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आखिर जगमगा गया सीमांत का भनार तोक
Updated Sun, 06 May 2018 10:53 PM IST
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चंपावत। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश की सौराई ग्राम पंचायत के भनार तोक का अंधेरा दूर हो गया है। बिजली लाइनों की मरम्मत कर रविवार को यहां उजाला कर दिया गया है। इसी के साथ बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
सौराई ग्राम पंचायत की तीन ग्राम पंचायतों में से सौराई व हरतोला में पहले से बिजली थी, लेकिन 2007 में ही बिजली के पोल, लाइन व ट्रांसफार्मर लगे होने के बावजूद भनार तोक अंधेरे में था। इसकी वजह इन पुरानी लाइनों के रखरखाव की कमी से आई खराबी था। 29 अप्रैल को ग्राम प्रधान धारू देवी, उप प्रधान दान सिंह व ग्राम पंचायत के सदस्यों ने विद्युतीकृत नहीं होने पर एक मई को इस्तीफा और दो मई से कलक्ट्रेट में अनशन की धमकी दी थी। इससे सकते में आए विभाग ने दो मई से विभागीय टीम भेज काम शुरू करवा दिया।
उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चंपावत के कनिष्ठ अभियंता आरसी पंत ने बताया कि भनार तोक की लाइन की मरम्मत पूरी कर लिया गया है। अब बिजली कनेक्शन के लिए सोमवार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सौभाग्य योजना के अंतर्गत आवेदक को एक दिन के भीतर नि:शुल्क कनेक्शन दिए जाएंगे। अलबत्ता एपीएल वर्ग को विद्युत संयोजन के रूप में बिजली बिल में दस महीने तक प्रति माह 50 रुपये की अतिरिक्त राशि देनी होगी।
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कई तोकों में लाइनें, मगर उजाला नहीं
सौराई ग्राम पंचायत के भनार तोक को भले ही विद्युतीकृत कर दिया गया हो, मगर चंपावत जिले में अभी भी अनेकों ऐसे इलाके हैं, जहां बिजली के पोल खड़े हैं, पर बिजली नहीं है। नेपाल सीमा से लगे चूका, खिरद्वारी, कलढुंगा, कलसुनिया सहित कई गांवों में वर्षों पूर्व बिजली के खंभें लगे, लेकिन ये इलाके कभी जगमगा नहीं सके। ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी सहित इन इलाकों के लोग अनेकों बार इस मसले को बीडीसी की बैठकों सहित कई मंचों पर उठा चुके हैं, लेकिन हालात में कोई बदलाव नहीं हो सका। इधर ऊर्जा निगम का कहना है कि 2013 की आपदा में इन गांवों की बिजली की लाइनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। अब इन गांवों को दीनदयाल विद्युतीकरण योजना से जोड़ा जाएगा। वहीं भारी जंगल और आपदाग्रस्त क्षेत्र के चलते चूका गांव को सौर ऊर्जा से विद्युतीकृत करने की बात कही जा रही है।
सौराई ग्राम पंचायत की तीन ग्राम पंचायतों में से सौराई व हरतोला में पहले से बिजली थी, लेकिन 2007 में ही बिजली के पोल, लाइन व ट्रांसफार्मर लगे होने के बावजूद भनार तोक अंधेरे में था। इसकी वजह इन पुरानी लाइनों के रखरखाव की कमी से आई खराबी था। 29 अप्रैल को ग्राम प्रधान धारू देवी, उप प्रधान दान सिंह व ग्राम पंचायत के सदस्यों ने विद्युतीकृत नहीं होने पर एक मई को इस्तीफा और दो मई से कलक्ट्रेट में अनशन की धमकी दी थी। इससे सकते में आए विभाग ने दो मई से विभागीय टीम भेज काम शुरू करवा दिया।
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उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चंपावत के कनिष्ठ अभियंता आरसी पंत ने बताया कि भनार तोक की लाइन की मरम्मत पूरी कर लिया गया है। अब बिजली कनेक्शन के लिए सोमवार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सौभाग्य योजना के अंतर्गत आवेदक को एक दिन के भीतर नि:शुल्क कनेक्शन दिए जाएंगे। अलबत्ता एपीएल वर्ग को विद्युत संयोजन के रूप में बिजली बिल में दस महीने तक प्रति माह 50 रुपये की अतिरिक्त राशि देनी होगी।
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कई तोकों में लाइनें, मगर उजाला नहीं
सौराई ग्राम पंचायत के भनार तोक को भले ही विद्युतीकृत कर दिया गया हो, मगर चंपावत जिले में अभी भी अनेकों ऐसे इलाके हैं, जहां बिजली के पोल खड़े हैं, पर बिजली नहीं है। नेपाल सीमा से लगे चूका, खिरद्वारी, कलढुंगा, कलसुनिया सहित कई गांवों में वर्षों पूर्व बिजली के खंभें लगे, लेकिन ये इलाके कभी जगमगा नहीं सके। ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी सहित इन इलाकों के लोग अनेकों बार इस मसले को बीडीसी की बैठकों सहित कई मंचों पर उठा चुके हैं, लेकिन हालात में कोई बदलाव नहीं हो सका। इधर ऊर्जा निगम का कहना है कि 2013 की आपदा में इन गांवों की बिजली की लाइनें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। अब इन गांवों को दीनदयाल विद्युतीकरण योजना से जोड़ा जाएगा। वहीं भारी जंगल और आपदाग्रस्त क्षेत्र के चलते चूका गांव को सौर ऊर्जा से विद्युतीकृत करने की बात कही जा रही है।