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ठंड में पानी के लिए ठिठुर रहे सीमावर्ती क्षेत्र के लोग
Updated Sat, 25 Nov 2017 11:42 PM IST
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चंपावत। इन दिनों कड़ाके की ठंड के बावजूद जिले के कई हिस्सों में लोग पानी को तरस रहे हैं। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के कई गांवों में बीते 14 दिनों से पानी की एक बूंद लोगों को नहीं मिल सकी है। ग्रामीणों ने अनेकों बार जल संस्थान से गुहार लगाई, लेकिन अभी तक समाधान नहीं निकल सका है। अब नाराज नागरिकों ने दो दिन के भीतर पेयजल आपूर्ति सुचारु नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
तल्लादेश क्षेत्र के मंच, दुबड़जैनल, खोकिया आदि गांवों में 12 नवंबर से नलों में पानी की एक बूंद नहीं टपकी है। ग्रामीण शेर सिंह महर, राहुल सिंह, श्याम सिंह, विनोद सिंह आदि का कहना है कि पानी की आपूर्ति बाधित होने की जानकारी जल संस्थान को अब तक चार बार दी जा चुकी है, लेकिन अब तक खामी को दूर नहीं किया जा सका है। इसके चलते लोग नौले और गधेरे से पानी ढोने को मजबूर हो रहे हैं। मध्यान्ह भोजन योजना के अलावा बैंक, स्कूल व अन्य सरकारी कार्यालयों के कर्मियों को भी दुश्वारी आ रही है। लोगों ने दो दिन के भीतर पेयजल व्यवस्था सुचारु नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
कोट
मंच, दुबड़जैनल आदि इलाकों में करीब सात किलोमीटर दूर सातखोला भूड़ के जल स्रोत से पानी की आपूर्ति की जा रही है। इस लंबी पेयजल लाइन की खामी को ठीक करने के लिए एक बार कुछ कर्मियों को भेजा गया था, लेकिन गड़बड़ी दूर नहीं हो सकी थी। पेयजल लाइन की खामी को दूर करने के लिए रविवार को चंपावत से तकनीकी टीम भेजी जाएगी।
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एसएस थापा,
कनिष्ठ अभियंता,
जल संस्थान, चंपावत।
शहरों के हाल भी ठीक नहीं, मिल रहा महज दो-तिहाई जल
चंपावत। जिले में गर्मियों में तो पानी का संकट उफान पर रहता है, मगर इन दिनों कड़ाके की ठंड के बावजूद पानी का अभाव बना हुआ है। जिले के नगरीय क्षेत्रों में भी बस दो-तिहाई पानी ही मिल पा रहा है।
जल संस्थान के चंपावत डिवीजन के मुताबिक जिले के चार नगरीय क्षेत्रों में रोजाना औसतन 67.40 लाख लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन उपलब्धता 42.40 लाख लीटर (62.97 प्रतिशत) की है। जिले में चार नगरीय व 285 ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाएं हैं। इनमें से नगरीय योजनाओं सहित कुल 245 योजनाएं चल रही है।
जिले के नगरीय क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता की मौजूदा तस्वीर
शहर दैनिक जरूरत उपलब्धता (लाख लीटर में)
चंपावत 16.20 7.50
लोहाघाट 16.80 9.20
टनकपुर 23.70 18.20
बनबसा 10.70 7.50
तल्लादेश क्षेत्र के मंच, दुबड़जैनल, खोकिया आदि गांवों में 12 नवंबर से नलों में पानी की एक बूंद नहीं टपकी है। ग्रामीण शेर सिंह महर, राहुल सिंह, श्याम सिंह, विनोद सिंह आदि का कहना है कि पानी की आपूर्ति बाधित होने की जानकारी जल संस्थान को अब तक चार बार दी जा चुकी है, लेकिन अब तक खामी को दूर नहीं किया जा सका है। इसके चलते लोग नौले और गधेरे से पानी ढोने को मजबूर हो रहे हैं। मध्यान्ह भोजन योजना के अलावा बैंक, स्कूल व अन्य सरकारी कार्यालयों के कर्मियों को भी दुश्वारी आ रही है। लोगों ने दो दिन के भीतर पेयजल व्यवस्था सुचारु नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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कोट
मंच, दुबड़जैनल आदि इलाकों में करीब सात किलोमीटर दूर सातखोला भूड़ के जल स्रोत से पानी की आपूर्ति की जा रही है। इस लंबी पेयजल लाइन की खामी को ठीक करने के लिए एक बार कुछ कर्मियों को भेजा गया था, लेकिन गड़बड़ी दूर नहीं हो सकी थी। पेयजल लाइन की खामी को दूर करने के लिए रविवार को चंपावत से तकनीकी टीम भेजी जाएगी।
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एसएस थापा,
कनिष्ठ अभियंता,
जल संस्थान, चंपावत।
शहरों के हाल भी ठीक नहीं, मिल रहा महज दो-तिहाई जल
चंपावत। जिले में गर्मियों में तो पानी का संकट उफान पर रहता है, मगर इन दिनों कड़ाके की ठंड के बावजूद पानी का अभाव बना हुआ है। जिले के नगरीय क्षेत्रों में भी बस दो-तिहाई पानी ही मिल पा रहा है।
जल संस्थान के चंपावत डिवीजन के मुताबिक जिले के चार नगरीय क्षेत्रों में रोजाना औसतन 67.40 लाख लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन उपलब्धता 42.40 लाख लीटर (62.97 प्रतिशत) की है। जिले में चार नगरीय व 285 ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाएं हैं। इनमें से नगरीय योजनाओं सहित कुल 245 योजनाएं चल रही है।
जिले के नगरीय क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता की मौजूदा तस्वीर
शहर दैनिक जरूरत उपलब्धता (लाख लीटर में)
चंपावत 16.20 7.50
लोहाघाट 16.80 9.20
टनकपुर 23.70 18.20
बनबसा 10.70 7.50