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भारत नेपाल के बीच कारोबार आने लगा पटरी पर
Updated Tue, 04 Jul 2017 10:59 PM IST
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भारत-नेपाल के बीच कारोबार सुधरने लगा
बनबसा (चंपावत)। व्यापारियों द्वारा जीएसटी में पंजीकरण न कराने और सीमा शुल्क विभाग के मानकों का पालन न करने से इस सीमा पर दो दिनों तक भारत नेपाल के बीच वैधानिक व्यापार ठप रहा। सोमवार को सब्जियों की दो खेप नेपाल को गई। धीरे-धीरे भारत-नेपाल के बीच होने वाला वैधानिक व्यापार पटरी पर आने की संभावना जताई जा रही है।
जीएसटी में व्यापारियों द्वारा पंजीकरण नही कराए जाने और कस्टम विभाग के नए प्रपत्रों का पुराने प्रपत्रों से मिलान न हो पाने से एक और दो जुलाई को इस सीमा पर भारत-नेपाल के बीच वैधानिक व्यापार ठप रहा। तीन जुलाई से इस सीमा पर दोनों देशों के बीच संचालित होने वाला व्यापार पटरी पर आने लगा है। कस्टम अधीक्षक एनके श्रीवास्तव ने बताया कि व्यापारियों को पहले ही जीएसटी में पंजीकरण कराने को आगाह कर दिया गया था लेकिन उनके द्वारा जीएसटी में पंजीकरण न कराने से असुविधा हुई है। उधर बनबसा बाजार में भी व्यापारियों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वरिष्ठ व्यापारी चुन्नी लाल भाटिया का कहना है कि दुकान में वैट चुकाए गए सामान का आधा कर केंद्र सरकार के खाते में कैसे जमा होगा और वेट चुकाए सामान पर जीएसटी किस तरह से वसूला जाएगा? इसको स्पष्ट नहीं किया गया है। पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष और कपड़ा व्यवसायी एसएन गोयल ने बताया कि जीएसटी की नियमावली न मिलने से कारोबार में व्यवधान पैदा हो रहा है। पहले कपड़े पर कोई टैक्स और बाद में वेट भी नहीं था लेकिन अब कपड़े पर पांच फीसदी जीएसटी देना होगा, लेकिन इसे ग्राहकों किस तरह वसूला जाएगा स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
जीएसटी में पंजीकृत सब्जी व्यापारी नेपाल गए
बनबसा (चंपावत)। जीएसटी में पंजीकरण कराने की बाध्यता के चलते अब भारत-नेपाल के बीच कैरियर के रूप में अपनी रोजी-रोटी चलाने वालों पर गाज गिरना तय है। भारत से नेपाल को बड़ी मात्रा में साइकिलों पर कैरियरों द्वारा सामान नेपाल के बाजारों तक पहुंचाया जाता है। जीएसटी में पंजीकरण कराने के कारण अब व्यापारी पहले की तरह कारोबार नहीं कर सकेंगे। भारत से नेपाल को आम जरूरत की वस्तुओं की तस्करी भी रुकने की संभावना है।
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बनबसा (चंपावत)। व्यापारियों द्वारा जीएसटी में पंजीकरण न कराने और सीमा शुल्क विभाग के मानकों का पालन न करने से इस सीमा पर दो दिनों तक भारत नेपाल के बीच वैधानिक व्यापार ठप रहा। सोमवार को सब्जियों की दो खेप नेपाल को गई। धीरे-धीरे भारत-नेपाल के बीच होने वाला वैधानिक व्यापार पटरी पर आने की संभावना जताई जा रही है।
जीएसटी में व्यापारियों द्वारा पंजीकरण नही कराए जाने और कस्टम विभाग के नए प्रपत्रों का पुराने प्रपत्रों से मिलान न हो पाने से एक और दो जुलाई को इस सीमा पर भारत-नेपाल के बीच वैधानिक व्यापार ठप रहा। तीन जुलाई से इस सीमा पर दोनों देशों के बीच संचालित होने वाला व्यापार पटरी पर आने लगा है। कस्टम अधीक्षक एनके श्रीवास्तव ने बताया कि व्यापारियों को पहले ही जीएसटी में पंजीकरण कराने को आगाह कर दिया गया था लेकिन उनके द्वारा जीएसटी में पंजीकरण न कराने से असुविधा हुई है। उधर बनबसा बाजार में भी व्यापारियों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वरिष्ठ व्यापारी चुन्नी लाल भाटिया का कहना है कि दुकान में वैट चुकाए गए सामान का आधा कर केंद्र सरकार के खाते में कैसे जमा होगा और वेट चुकाए सामान पर जीएसटी किस तरह से वसूला जाएगा? इसको स्पष्ट नहीं किया गया है। पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष और कपड़ा व्यवसायी एसएन गोयल ने बताया कि जीएसटी की नियमावली न मिलने से कारोबार में व्यवधान पैदा हो रहा है। पहले कपड़े पर कोई टैक्स और बाद में वेट भी नहीं था लेकिन अब कपड़े पर पांच फीसदी जीएसटी देना होगा, लेकिन इसे ग्राहकों किस तरह वसूला जाएगा स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।
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जीएसटी में पंजीकृत सब्जी व्यापारी नेपाल गए
बनबसा (चंपावत)। जीएसटी में पंजीकरण कराने की बाध्यता के चलते अब भारत-नेपाल के बीच कैरियर के रूप में अपनी रोजी-रोटी चलाने वालों पर गाज गिरना तय है। भारत से नेपाल को बड़ी मात्रा में साइकिलों पर कैरियरों द्वारा सामान नेपाल के बाजारों तक पहुंचाया जाता है। जीएसटी में पंजीकरण कराने के कारण अब व्यापारी पहले की तरह कारोबार नहीं कर सकेंगे। भारत से नेपाल को आम जरूरत की वस्तुओं की तस्करी भी रुकने की संभावना है।
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