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एमएसबीवाई के इलाज को लेकर उहापोह बरकरार
Updated Tue, 14 Nov 2017 11:18 PM IST
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चंपावत। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) के इलाज को लेकर चंपावत जिले में उहापोह बना हुआ है। 9 नवंबर को सरकार ने यह योजना खत्म कर दी, लेकिन इसी योजना से इलाज की सुविधा देने का निर्णय लिया। सरकार के इस निर्णय के बावजूद चंपावत जिले में उहापोह बनी हुई है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.एमएस बोहरा ने बताया कि सरकार के निर्देश से एमएसबीवाई के पुराने कार्डों से ही बीमा के अनुमन्य अस्पतालों में इलाज कराया जा सकेगा। मगर बीते एक सप्ताह में योजना के अंतर्गत एक भी मरीज नहीं आया। एमएसबीवाई के जिला समन्वयक प्रेम भट्ट ने बताया कि नए निर्देशों के मुताबिक पुराने कार्ड के साथ मरीज जिले में चंपावत, लोहाघाट व टनकपुर के सरकारी अस्पताल व टनकपुर के तुषार अस्पताल में इलाज की सुविधा है। बस इसके लिए संबंधित अस्पताल के प्रभारी को इलाज की अनुमति के लिए सीएमओ को मेल करनी होगी। वहां से अनुमति मिलने के बाद इलाज की प्रक्रिया शुरू होगी। इलाज की सुविधा देने के बावजूद अभी यह तय नहीं है कि इलाज के लिए बजट किस मद से मिलेगा।
2016 में इस योजना के अंतर्गत 35691 लोगों को पंजीकृत करने का लक्ष्य था, मगर पंजीकरण 24002 ही हुए। जबकि इलाज कराने वाले महज 156 ही थे। वहीं 2017 तक योजना के तहत कुल 37705 लोगों के पंजीकरण का लक्ष्य था, मगर कुल पंजीकरण 31371 ही हो सके। लेकिन योजना का लाभ उठाने वालों की संख्या मात्र सात रही।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.एमएस बोहरा ने बताया कि सरकार के निर्देश से एमएसबीवाई के पुराने कार्डों से ही बीमा के अनुमन्य अस्पतालों में इलाज कराया जा सकेगा। मगर बीते एक सप्ताह में योजना के अंतर्गत एक भी मरीज नहीं आया। एमएसबीवाई के जिला समन्वयक प्रेम भट्ट ने बताया कि नए निर्देशों के मुताबिक पुराने कार्ड के साथ मरीज जिले में चंपावत, लोहाघाट व टनकपुर के सरकारी अस्पताल व टनकपुर के तुषार अस्पताल में इलाज की सुविधा है। बस इसके लिए संबंधित अस्पताल के प्रभारी को इलाज की अनुमति के लिए सीएमओ को मेल करनी होगी। वहां से अनुमति मिलने के बाद इलाज की प्रक्रिया शुरू होगी। इलाज की सुविधा देने के बावजूद अभी यह तय नहीं है कि इलाज के लिए बजट किस मद से मिलेगा।
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2016 में इस योजना के अंतर्गत 35691 लोगों को पंजीकृत करने का लक्ष्य था, मगर पंजीकरण 24002 ही हुए। जबकि इलाज कराने वाले महज 156 ही थे। वहीं 2017 तक योजना के तहत कुल 37705 लोगों के पंजीकरण का लक्ष्य था, मगर कुल पंजीकरण 31371 ही हो सके। लेकिन योजना का लाभ उठाने वालों की संख्या मात्र सात रही।
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