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पंचेश्वर बांध:नौ माह से ठप है पेड़ों की गिनती
Updated Thu, 29 Nov 2018 10:35 PM IST
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चंपावत। 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा लागत से प्रस्तावित पंचेश्वर बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की गिनती के लिए 22 लाख रुपये भारी पड़ रहे हैं। इस रकम के नहीं मिलने से पेड़ों की गिनती पर विराम लग गया है।
पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले इलाकों में पिछले साल 26 दिसंबर से पेड़ों की गिनती शुरू हुई। छह टीमों ने पेड़ों को गिनने का काम किया। काली कुमाऊं के वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी ने बताया कि रैघांव से शुरू कर तोलागांव, सुंगारखाल, कोठेरा, बेट्टा, नेत्र सलान, बरयूड़ी सहित डूब क्षेत्र में आने वाले कई वन क्षेत्रों में करीब 75 हजार पेड़ों को गिना गया। मजदूरों को दैनिक आधार पर मजदूरी देनी थी। अब तक बांध से संबंधित कंपनी ने एक भी रुपया नहीं दिया है।
पेड़ों को गिनने के लिए 22 लाख रुपये की मांग पिछले साल सितंबर में की गई थी। पेड़ों की गिनती में अब तक जो भी खर्च हुआ है, वह विभागीय अधिकारियों ने अपनी जेब से लगाया है। इस कारण मार्च के आखिरी सप्ताह से पेड़ों की गिनती बंद कर दी गई है।
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प्रभागीय वनाधिकारी कुबेर सिंह बिष्ट का कहना है कि पंचेश्वर बांध से संबंधित वाप्कोस कंपनी ने धन के भुगतान के लिए फरवरी में बैंक खाता संख्या मांगी, मगर धन अब तक नहीं मिल सका है। जिलाधिकारी सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि वापकोस की ओर से धन मिलने के बाद ये धनराशि वन विभाग को दे दी जाएगी।
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पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले इलाकों में पिछले साल 26 दिसंबर से पेड़ों की गिनती शुरू हुई। छह टीमों ने पेड़ों को गिनने का काम किया। काली कुमाऊं के वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी ने बताया कि रैघांव से शुरू कर तोलागांव, सुंगारखाल, कोठेरा, बेट्टा, नेत्र सलान, बरयूड़ी सहित डूब क्षेत्र में आने वाले कई वन क्षेत्रों में करीब 75 हजार पेड़ों को गिना गया। मजदूरों को दैनिक आधार पर मजदूरी देनी थी। अब तक बांध से संबंधित कंपनी ने एक भी रुपया नहीं दिया है।
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पेड़ों को गिनने के लिए 22 लाख रुपये की मांग पिछले साल सितंबर में की गई थी। पेड़ों की गिनती में अब तक जो भी खर्च हुआ है, वह विभागीय अधिकारियों ने अपनी जेब से लगाया है। इस कारण मार्च के आखिरी सप्ताह से पेड़ों की गिनती बंद कर दी गई है।
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प्रभागीय वनाधिकारी कुबेर सिंह बिष्ट का कहना है कि पंचेश्वर बांध से संबंधित वाप्कोस कंपनी ने धन के भुगतान के लिए फरवरी में बैंक खाता संख्या मांगी, मगर धन अब तक नहीं मिल सका है। जिलाधिकारी सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि वापकोस की ओर से धन मिलने के बाद ये धनराशि वन विभाग को दे दी जाएगी।
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