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गौड़ी नदी के संरक्षण के लिए बजट की प्रतीक्षा न करें अधिकारी
Updated Sat, 18 Aug 2018 11:57 PM IST
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चंपावत। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने कहा है कि सभी अधिकारी बजट की प्रतीक्षा किए बगैर विभाग में उपलब्ध संसाधनों से नदी किनारे जल संरक्षण करने वाले पौधों का रोपण, ट्रैकरूट, यात्री शेड, चैकडैम, ब्रेस्टवाल आदि का निर्माण करने के साथ तालाबों में मत्स्य बीज डालना सुनिश्चित करें।
गौड़ी नदी के संरक्षण के लिए शनिवार को जिला कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक में डीएम ने कहा कि गौड़ी नदी के संरक्षण के लिए शासन को प्रेषित प्रस्तावों की प्रतीक्षा के बगैर अधिकारी दिए गए दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने इस महत्वपूर्ण योजना में बैंकर्स को शामिल कर उनके सीएसआर फंड का उपयोग करने को कहा। बैठक में सीडीओ एसएस बिष्ट, एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट, परियोजना निदेशक एचजी भट्ट, जिला विकास अधिकारी आरसी तिवारी आदि थे।
वभागों की ओर से शासन को भेजे गए हैं प्रस्ताव
चंपावत। बैठक में सीडीओ एसएस बिष्ट ने मत्स्य निरीक्षक को छीड़ापानी मत्स्य केंद्र से समन्वय स्थापित कर गौड़ी नदी में मत्स्य बीज डालने को कहा।
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग ने भूकटाव वाले स्थानों पर दीवार बनाने के लिए 87.27 लाख, पेयजल निगम और जल संस्थान ने सीवरेज को नदी में जाने से रोकने के लिए 323.34 लाख और सिंचाई विभाग ने क्षेत्र में चैकडैम आदि के लिए 158.93 लाख, वन विभाग ने बांज, बुरांश, तिमूर, रिंगाल, उतीस आदि के पौधों का रोपण करने के लिए दो लाख और पर्यटन विभाग ने ट्रेकिंग रूट, सौंदर्यीकरण आदि के लिए 180 लाख के प्रस्ताव शासन को भेजे हैं।
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गौड़ी नदी के संरक्षण के लिए शनिवार को जिला कार्यालय सभागार में आयोजित बैठक में डीएम ने कहा कि गौड़ी नदी के संरक्षण के लिए शासन को प्रेषित प्रस्तावों की प्रतीक्षा के बगैर अधिकारी दिए गए दायित्वों का निर्वहन करें। उन्होंने इस महत्वपूर्ण योजना में बैंकर्स को शामिल कर उनके सीएसआर फंड का उपयोग करने को कहा। बैठक में सीडीओ एसएस बिष्ट, एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट, परियोजना निदेशक एचजी भट्ट, जिला विकास अधिकारी आरसी तिवारी आदि थे।
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वभागों की ओर से शासन को भेजे गए हैं प्रस्ताव
चंपावत। बैठक में सीडीओ एसएस बिष्ट ने मत्स्य निरीक्षक को छीड़ापानी मत्स्य केंद्र से समन्वय स्थापित कर गौड़ी नदी में मत्स्य बीज डालने को कहा।
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग ने भूकटाव वाले स्थानों पर दीवार बनाने के लिए 87.27 लाख, पेयजल निगम और जल संस्थान ने सीवरेज को नदी में जाने से रोकने के लिए 323.34 लाख और सिंचाई विभाग ने क्षेत्र में चैकडैम आदि के लिए 158.93 लाख, वन विभाग ने बांज, बुरांश, तिमूर, रिंगाल, उतीस आदि के पौधों का रोपण करने के लिए दो लाख और पर्यटन विभाग ने ट्रेकिंग रूट, सौंदर्यीकरण आदि के लिए 180 लाख के प्रस्ताव शासन को भेजे हैं।
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