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इधर खुशी, उधर गम:29 माह बाद मिला 578 प्रेरकों को मानदेय
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चंपावत। निरक्षरों को साक्षर करने वाले 578 प्रेरकों का 16 महीने का मानदेय उनके खातों में डाल दिया गया है। मानदेय को पाने के लिए प्रेरकों को खूब पापड़ बेलने पड़े थे। कई बार आंदोलन भी करना पड़ा था।
निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए 2009 में साक्षर भारत मिशन परियोजना शुरू हुई थी। योजना के तहत चंपावत जिले में 38617 निरक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य था। इस लक्ष्य को तय समय में हासिल भी कर लिया गया। ये परियोजना मार्च 2018 में खत्म भी हो गई, लेकिन योजना खत्म होने के बावजूद जिले के 289 लोक साक्षरता केंद्रों के 289 प्रेरक और 289 सह प्रेरकों को दिसंबर 2016 से मार्च 2018 तक का मानदेय नहीं दिया जा सका था। प्रेरक संघ के अध्यक्ष संजय चौड़ाकोटी का कहना है कि योजना बंद करने से प्रेरक न केेवल बेरोजगार हुए, बल्कि अपने मानदेय के लिए भी तरसते रहे। संगठन के प्रयासों से अंतत: अब मानदेय अवमुक्त हो गया है।
मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित का कहना है कि लोक साक्षरता के प्रेरकों व सह प्रेरकों के मानदेय के लिए एक करोड़ 99 लाख 60 हजार रुपये मिला है। इस राशि को ब्लाक शिक्षा कार्यालय केे माध्यम से प्रेरकों व सह प्रेरकों के खाते में स्थानांतरित किया जा रहा है।
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काम से हटने के बाद भी मानदेय को तरस गए कर्मी
चंपावत। बीएसएनएल (भारत संचार निगम लिमिटेड) के ठेका कर्मियों को काम से हटाने के 11 माह बाद भी बकाया मानदेय नहीं मिल सका है। इन कर्मियों ने छह माह के बकाया मानदेय को लेकर आरपार की जंग करने की चेतावनी देते हुए दूरसंचार मंत्री को पत्र भेजा है। ठेका और संविदा कर्मी संघ के जिलाध्यक्ष दुर्गादत्त भट्ट का कहना है कि अप्रैल 2019 से सितंबर 2019 तक का मानदेय नहीं मिला है, जबकि अक्तूबर से ज्यादातर ठेका कर्मियों को काम से भी हटा दिया गया है। बीएसएनएल एक तरफ उन्हें बेरोजगार कर रहा है, वहीं उन्हें बकाया मानदेय केे लिए भी लटका रखा है। संगठन ने मानदेय का भुगतान करने के साथ पिछले साल अक्तूबर से हटाए गए कुछ ठेका कर्मियों को बहाल करने की भी मांग की है। वहीं बीएसएनएल के अल्मोड़ा क्षेत्र के महाप्रबंधक एके गुप्ता का कहना है कि जल्द से जल्द ठेका कर्मियों को मानदेय देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए 2009 में साक्षर भारत मिशन परियोजना शुरू हुई थी। योजना के तहत चंपावत जिले में 38617 निरक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य था। इस लक्ष्य को तय समय में हासिल भी कर लिया गया। ये परियोजना मार्च 2018 में खत्म भी हो गई, लेकिन योजना खत्म होने के बावजूद जिले के 289 लोक साक्षरता केंद्रों के 289 प्रेरक और 289 सह प्रेरकों को दिसंबर 2016 से मार्च 2018 तक का मानदेय नहीं दिया जा सका था। प्रेरक संघ के अध्यक्ष संजय चौड़ाकोटी का कहना है कि योजना बंद करने से प्रेरक न केेवल बेरोजगार हुए, बल्कि अपने मानदेय के लिए भी तरसते रहे। संगठन के प्रयासों से अंतत: अब मानदेय अवमुक्त हो गया है।
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मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित का कहना है कि लोक साक्षरता के प्रेरकों व सह प्रेरकों के मानदेय के लिए एक करोड़ 99 लाख 60 हजार रुपये मिला है। इस राशि को ब्लाक शिक्षा कार्यालय केे माध्यम से प्रेरकों व सह प्रेरकों के खाते में स्थानांतरित किया जा रहा है।
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काम से हटने के बाद भी मानदेय को तरस गए कर्मी
चंपावत। बीएसएनएल (भारत संचार निगम लिमिटेड) के ठेका कर्मियों को काम से हटाने के 11 माह बाद भी बकाया मानदेय नहीं मिल सका है। इन कर्मियों ने छह माह के बकाया मानदेय को लेकर आरपार की जंग करने की चेतावनी देते हुए दूरसंचार मंत्री को पत्र भेजा है। ठेका और संविदा कर्मी संघ के जिलाध्यक्ष दुर्गादत्त भट्ट का कहना है कि अप्रैल 2019 से सितंबर 2019 तक का मानदेय नहीं मिला है, जबकि अक्तूबर से ज्यादातर ठेका कर्मियों को काम से भी हटा दिया गया है। बीएसएनएल एक तरफ उन्हें बेरोजगार कर रहा है, वहीं उन्हें बकाया मानदेय केे लिए भी लटका रखा है। संगठन ने मानदेय का भुगतान करने के साथ पिछले साल अक्तूबर से हटाए गए कुछ ठेका कर्मियों को बहाल करने की भी मांग की है। वहीं बीएसएनएल के अल्मोड़ा क्षेत्र के महाप्रबंधक एके गुप्ता का कहना है कि जल्द से जल्द ठेका कर्मियों को मानदेय देने के प्रयास किए जा रहे हैं।