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खिलानंद की मेहनत से 250 नाली बंजर जमीन पर लहलहाई फसल
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चंपावत। मुनाफे के बजाय बढ़ रहे घाटे के चलते ज्यादातर लोग खेती से मुंह मोड़ रहे हैं, लेकिन इस जिले में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो इस चुनौती का बहादुरी से मुकाबला कर रहे हैं। चंपावत के पास के गांव खर्ककार्की के नौजवान खिलानंद जोशी ने बंजर पड़ी 250 नाली जमीन को किराये पर लेकर अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से आज खेती लायक बना दिया है। वह लहसुन, प्याज और अदरक की खेती कर रहे हैं।
जल संस्थान में संविदा में चालक रहे खिलानंद जोशी अपने काम से संतुष्ट नहीं थे। लिहाजा उन्होंने खेती की ओर कदम बढ़ाए। यहां से पांच किलोमीटर दूर चौकी गांव के बसंत गहतोड़ी की 250 नाली बंजर पड़ी जमीन को किराये पर लेकर खेती करने की ठानी। 20 नाली में उन्होंने सितंबर-अक्तूबर माह में लहसुन की खेती शुरू की। 15 हजार रुपये से तीन कुंतल बीज खेतीखान से खरीदकर लगाए। बांज के पत्तों की खाद के पोषण के साथ इसकी गहनता से परवरिश की। अब लहसुन की पौध फल-फूल रही हैं। उन्होंने गुर्खोली से 3 हजार रुपये के प्याज के पौधे लेकर 125 नाली जमीन पर प्याज की खेती की। इसके अलावा पंतनगर से 15 कुंतल बीज लाकर 25 नाली खेत में अदरक की खेती शुरू की। शेष बची जमीन पर आलू और कीवी की खेती करने की योजना है।
उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए वह कुएं का सहारा ले रहे हैं। जंगली जानवरों से फसल को बचाने के लिए ताड़बाड़ और चौकीदारी पर जोर दिया है। उनकी यह नई पहल इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। वह अन्य लोगों के लिए मिसाल है। मुख्य कृषि अधिकारी एस कुमार का कहना है कि प्रगतिशील काश्तकारों को विभाग हर मुमकिन मदद देगा।
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जल संस्थान में संविदा में चालक रहे खिलानंद जोशी अपने काम से संतुष्ट नहीं थे। लिहाजा उन्होंने खेती की ओर कदम बढ़ाए। यहां से पांच किलोमीटर दूर चौकी गांव के बसंत गहतोड़ी की 250 नाली बंजर पड़ी जमीन को किराये पर लेकर खेती करने की ठानी। 20 नाली में उन्होंने सितंबर-अक्तूबर माह में लहसुन की खेती शुरू की। 15 हजार रुपये से तीन कुंतल बीज खेतीखान से खरीदकर लगाए। बांज के पत्तों की खाद के पोषण के साथ इसकी गहनता से परवरिश की। अब लहसुन की पौध फल-फूल रही हैं। उन्होंने गुर्खोली से 3 हजार रुपये के प्याज के पौधे लेकर 125 नाली जमीन पर प्याज की खेती की। इसके अलावा पंतनगर से 15 कुंतल बीज लाकर 25 नाली खेत में अदरक की खेती शुरू की। शेष बची जमीन पर आलू और कीवी की खेती करने की योजना है।
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उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए वह कुएं का सहारा ले रहे हैं। जंगली जानवरों से फसल को बचाने के लिए ताड़बाड़ और चौकीदारी पर जोर दिया है। उनकी यह नई पहल इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। वह अन्य लोगों के लिए मिसाल है। मुख्य कृषि अधिकारी एस कुमार का कहना है कि प्रगतिशील काश्तकारों को विभाग हर मुमकिन मदद देगा।
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