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लोक शिक्षा प्रेरकों ने लगाई 16 माह का मानदेय देने की गुहार
Updated Mon, 05 Feb 2018 11:17 PM IST
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चंपावत। अक्तूबर 2017 से बंद हो चुके लोक साक्षरता केंद्रों के प्रेरकों ने जिला प्रशासन से 16 माह के मानदेय के भुगतान की गुहार लगाई है। सोमवार को प्रेरकों ने एडीएम को ज्ञापन सौंपकर मानदेय का शीघ्र भुगतान और प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण की अनुमति दिए जाने की मांग उठाई। उन्होंने चेतावनी दी जल्द उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो वह आंदोलन शुरू कर देंगे।
प्रेरकों ने कहा कि वर्ष 2010 से संचालित साक्षर मिशन के तहत जिले के प्रेरकों को 16 माह के मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। उन्हें प्रतिमाह दो हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा था, जिसे अप्रैल 2017 में बढ़ाकर तीन हजार रुपये कर दिया गया था। लेकिन यह घोषणा केवल कागजी औपचारिकता बन कर रह गई। किसी भी प्रेरक को बढ़े हुए मानदेय का अब तक भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने प्रत्येक माह सात हजार रुपये मानदेय की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में रमेश चंद्र कापड़ी, राजेंद्र प्रसाद, ममता जोशी, पुष्कर सिंह, शंकर राम, कृष्ण राम, मनोहर जोशी, भावना जोशी, गीता देव आदि थे।
केंद्रों को बंद करने का लिखित आदेश नहीं मिला
चंपावत। लोक शिक्षा केंद्रों में तैनात शिक्षा प्रेरकों का कहना है कि उन्हें केंद्रों का संचालन बंद करने संबंधी कोई भी लिखित आदेश अब तक नहीं मिला है। जिस कारण विभिन्न स्थानों में प्रेरकों की ओर से लोक शिक्षा केंद्रों का संचालन किया जा रहा है।
प्रेरकों ने कहा कि वर्ष 2010 से संचालित साक्षर मिशन के तहत जिले के प्रेरकों को 16 माह के मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। उन्हें प्रतिमाह दो हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा था, जिसे अप्रैल 2017 में बढ़ाकर तीन हजार रुपये कर दिया गया था। लेकिन यह घोषणा केवल कागजी औपचारिकता बन कर रह गई। किसी भी प्रेरक को बढ़े हुए मानदेय का अब तक भुगतान नहीं हुआ है। उन्होंने प्रत्येक माह सात हजार रुपये मानदेय की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में रमेश चंद्र कापड़ी, राजेंद्र प्रसाद, ममता जोशी, पुष्कर सिंह, शंकर राम, कृष्ण राम, मनोहर जोशी, भावना जोशी, गीता देव आदि थे।
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केंद्रों को बंद करने का लिखित आदेश नहीं मिला
चंपावत। लोक शिक्षा केंद्रों में तैनात शिक्षा प्रेरकों का कहना है कि उन्हें केंद्रों का संचालन बंद करने संबंधी कोई भी लिखित आदेश अब तक नहीं मिला है। जिस कारण विभिन्न स्थानों में प्रेरकों की ओर से लोक शिक्षा केंद्रों का संचालन किया जा रहा है।
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