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पंचेश्वर बांध विस्थापितों को भवन निर्माण को 30 लाख रुपए मुआवजा मिले
Updated Sat, 14 Oct 2017 11:23 PM IST
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लोहाघाट (चंपावत)।
पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले लोहाघाट विकासखंड के खायकोट मल्ला में ग्रामीणों की खुली बैठक में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के संबंध में ग्रामीणों के सुझाव लिए गए। ग्रामीणों ने उनके सुझावों को प्रारूप में शामिल न करने पर बांध का विरोध करने की चेतावनी दी। ग्राम प्रधान किशन राम की अध्यक्षता और ग्राम पंचायत अधिकारी गणेश गड़िया के संचालन में हुई बैठक में ग्रामीणों को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के प्रारूप की जानकारी दी।
नोडल अधिकारी उप जिलाधिकारी आरसी गौतम ने ग्रामीणों को बांध निर्माण के संबंध में जानकारियां दी। इस दौरान डूब क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण होशियार सिंह का कहना था कि डूब क्षेत्र में आने वाले लोगों के विस्थापन की जगह बताई जाए। गणेश सिंह ने प्रभावित परिवारों को मकान बनाने के लिए 500 वर्ग मीटर जमीन देने, भवन बनाने के लिए 30 लाख रुपये का मुआवजा देने, कृषि कार्य के लिए सात एकड़ जमीन प्रति परिवार देने, परिवार रजिस्टर के आधार पर लोगों को मुआवजा देने, प्रभावित परिवारों की तीन पुश्त तक 20 हजार रुपये प्रतिमाह देने, गौशाला निर्माण के लिए 2.50 लाख रुपये देने, बिना किसी शर्त के प्रभावित परिवारों के एक व्यक्ति को परियोजना, राज्य व केंद्र सरकार में नौकरी देने, भूमि का सर्किल रेट तीनों जिलों में एक समान रूप से देने, बांध निर्माण के बाद पर्यटन की गतिविधियों में ग्रामीणों को शामिल करने समेत कई सुझाव दिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनके सुझावों को एक माह के भीतर विस्थापन नीति में शामिल कर सार्वजनिक नहीं किया गया, तो क्षेत्रवासी परियोजना का विरोध करेंगे। बैठक में उरेडा के परियोजना अधिकारी ओम कुमार, पटवारी सुरेश राम ने भी कई जानकारियां दी। ग्रामीण गणेश पंत, हरिकिशन, विनोद, हरीश कुमार, परमानंद, गणेश दत्त पंत, श्याम दत्त, भाष्कर पंत, गंगा देवी, उमेश सिंह, रमेश सिंह, उमाशंकर आदि मौजूद थे।
पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले लोहाघाट विकासखंड के खायकोट मल्ला में ग्रामीणों की खुली बैठक में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के संबंध में ग्रामीणों के सुझाव लिए गए। ग्रामीणों ने उनके सुझावों को प्रारूप में शामिल न करने पर बांध का विरोध करने की चेतावनी दी। ग्राम प्रधान किशन राम की अध्यक्षता और ग्राम पंचायत अधिकारी गणेश गड़िया के संचालन में हुई बैठक में ग्रामीणों को पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के प्रारूप की जानकारी दी।
नोडल अधिकारी उप जिलाधिकारी आरसी गौतम ने ग्रामीणों को बांध निर्माण के संबंध में जानकारियां दी। इस दौरान डूब क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण होशियार सिंह का कहना था कि डूब क्षेत्र में आने वाले लोगों के विस्थापन की जगह बताई जाए। गणेश सिंह ने प्रभावित परिवारों को मकान बनाने के लिए 500 वर्ग मीटर जमीन देने, भवन बनाने के लिए 30 लाख रुपये का मुआवजा देने, कृषि कार्य के लिए सात एकड़ जमीन प्रति परिवार देने, परिवार रजिस्टर के आधार पर लोगों को मुआवजा देने, प्रभावित परिवारों की तीन पुश्त तक 20 हजार रुपये प्रतिमाह देने, गौशाला निर्माण के लिए 2.50 लाख रुपये देने, बिना किसी शर्त के प्रभावित परिवारों के एक व्यक्ति को परियोजना, राज्य व केंद्र सरकार में नौकरी देने, भूमि का सर्किल रेट तीनों जिलों में एक समान रूप से देने, बांध निर्माण के बाद पर्यटन की गतिविधियों में ग्रामीणों को शामिल करने समेत कई सुझाव दिए।
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ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनके सुझावों को एक माह के भीतर विस्थापन नीति में शामिल कर सार्वजनिक नहीं किया गया, तो क्षेत्रवासी परियोजना का विरोध करेंगे। बैठक में उरेडा के परियोजना अधिकारी ओम कुमार, पटवारी सुरेश राम ने भी कई जानकारियां दी। ग्रामीण गणेश पंत, हरिकिशन, विनोद, हरीश कुमार, परमानंद, गणेश दत्त पंत, श्याम दत्त, भाष्कर पंत, गंगा देवी, उमेश सिंह, रमेश सिंह, उमाशंकर आदि मौजूद थे।
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