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नेपाली महिला को दस साल सश्रम कारावास
Updated Tue, 14 Nov 2017 11:18 PM IST
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चंपावत।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रेम सिंह खिमाल ने दो साल पहले चरस तस्करी के एक मामले की सुनवाई करते हुए नेपाली महिला को दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। महिला पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जिसकी अदायगी न किए जाने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। महिला की ओर से जेल में बिताई अवधि सजा में शामिल की गई है।
बनबसा थाना पुलिस ने नौ अक्तूबर 2015 को रात्रि गश्त के दौरान मुखबिर की सूचना पर नेपाल की ओर से आ रही एक महिला को जांच के लिए रोका तो महिला सुनीता पुन उर्फ अस्मिता निवासी वार्ड संख्या 11 धोराई एकहारा, जिला दांग नेपाल के कब्जे से साढ़े चार किलोग्राम चरस बरामद हुई। इसके बाद पुलिस की ओर से आरोपी महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/18/20 के तहत मामला पंजीकृत कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले में अधिवक्ताओं की दलीलों और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनीता पुन को दोष सिद्ध पाते हुए दस साल सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुनील कुमार खर्कवाल ने पैरवी की।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रेम सिंह खिमाल ने दो साल पहले चरस तस्करी के एक मामले की सुनवाई करते हुए नेपाली महिला को दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। महिला पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जिसकी अदायगी न किए जाने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। महिला की ओर से जेल में बिताई अवधि सजा में शामिल की गई है।
बनबसा थाना पुलिस ने नौ अक्तूबर 2015 को रात्रि गश्त के दौरान मुखबिर की सूचना पर नेपाल की ओर से आ रही एक महिला को जांच के लिए रोका तो महिला सुनीता पुन उर्फ अस्मिता निवासी वार्ड संख्या 11 धोराई एकहारा, जिला दांग नेपाल के कब्जे से साढ़े चार किलोग्राम चरस बरामद हुई। इसके बाद पुलिस की ओर से आरोपी महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/18/20 के तहत मामला पंजीकृत कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मामले में अधिवक्ताओं की दलीलों और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सुनीता पुन को दोष सिद्ध पाते हुए दस साल सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुनील कुमार खर्कवाल ने पैरवी की।
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