आगे निकलने की होड़ मची थी और ओवरटेक करने के प्रयास में हादसा हुआ।
शनिवार को यह चर्चा क्षेत्र में रही कि रात में या तड़के टनकपुर से ओवरलोड उप खनिज लादकर निकलने वाले इन डंपरों का टनकपुर से लेकर सितारगंज तक पुलिस एवं परिवहन विभाग का महीना बंधा है। महीना देने के बाद चालक बेखौफ होकर रात को सड़क पर डंपर दौड़ते हैं। रात में जब समय अधिक हो जाता है कि सितारगंज एवं अन्य जगहों से आने वाले डंपर चालकों में पहले पहुंचकर उप खनिज लदवाने की होड़ मची रहती है। यही वजह है कि चालक सड़क सुरक्षा को नजरअंदाज कर रास्ते पर एक-दूसरे को ओवरटेक कर मौत बनकर दौड़ते हैं। इस हादसे में भी ओवरटेक करना ही प्रमुख कारण माना जा रहा है। हादसे के बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट हुआ तो शुक्रवार से ही डंपर सड़कों पर नजर नहीं आए।
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पुलिस यातायात का पाठ पढ़ाने तक ही सीमित
टनकपुर। पुलिस की ओर से बीते दिनों वाहन चालकों को जमकर ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाया गया था, साथ ही चालान भी काटे, लेकिन पुलिस की सजगता सड़क सुरक्षा पखवाड़े तक ही रही, इस कारण 11 श्रद्धालुओं की मौत पुलिस की सजगता की पोल खोल गया। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर रात में यह डंपर बेखौफ होकर एनएच पर दौड़ते हैं तो क्या इन्हें देखने वाला कोई नहीं है। क्या इनकी गति निर्धारित नहीं है। हालांकि, हादसे के सीओ आरएस रौतेला का कहना है कि एसपी के निर्देश पर वाहनों में ओवरलोडिंग एवं ओवर स्पीड पर नजर रखने के लिए दो पेट्रोलिंग टीमें गठित की गई है। टीम में एक प्लाटून पीएसी तैनात है। वहीं दो गश्त पार्टियां बनाई गई है, जो बनबसा से टनकपुर तक रात के समय वाहनों की स्पीड एवं ओवर लोडिंग पर नियमित नजर रखेगी।
विचई हादसे के बाद मौत बनकर दौड़ने वाले डंपर शनिवार को सड़क से पूरी तरह गायब रहे। डंपरों का आसमान खा गया या धरती निगल गई। डंपरों के क्षेत्र की सड़कों से अचानक गायब होने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। चर्चा यह है कि ऊपर तक पहुंच ही अब तक इन्हें ओवरलोड खनिज लादकर रातभर दौड़ने की छूट देती रही है। डंपर मालिकों की सेंटिंग पुलिस एवं वन विभाग तक ही नहीं, बल्कि एआरटीओ तक है।
बताया जा रहा है कि हादसे से पहले तक सितारगंज, खटीमा तक के डंपर शाम ढलते ही दर्जनों की संख्या में बेखौफ होकर टनकपुर से रातभर ओवरलोड उप खनिज का ढुलान करते रहे हैं। इस दौरान उनकी तेज रफ्तार एवं ओवरलोडिंग पर किसी की नजर नहीं थी। अगर रात को पुलिस प्रशासन इनकी रफ्तार पर नजर रखता तो शायद हादसा बच सकता था। घटना के समय सितारगंज से बनबसा तक कई पुलिस एवं वन विभाग के बैरियर दो डंपरों ने पार किए। बताया जा रहा है कि इन दोनों डंपरों में आगे निकलने की होड़ मची थी और ओवरटेक करने के प्रयास में हादसा हुआ।
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शनिवार को यह चर्चा क्षेत्र में रही कि रात में या तड़के टनकपुर से ओवरलोड उप खनिज लादकर निकलने वाले इन डंपरों का टनकपुर से लेकर सितारगंज तक पुलिस एवं परिवहन विभाग का महीना बंधा है। महीना देने के बाद चालक बेखौफ होकर रात को सड़क पर डंपर दौड़ते हैं। रात में जब समय अधिक हो जाता है कि सितारगंज एवं अन्य जगहों से आने वाले डंपर चालकों में पहले पहुंचकर उप खनिज लदवाने की होड़ मची रहती है। यही वजह है कि चालक सड़क सुरक्षा को नजरअंदाज कर रास्ते पर एक-दूसरे को ओवरटेक कर मौत बनकर दौड़ते हैं। इस हादसे में भी ओवरटेक करना ही प्रमुख कारण माना जा रहा है। हादसे के बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट हुआ तो शुक्रवार से ही डंपर सड़कों पर नजर नहीं आए।
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पुलिस यातायात का पाठ पढ़ाने तक ही सीमित
टनकपुर। पुलिस की ओर से बीते दिनों वाहन चालकों को जमकर ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाया गया था, साथ ही चालान भी काटे, लेकिन पुलिस की सजगता सड़क सुरक्षा पखवाड़े तक ही रही, इस कारण 11 श्रद्धालुओं की मौत पुलिस की सजगता की पोल खोल गया। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर रात में यह डंपर बेखौफ होकर एनएच पर दौड़ते हैं तो क्या इन्हें देखने वाला कोई नहीं है। क्या इनकी गति निर्धारित नहीं है। हालांकि, हादसे के सीओ आरएस रौतेला का कहना है कि एसपी के निर्देश पर वाहनों में ओवरलोडिंग एवं ओवर स्पीड पर नजर रखने के लिए दो पेट्रोलिंग टीमें गठित की गई है। टीम में एक प्लाटून पीएसी तैनात है। वहीं दो गश्त पार्टियां बनाई गई है, जो बनबसा से टनकपुर तक रात के समय वाहनों की स्पीड एवं ओवर लोडिंग पर नियमित नजर रखेगी।