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जल्द ऑनलाइन बिकेगा चंपावत का लाल चावल व चाय
Updated Tue, 20 Feb 2018 10:49 PM IST
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चंपावत। चंपावत जिले का लाल चावल (रेड राइस) और चाय जल्द ही ऑनलाइन बिकेगी। इसके लिए जिला प्रशासन और एक गैर सरकारी संगठन ने ई-कॉमर्स वेबसाइट तैयार की है। बुधवार को केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री अजय टम्टा वेबसाइट का उद्घाटन करेंगे।
जिला प्रशासन और डायस फाउंडेशन की पहल पर इंटरनेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईसीडीएस) इस ई-कॉमर्स वेबसाइट को तैयार किया गया है। आईसीडीएस की चंपावत शाखा के अध्यक्ष केशव गुप्ता का कहना है कि वेबसाइट के माध्यम से पहाड़ के लाल चावल और जैविक चाय को दुनिया भर का बाजार मिल सकेगा। इससे यहां के किसानाें की आय भी बढ़ेगी।
भविष्य में गहत, सोयाबीन, गडेरी, नाशपाती, सिटरस फलों सहित यहां के कई अन्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी। इससे क्षेत्र की आर्थिक प्रगति होगी। उधर भारतीय किसान यूनियन के चंपावत जिलाध्यक्ष नवीन करायत का कहना है कि किसानों को ऐसे किसी कार्यक्रम की जानकारी तक नहीं दी गई है।
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घट रहा धान का उत्पादन
चंपावत जिले में लाल चावल तो दूर, चावल के उत्पादन में ही गिरावट आ रही है। कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि चंपावत में इस वक्त करीब 5064 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती हो रही है, जिसमें 6363 मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ।
वहीं 2010-11 में 7216 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती थी, जिसमें 7455 एमटी की पैदावार होती थी। जिले में ज्यादातर धान की पैदावार मैदानी क्षेत्र और पहाड़ के घाटी वाले इलाकों में होती है। वहीं माना जा रहा है कि ऑनलाइन बिक्री के बाद इसका उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। अच्छे दाम मिलने पर किसान इसकी खेती करेंगे।
210 हेक्टेयर में हो रहा चाय का उत्पादन
चंपावत जिले के पर्वतीय क्षेत्र में उत्पादित चाय जैविक होने की वजह से खूब पसंद की जाती है। चाय विकास बोर्ड के चंपावत के प्रबंधक डेसमंड बर्कबेक ने बताया कि इस वक्त 210.90 हेक्टेयर एरिया में चाय की खेती की जा रही है।
457.83 कुंतल हरी पत्ती का उत्पादन हुआ। इसमें से 105.59 कुंतल तैयार चाय को चाय बोर्ड कोलकात्ता के जरिए बेचा जाता है। इस काम से 349 महिलाओं सहित कुल 411 लोगों को रोजगार मिल रहा है।
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जिला प्रशासन और डायस फाउंडेशन की पहल पर इंटरनेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (आईसीडीएस) इस ई-कॉमर्स वेबसाइट को तैयार किया गया है। आईसीडीएस की चंपावत शाखा के अध्यक्ष केशव गुप्ता का कहना है कि वेबसाइट के माध्यम से पहाड़ के लाल चावल और जैविक चाय को दुनिया भर का बाजार मिल सकेगा। इससे यहां के किसानाें की आय भी बढ़ेगी।
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भविष्य में गहत, सोयाबीन, गडेरी, नाशपाती, सिटरस फलों सहित यहां के कई अन्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी। इससे क्षेत्र की आर्थिक प्रगति होगी। उधर भारतीय किसान यूनियन के चंपावत जिलाध्यक्ष नवीन करायत का कहना है कि किसानों को ऐसे किसी कार्यक्रम की जानकारी तक नहीं दी गई है।
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घट रहा धान का उत्पादन
चंपावत जिले में लाल चावल तो दूर, चावल के उत्पादन में ही गिरावट आ रही है। कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि चंपावत में इस वक्त करीब 5064 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती हो रही है, जिसमें 6363 मीट्रिक टन का उत्पादन हुआ।
वहीं 2010-11 में 7216 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती थी, जिसमें 7455 एमटी की पैदावार होती थी। जिले में ज्यादातर धान की पैदावार मैदानी क्षेत्र और पहाड़ के घाटी वाले इलाकों में होती है। वहीं माना जा रहा है कि ऑनलाइन बिक्री के बाद इसका उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। अच्छे दाम मिलने पर किसान इसकी खेती करेंगे।
210 हेक्टेयर में हो रहा चाय का उत्पादन
चंपावत जिले के पर्वतीय क्षेत्र में उत्पादित चाय जैविक होने की वजह से खूब पसंद की जाती है। चाय विकास बोर्ड के चंपावत के प्रबंधक डेसमंड बर्कबेक ने बताया कि इस वक्त 210.90 हेक्टेयर एरिया में चाय की खेती की जा रही है।
457.83 कुंतल हरी पत्ती का उत्पादन हुआ। इसमें से 105.59 कुंतल तैयार चाय को चाय बोर्ड कोलकात्ता के जरिए बेचा जाता है। इस काम से 349 महिलाओं सहित कुल 411 लोगों को रोजगार मिल रहा है।